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> > > > Raipur: Prayag Joshi left CA’s job and open Imli-Mahua school between naxalites

इस शख्स ने CA की जॉब छोडक़र नक्सलियों के बीच खोल दिया इमली-महुआ स्कूल 

Updated: IST Prayag Joshi
नक्सल प्रभावित कोंडगांव जिले के कोकोडी गाँव में प्रयाग जोशी नाम काशख्ससीए की जॉब छोड़कर आदिवासियों के बच्चों का भविष्य गढ रहा है, मुख्यमंत्री रमन सिंह भी उसके मुरीद हैं.

रायपुर. छत्तीसगढ़ के बस्तर का नाम सुनते ही नक्सली खौफ के चलते लोगों की धडक़नें बढऩे लगती हैं, ऐसी जगह पर कोई अनजान लाखों की नौकरी छोडक़र आदिवासियों के बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए अपना सबकुछ दांव पर लगा कर छोटे से गांव कोकोड़ी में स्कूल में पढ़ाने लग जाए तो आप उसे क्या कहेंगे। आज के जमाने में कोई ऐसा करे ऐसा सोचना भी मुश्किल लगता है, लेकिन महाराष्ट्र के एक चार्टेड अकाउंटेंड प्रयाग जोशी ने जो कर दिखाया है उसके लिए प्रदेश के सीएम रमन सिंह भी उनके मुरीद हो गए हैं।

जोशी खुद बता रहे हैं कि उन्होंने ये रास्ता चुना और आज उस गांव के बच्चों की तकदीर और तस्वीर कैसे गढ़ी जा रही है। उन्होंने बताया कि आज से लगभग दस साल पहले जब वे इस गांव पहुंचे थे, पढ़ाई के नाम से ही बच्चों को डर लगता था। स्कूल आने से भी बच्चे कतराते थे। स्कूल में पहले दिन सिर्फ दो ही बच्चे उपस्थित हुए थे लेकिन धीरे-धीरे ये कारवां बढ़ता गया और आज वे 54 बच्चों का भविष्य गढ़ रहे हैं, इनमें 34 छात्राएं और 20 छात्र शामिल हैं। इस विद्यालय में पूर्व प्राथमिक और पहली कक्षा से लेकर आठवीं तक पढ़ाई होती है।

खुद के पैसों से शुरू किया स्कूल
जोशी जी में स्कूल को लेकर जुनून ऐसा था कि उन्होंने अपनी नौकरी के दौरान कमाए हुए पैसों से ही स्कूल की नींव रखी। उसके बाद उनके कुछ दोस्तों ने भी इस मुहिम का सराहा और स्कूल के लिए आर्थिक सहयोग दिया। स्कूल के संचालन में किसी भी प्रकार की बाधा ना आए इसलिए उन्होंने शिक्षा का अधिकार कानून 2009 के तहत कोण्डागांव के जिला शिक्षा कार्यालय में वर्ष 2010 में अपने इस विद्यालय का पंजीयन भी करवा लिया।

इमली-महुआ ही क्यों रखा स्कूल का नाम?
स्कूल का नाम इमली-महुआ रखने का कारण बताते हुए जोशी ने कहा कि इन दोनों वृक्षों से आदिवासी समाज का काफी गहरा और भावनात्मक लगाव होता है। इस वजह से उन्होंने यह नाम रखा है।
बच्चों को दी जा रही छात्रवृत्ति
जोशी स्कूल के बच्चों के लिए अपनी ओर से छात्रवृत्ति भी दे रहे हैं। उन्होंने इसके लिए डाक घर में बच्चों के नाम से लोक भविष्य निधि (पीपीएफ) खाता भी खुलवा दिया है। खातों का संचालन बच्चों की माताओं के नाम से किया जा रहा है। पहली कक्षा के बच्चों को एक हजार रूपए, दूसरी के बच्चों को दो हजार रूपए, तीसरी के बच्चों को तीन हजार रूपए और इसी क्रम में आठवीं के बच्चों को आठ हजार रूपए की वार्षिक छात्रवृत्ति उनके द्वारा दी जाती है।

स्कूल के पहले दिन में और आज में जमीन-आसमान का अंतर
जोशी ने बताया कि जब स्कूल की शुरूआत की थी, तो वहां के बच्चे हिन्दी वर्णमाला भी बड़ी मुश्किल से समझ पाते थे, लेकिन आज ये बच्चे न सिर्फ धारा प्रवाह हिन्दी बोलते, पढ़ते और लिखते हैं, बल्कि अंग्रेजी भाषा भी वे धारा प्रवाह बोल लेते हैं।

स्कूल में होमी जहांगीर भाभा विज्ञान केन्द्र मुम्बई, एकलव्य संस्थान (होशंगाबाद), राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की पुस्तकें बच्चों को पढ़ाई जा रही हैं। आठवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद दो बालिकाएं राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय (एनआईओएस) के पाठ्यक्रम में दसवीं की परीक्षा की तैयारी कर रही हैं(स्वराज्य)

स्कूल के बारे में जानकर मुख्यमंत्री भी हो गए मुरीद
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने जैसे ही आदिवासी बहुल कोण्डागांव कोकोड़ी में सरकारी मदद के बिना स्थानीय बच्चों के लिए प्रयाग जोशी द्वारा संचालित इमली महुआ स्कूल के बारे में सुना वे गदगद हो उठे और उन्होंने उनकी खुले मन से प्रशंसा की। इतना ही नहीं सीएम ने जोशी को फोन कर बातचीत की और मिलने के लिए भी आमंत्रित किया।

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