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छत्तीसगढ़ के शहरों में बेतरतीब विकास, मास्टर प्लान का पालन नहीं

Updated: IST master plan in Chhattisgarh
छत्तीसगढ़ में रायपुर सहित किसी भी शहर में मास्टर प्लान के अनुरूप विकास नहीं हो पा रहा है। ज्यादातर शहरों में मास्टर प्लान की अवहेलना हो रही है।

रायपुर. छत्तीसगढ़ में रायपुर सहित किसी भी शहर में मास्टर प्लान के अनुरूप विकास नहीं हो पा रहा है। ज्यादातर शहरों में मास्टर प्लान की अवहेलना हो रही है। इसके चलते शहरों मेंअवैध कॉलोनियां, अवैध कॉम्पलेक्स और झुग्गी-झोपडिय़ों की बाढ़ सी आ गई है। ज्यादातर शहरों में मास्टर प्लान में छोड़े गए प्लान एरिया भी अवैध निर्माणों से पट गए हैं। हाल ही में सरकार अवैध बस्तियों के नियमन के लिए नया एक्ट लेकर आई है। यह एक्ट भी मास्टर प्लान के विपरीत है, क्योंकि इस तरह के अवैध निर्माण को मास्टर प्लान इजाजत नहीं देता।

रायपुर का विकास मास्टर प्लान-2021 के तहत किए जाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन किसी भी मामले में इसकी पालना नहीं की जा रही है। राजधानी की जरूरतों को बढ़ाने के लिए सरकार ने मास्टर प्लान-2021 में ही संशोधन कर डाला। सर्वे में सामने आया कि मास्टर प्लान में शामिल 35 इलाकों में सारे मापदंडों की अनदेखी कर आवासीय और व्यवसायिक तथा सडक़ें बना दी गईं। मास्टर प्लान पर पैबंद लगाने के लिए इसके दायरे को 40 हजार से बढ़ाकर 75 हजार एकड़ कर दिया गया। 64 नए गांव भी शामिल किए गए। कुछ इलाकों में भूमि उपयोग बदलने का प्रस्ताव दिया गया। प्लान बनाकर एजेंसी ने काफी पहले सरकार को सौंप दिया। लेकिन इसे अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।

दुर्ग-भिलाई में भी अनदेखी
ट्विनसिटी दुर्ग-भिलाई का विकास भी मास्टर प्लान के मुताबिक नहीं हो पाया है। सरकारी खामियों को छिपाने के लिए दोनों शहरों का संयुक्त मास्टर प्लान-2016 का मसौदा तैयार कर जनता के सामने रख दिया गया। इस प्लान पर ११५५ लोगों की आपत्तियां और सुझाव मिले। प्लान में 100 गांव शामिल किए गए हैं। 90 फीसदी से अधिक आपत्तियां आवासीय निर्माणों को लेकर आई। लोगों का कहना है, पुराने प्लान के पालन में सरकारी एजेंसियों ने लापरवाही बरती।

बिलासपुर 6 साल पीछे
बिलासपुर का मास्टर प्लान 6 साल पीछे चल रहा है। मास्टर प्लान-2011 की अवधि खत्म होने के बाद नया प्लान नहीं बनाया गया। बीते साल 62 गांवों को शामिल करके नए मास्टर प्लान-2016 का मसौदा जनता के सामने रखा गया। इस पर 2356 आपत्तियां आईं। अधिकतर आपत्तियां मास्टर प्लान-2011 के तहत काम पूरे नहीं होने की हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश के सभी शहरों में नियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान की पालना अनिवार्य होनी चाहिए। इसमें किसी भी तरह के फेरबदल की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।

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