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Health Tips: दमा या अस्थमा रोगी यदि हवाई यात्रा पर जा रहे हैं तो जरूर पढ़ें यह खबर

Updated: IST asthma care
भागदौड़ भरी जिंदगी में हम वक्त से आगे निकलने की होड़ में लगेहैं। ऐसे में कई बार कुछ जरूरी बातों को भी अनदेखा कर देते हैं।

रायपुर. भागदौड़ भरी जिंदगी में हम वक्त से आगे निकलने की होड़ में लगेहैं। ऐसे में कई बार कुछ जरूरी बातों को भी अनदेखा कर देते हैं। हाल ही में इंग्लैंड से लेनसेक जर्नल से प्रकाशित एक लेख और रायपुर के श्वास रोग विशेषज्ञों के आधार पर यह पाया गया कि दुनिया में करीब 22 प्रतिशत मेडिकल इमरजेंसी श्वास रोग से संबंधित हैं। इसमें अस्थमा, क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव प्लूमोनरी डिसीज (COPD) और आईएलडी जैसी बीमारियों के मरीज हैं। इसलिए श्वास रोगी यदि हवाई यात्रा पर जा रहे हैं तो जरूरी है कि पहले वे अपना चेकअप करवा लें।

मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉ शशांक गुप्ता बताते हैं कि वैसे तो एयरक्राफ्ट में प्रेशराइज्ड केबिन होते हैं, लेकिन सीओपीडी (COPD) और सीवियर अस्थमा के मरीजों को श्वास की दिक्कत बढ़ जाती है। इससे ह्दय भी असर पड़ता है। छाती में जलन, घुटन , हार्ट अटैक, बेहोशी जैसी तकलीफें हो सकती हैं। ऐसे रोगियों को अपनी दवाइयां साथ रखना चाहिए। यदि वे 10-12 घंटे की फ्लाइट में जा रहे हैं व्हील चेयर लेकर जाएं।

मिडिल ईयर में इंफेक्शन वाले भी रखें ध्यान

अस्थमा के सीवियर स्टेज में लंग्स में हवा लीक होने से नीमोथोरेक्स बनने लगता है, जिससे लंग्स फट जाते हैं। इसके अलावा एयरएम्बोलिज्म की भी समस्या होती है। इसमें खून की नलियों में भी थक्का जम जाता है। इसलिए अटैक की संभावना वाले पेशंट को हवाई यात्रा अवॉयड करना चाहिए। फिर भी जरूरी हो तो डॉक्टर से अच्छी तरह कंसल्ट कर लें। मिडिल ईयर में इंफैक्शन वाले पेशंट को भी चेकअप कराने के बाद ही जाना चाहिए।

इनका रखें खास ध्यान

- जो लोग घर में भी ऑक्सीजन लेते हैं, वे पहले से ही एअरक्रॉफ्ट को अपनी बीमारी के बारे में बता दें। ताकि ऑक्सीजन की सप्लाई का अरेंजमेंट पहले से ही किया जा सके।
- हवाई यात्रा के दौरान सबसे ज्यादा खतरा प्लेन में चढ़ते और उतरते समय होता है क्योंकि इसी समय प्रेशर चेंज होता है।
- अगर श्वास रोगी पहली बार हवाई यात्रा कर रहे हैं तो किसी को साथ लेकर जाएं।

मानें डॉक्टर की सलाह

दुनिया में करीब 450 करोड़ लोग हर साल हवाई यात्रा करते हैं। वे 30-40 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ते हैं। लेकिन केबिन का दबाव करीब 5 से 8 हजार के दबाव के हिसाब से डिजाइन किया जाता है। यात्रा के दौरान व्यक्ति के शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है। इससे केवल 15 प्रतिशत ऑक्सीजन ही शरीर को मिल पाती है। श्वांस रोगियों के लिए जरूरी है कि वे बिना चिकित्सक की सलाह के हवाई यात्रा न करें। अस्थमा, सीओपीडी, पल्मोनरी हाइपरटेंशन, स्लीप एपीनिया, सिस्टिक फाइब्रोसिस और न्यूमोथोरेक्स के मरीजों को इस लिहाज से विशेष सावधानी रखने की जरूरत है। अपने चिकित्सक के चेकअप करवाने और दवाईयां साथ रखने के बाद ही यात्रा करें।

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