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पैथौलॉजी लैब का कमाल, 1 साल में महिला का ब्लड 'ए' पॉजिटिव से हुआ नेगेटिव

Updated: IST pathology lab
गर्भवती महिला की ब्लड जांच करने में एक लैब में बड़ी गड़बड़ी मामला सामने आया है। फाफाडीह स्थिति मेडीपैथ लैब ने एक साल पहले महिला का ब्लड ग्रुप 'ए' पॉजिटिव बताया था

जितेन्द्र दहिया/रायपुर. गर्भवती महिला की ब्लड जांच करने में एक लैब में बड़ी गड़बड़ी मामला सामने आया है। फाफाडीह स्थिति मेडीपैथ लैब ने एक साल पहले महिला का ब्लड ग्रुप 'ए' पॉजिटिव बताया था। इसी ब्लड रिपोर्ट के आधार पर महिला की पूरे 9 माह डिलवरी होने तक दवाई व इलाज चला। इस दौरान महिला को कई बार चक्कर आना और बीपी बढऩे जैसी शिकायतें होती रहीं। इस दौरान महिला को कई बार एलर्जी भी हुई, लेकिन किसी नामी लैब से मिली रिपोर्ट पर किसी ने संदेह नहीं किया। गनीमत थी कि महिला को ब्लड की जरूरत नहीं पड़ी नहीं तो महिला को गलत ब्लड लगाने से मौत भी हो सकती थी।

इस पूरे मामले का भेद तब खुला जब दो दिन पहले टांटीबंध निवासी शालिनी गोयल ने दूसरी प्रेंग्नेसी में एक निजी नर्सिंग होम ने महिला ने ब्लड ग्रुप की जांच करवाने को कहा गया। इस बार ब्लड रिपोर्ट देख कर महिला और उसके परिजनों के होश उड़ गए। इस बार उसी मेडीपैथ लैब में ब्लड गु्रप 'ए नेगेटिव' बताया। नर्सिंग होम के चिकित्सक का कहना है कि अगर निजी लैब की रिपोर्ट के आधार पर डिल्वरी के समय आप्रेशन कर दिया जाता तो महिला की जान को खतरा हो सकता था।

फिर भी संदेह
महिला के परिजनों को फिर भी लैब की रिपोर्ट पर संदेह हुआ। तो उन्होंने दोबारा एक अन्य निजी लैब में जांच कराई तो रिपोर्ट 'ओ नैगेटिव' बताया गया। तब जा कर परिजनों को वर्तमान रिपोर्ट पर विश्वास हुआ। बतादें कि महिला की दो-दो बार जांच के लिए लैब में 3-3 हजार रुपए वसूले गए।

पहले भी हो चुकी है गलती
राजधानी में निजी लैब में गलत रिपोर्ट देने का यह पहला मौका नहीं है जब इस प्रकार का मामला सामने आया हो। इससे पूर्व भी पंडरी स्थित एक निजी लैब द्वारा गलत ब्लड रिपोर्ट देने की बात सामने आई थी। लोगों का कहना है कि बेहतर उपचार के लिए लोगों को पहले टैस्ट करवाने की चिकित्सकों द्वारा राय दी जाती है लेकिन जब कुकुरमुत्तों की भांति पैदा हो रही निजी लैबोटरियों की रिपोर्ट ही गलत होगी तो रोगी का ठीक होना तो दूर बल्कि उसकी जान को खतरा बन सकता है।

पति ने ढूंढी दूसरी फाईल
दूसरी बार जब ब्लड ग्रुप टेस्ट के बाद लैब इंचार्ज की मुख्य पर्ची पर ए निगेटिव लिख दिया गया। यह देख पति का माथा ठनक गया उसे लगा कि शालिनी गोयल का ब्लड ग्रुप तो पॉजीटिव है। उसने लैब स्टाफ से कहा तो लैब स्टाफ ने तर्क दिया कि टेस्ट तुमने किया है या हमने। हालांकि उसे को पक्का यकीन था। तब जाकर पति ने पूरानी रिपोर्ट की फाइल तलाशी जिसमें पूराना ब्लड ग्रुप 'ए पॉजिटिव' देखने को मिला।

स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. पूजा कढ़ी ने बताया कि एनटी डी का इंजेक्शन, अगर ब्लड ए पाजिटिव है और निगेटिव के आधार पर महिला का ट्रीटमेंच किया गया है तो मां और बच्चे दोनों को खतरा हो सकता था। यदि रिपोर्ट के आधार पर ब्लड चढ़ा दिया जाता तो बड़ी मुसीबत हो सकती थी। शुक्र है एेस कुछ हुआ नहीं, इसे टैक्नीकली एरर कह सकते हैं।

सीएमएचओ एसके शांडिल्य ने बताया कि अब तक हमारे पास इस तरह की शिकायत नहीं मिली है यदि शिकायत मिलेगी तो जांच करके कार्रवाई की जाएगी।

मेडीपैथ लैब के संचालक डॉ. अकबर लीरानी ने बताया कि हमसे गलती तो हुई है इसके लिए हमने दो-दो बार परीक्षण किया है। इसे टैक्नीकल एरर कहते हैं।

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