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बाल अधिकार के बारे में जागरुकता फैलाने कठपुतलियों में भर दी जान

Updated: IST child protaction
बाल विवाह रोकथाम, कन्या भू्रण हत्या, साक्षरता, बाल अधिकार, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसे कई विषयों पर कठपुतलियों ने रोड और स्टेज शो कर लोगों को जागरूक किया

अंजली [email protected] बाल विवाह रोकथाम, कन्या भू्रण हत्या, साक्षरता, बाल अधिकार, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसे कई विषयों पर कठपुतलियों ने रोड और स्टेज शो कर लोगों को जागरूक किया। मौका था छत्तीसगढ़ राज्य बाल संरक्षण आयोग और कठपुतली एवं नाट्य कला मंच की ओर से आयोजित जन-जागरूकता अभियान का।

रोड शो के दौरान फायर ब्रिगेड चौक से घड़ी चौक होते हुए बाल आश्रम तक आयोजित कार्यक्रम में 8 फीट की कठपुतली को अपने सामने देखकर लोग आश्चर्यचकित नजर आए। सभी ने उनकी बातें सुनी और सेल्फी भी लिया। इस दौरान आयोग की अध्यक्ष शताब्दी सुबोध पांडेय, मंच की सचिव किरण मोइत्रा सहित टीम के अन्य सदस्य उपस्थित थे।

8 फीट की कठपुतली
कठपुतली एवं नाट्य कला मंच के पास पांच तरह की कठपुतली है जिसमें धागे वाली, रॉड वाली, हैंड वाली छाया वाली और रोड शो वाली कठपुतली शामिल है। इनमें सबसे बड़ी कठपुतली रोड शो वाली है जो 8 से 9 फीट की है। इस कठपुतली के कॉस्ट्यूम के अंदर एक व्यक्ति को रखा जाता है जो गाने को सुनकर डांस करते हैं।

गोलू-मोलू ने बैड और गुड टच समझाया
कठपुतलियों के नाम भी हैं जिसमें चंगु-मंगु, सुंदरी, राजा-रानी, गोलू-मोलू, मुंहफट शामिल हैं। इसमें मुंहफट लोगों को अपनी बात कहता है और दूसरों की भी बातें सुनता है। बाल आश्रम में आयोजित स्टेज शो के दौरान बच्चों को टीम ने बाल अधिकार और गुड टच बैड टच के बारे में बताया। इसमें गोलू-मोलू ने बच्चों को नो गो टेल का मतलब बताया। उन्होंने कहा कि जब भी आपको कोई बैड टच करता है तो पहले नो बोले, फिर वहां से भाग जाएं और अपनी बात को किसी से कहें।

पपेट शो से जल्दी जागरूक होते हैं
मंच की सचिव किरण मोइत्रा ने बताया कि मनोरंजन के माध्यम से लोग जल्दी जागरूक होते हैं। अगर आप किसी बात को सेमिनार या लेक्चर के माध्यम से बताते हैं तो लोग जल्दी भूल जाते हैं। पहले हमारे पास सिर्फ धागे वाली कठपुतली थी, लेकिन फिर मेरी सास नीलिमा मोइत्रा ने बड़ी कठपुतली बनाने की सोची और आज रंग ला रही है। उन्होंने बताया कि हमारी टीम महिला बाल विकास विभाग और बाल संरक्षण आयोग से जुड़कर महिलाओं और बच्चों को जागरूक कर रहे हैं।

राज्य बाल अपराध संरक्षण संरक्षण आयोग के अध्यक्ष शताब्दी पाण्डेय ने बताया कि पपेट शो से लोगों में जल्दी जागरूकता आती हैं और बच्चों को समझाने के लिए सबसे अच्छा माध्यम है।

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