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शहर के अस्पतालों में आग लगी तो बुझाना मुश्किल

Updated: IST Fire System

रायपुर. राजधानी के निजी और सरकारी अस्पतालों में आग बुझाने की पर्याप्त इंतजाम का अभाव है। फायर सिस्टम व स्मोक सेंसर सिर्फ नाम के लिए लगे हैं। अधिकांश अस्पतालों में न तो फायर उपकरण है और न ही रेत से भरी बाल्टियों की व्यवस्था है। नर्सिंग होम एक्ट के तहत प्रशासन ने सभी निजी और सरकारी अस्पतालों को आग से बचाव के इंतजाम करने, फायर इक्विपमेंट लगाने और अपात स्थिति में अस्पताल से निकलने के रास्ते प्रदर्शित करने के लिए निर्देश दिए गए थे। लेकिन इसका अनुपालन नहीं किया जा रहा। अधिकांश निजी अस्पतालों में फायर फाइटिंग सिस्टम नहीं हैं। पत्रिका की पड़ताल में खतरे से से खेल रहे अस्पतालों की हकीकत सामने आई।

  1. 126 को लाइसेंस जारी हुआ है अब तक
  2. 1050 स्वास्थ्य केंद्र हैं कुल मिलाकर
  3. 450 है एलोपैथी अस्पताल, क्लीनिक और पैथोलॉजी की संख्या
जिला अस्पताल

जिला अस्पताल में आग से बचाव के लिए कोई इंतजाम नहीं है। यहां न तो सेंट्रल फायर सिस्टम है और न ही फायर फाइटिंग उपकरण की व्यवस्था है। इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि अस्पताल को जल्द ही पंडरी स्थित जिला अस्पताल में शिफ्ट किया जाएगा, वहां पर फायर सिस्टम की व्यवस्था है।


घट चुकी हैं घटनाएं

30 नवंबर 2012 में अंबेडकर अस्पताल के प्रसुति वार्ड में शॉर्ट सर्कि ट से आग लग गई थी। 10 मार्च 2011 को एसी में आग लगने से वार्डों में धुआं फैल गया था। अंबेडकर अस्पताल में आग बुझाने का जिम्मा सुरक्षाकर्मियों को दिया गया है। आग बुझाने उन्हें ट्रेनिंग नहीं दी गई है। यही कारण है कि पहले घटी घटनाओं के दौरान कर्मचारी आग संयंत्र की नोजल तक खोल पाने में नाकाम साबित हुए थे।

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