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फर्जीवाड़े के आरोप में गया जेल, लौटते ही चिटफंड कंपनी बनाकर लगाया हजारों को चूना

Updated: IST complaint was against Guru Sai real estate company
एलसीजियो नाम की चिटफंड कंपनी के संचालक को 2011 में पांच साल पहले चिटफंड कंपनी के नाम पर लाखों की ठगी करने के आरोप में कवर्धा में गिरफतार कर जेल भेज दिया गया था

रायुपर. जिंदगी संवारने का सुनहरा अवसर का झांसा देकर करोड़ों की ठगी का खेल सामने आया है। एलसीजियो नाम की चिटफंड कंपनी के संचालक को 2011 में पांच साल पहले चिटफंड कंपनी के नाम पर लाखों की ठगी करने के आरोप में कवर्धा में गिरफतार कर जेल भेज दिया गया था। आरोपी कुछ ही दिन में जमानत पर जेल से वापस आया गया।

जेल से आने के बाद आरोपी ने रायपुर समेते पूरे प्रदेश व पड़ोसी राज्यों के भी लोगों से ठगी की। बतादें कि राजधानी के खतराई में संचालित होने वाली लाइफ क्रिएटिव गोल्डन अपार्चुनिटी (एलसीजियो) नाम की चिटफंड कंपनी ने तकरीबन 60 हजार लोगों से 18 करोड़ी की ठगी की है। यह सिलसिला बीते छह साल से चल रही थी, अब कंपनी के कार्यालय में ताला लग चुका है। निवेशक संन्यासीपारा जीटी कांप्लेक्श स्थित कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। इस संबंध में कलक्टर और खतराई थानें में भी शिकायत की गई है लेकिन मामले में अब तक जांच भी शुरू नहीं हुई है। कंपनी के डॉरेक्टर मित्र वरुण बंजारे ने रकम दोगुना करने का दावा करके बड़ा गोलमाल किया है। मामले के से जुड़े दस्तावेज बताते हैं कि आरोपी ने कार, बंगला और चार गुना नकदी देने का वादा करने वसूली की थी।

मप्र-छग- उड़ीस में फैलाया कारोबार
चिटफंड कंपनी द्वारा ठगी किए जाने के आरोपी मास्टरमाइंडों ने इस कारोबार के लिए आदिवासी क्षेत्रों को चुना था। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा राज्यों में आदिवासी इलाकों में इन्होंने अपना नेटवर्क फैलाया। मध्य प्रदेश , राजनांदगांव और रायपुर के अलावा अन्य शहरों में ब्रांच चला रहे थे।

चैन सिस्टम से बने थे एजेंट
एजेंटों और निवेशकों ने बताया कि कंपनी चैन सिस्टम से एजेंट तैयार करती थी। एक एजेंट दूसरे लोगों को जोड़ता था और वो नए एजेंट अन्य को। ऐसे करते करते हजारों लोग इसके फेर में आ गए। जिन एजेंटों ने लोगों से निवेश कराया, अब वे भी खासे परेशान हो रहे हैं। जिन्होंने कंपनी में निवेश किया वे एजेंटों पर दबाव बना रहे हैं। एजेंटों की मानें तो वे भी अपना रुपया इसमें लगाकर फंसे हुए हैं।

ऐसे उजागर हुआ मामला
चिटफंड कंपनी के फर्जीवाड़े की हकीकत तब सामने आने लगी, जब पॉलिसी मैच्योर होने के बाद जमाकर्ता भुगतान के लिए दफ्तर के चक्कर काटने लगे। मई माह से इस कंपनी ने लोगों का पैसा देना बंद कर दिया। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा तो अपराध दर्ज करने के बाद पुलिस ने इस पूरे गिरोह की हकीकत जानकर आरोपियों को गिरफ्तार कर रिकार्ड जब्त किए।

केस- खमतराई निवासी दीपक कुमार ने बतया कि कंपनी में 5 साल तक पैसे जमा करवाए गए। हमारे माध्यम से नए ग्राहकों को भी जोड़ा गया। इस तरह एक दूसरे के माध्यम से पैसे जमा करवाए अब हमारे पैसे तो दूर जिन परचितों को हमने जोड़ा था उनके भी पैसे नहीं मिले।

केस- सुरेश लहरे का कहना है कि कंपनी के झांसे में आ कर हमने अपने परिवार के लोगों को जोड़ दिया अब पैसे नहीं मिलने के कारण यह पारिवारिक विवाद का कारण बन गया है।

एसपी संजीव शुक्ला ने बताया कि शिकायत के संबंध में जानकारी नहीं है, अभी वर्तमान में शिकायत नहीं मिली है। यदि शिकायत आएगी तो जांच करवा कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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