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#CG10thresult : दर्जी का बेटा पेट पालने खेत में करता था काम, मेहनत से बन गया टॉपर

Updated: IST
दर्जी के बेटे ने 10वीं की परीक्षा में 97.33 अंक हासिल करते हुए सबको पीछे छोड़ दिया। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिवार की हैसियत इतनी नहीं कि प्राइवेट स्कूल में पढ़ा सके

रायपुर. राजधानी से 15किमी. दूर गुमा गांव के इस बेटे पर आज सब को गर्व है। गर्व इसलिए कि 10वीं की बोर्ड परीक्षा में उसने राज्य के टॉप-10 छात्रों की सूची में तीसरा स्थान हासिल किया। बेहद गरीब परिवार से होने के बाद भी पढ़ाई के प्रति लगन लगाए रखी,नतीजा सबसे सामने हैं। दर्जी के बेटे ने 10वीं की परीक्षा में 97.33 अंक हासिल करते हुए सबको पीछे छोड़ दिया। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिवार की हैसियत इतनी नहीं कि प्राइवेट स्कूल में पढ़ा सके। सरकारी स्कूल में पढ़कर करण ने वह मुकाम हासिल किया, जो कि शहरों के प्राइवेट स्कूल के बच्चे भी हासिल नहीं कर सके। मेहनत, लगन और ईमानदारी के दम पर करण ने वह कर दिखाया, जिसकी परिवार को उम्मीद नहीं थी।

पत्रिका से खास बातचीत में करण ने कहा कि गुरूजनों का आशीर्वाद और पढ़ाई पर फोकस के कारण यह उपलब्धि हासिल हो सकी है। करण से जब उनके टॉप-3 में आने के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि चूंकि उनका लक्ष्य ही टॉप रैंक में आना था इसलिए आश्चर्य नहीं हुआ। इसके लिए उन्होंने दिन-रात एक करते हुए पढ़ाई की थी।

अचानक नहीं मिलती सफलता

करण का कहना है कि सफलता अचानक नहीं मिलती। इसके लिए आपको लगातार विषय से जुड़ा रहना पड़ता है। पढ़ाई के समय आपको सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान रखना चाहिए। मनोरंजन के लिए खेल भी एक माध्यम हो सकता है।

लक्ष्य अभी कुछ सोचा नहीं

बोर्ड परीक्षा में टॉप रैंक में शामिल होने के बाद करण ने कहा कि उन्होंने भविष्य के लिए अभी कोई रणनीति तैयार नहीं की है। इसके बाद अगला लक्ष्य 12वीं की परीक्षा में बेहतर अंक हासिल करना होगा। 11वीं में वह गणित विषय लेकर पढ़ाई करेंगे। उनकी एजुकेशन सेक्टर में कॅरियर बनाने में रूचि है।

पिता ने की मजदूरी,फिर टेलरिंग भी

करण के पिता कार्तिक राम साहू ने टेलरिंग काम करने से पहले फैक्ट्री में मजदूरी की, लेकिन परिवार का खर्चा चलाना मुश्किल हो गया। इसके बाद परिवार की सलाह पर गांव में ही टेलरिंग का काम शुरू किया। उन्होंने कहा कि इस काम से जैसे-तैसे परिवार का खर्चा चल जाता है। दिवाली या शादी सीजन में ही कारोबार होता है।

पहली बार रायपुर आए

गांव में रहने वाले करण को जब पता चला कि उन्हें टॉप-3 में स्थान मिला है, तब पहली बार शहर की चकाचौंध देखी और मीडिया के सामने रू-ब-रू हुए।
स्लीपर और फुल आस्तीन शर्ट पहनते हैं करण
पैरों में स्लीपर, फुल आस्तीन की शर्ट पहने करण को देखने से एक सरल और बेहतर सामान्य छात्र की झलक दिखाई देती है। गांव से पले-बढ़े होने के कारण उनकी बोलने की शैली और स्वभाव शांत है। अपनी सफलता के लिए उन्होंने गुमा के शासकीय हायर सेंकडरी स्कूल के शिक्षकों और परिवार को श्रेय दिया।

टेलरिंग के साथ माता-पिता करते हैं किसानी

टेलरिंग के साथ करण के पिता कार्तिक राम और माता केवरा बाई पूर्वजों की छोटी सी जमीन पर खेती-किसानी भी करते हैं। करण अपने पिता के इकलौते बेटे हैं, वहीं परिवार में एक बहन है, जो कि कक्षा आठवीं में पढ़ती है। घर की स्थिति-परिस्थिति के मुताबिक पढ़ाई के साथ-साथ वह खेतों में भी काम करने में शर्माते नहीं है।

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