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190 रु. से शुरू की नौकरी, अब इतनी ऊपरी कमाई कि तनख्वाह का भी पता नहीं

Updated: IST anti corruption bureau raid of ML Pandey
राजधानी स्थित समाज कल्याण विभाग में पदस्थ एडिशनल डायरेक्टर मिश्रीलाल (एमएल) पांडे ने भ्रष्टाचार के मामले में फर्श से अर्श तक का सफर तय किया

रायपुर. छापेमारी करने के लिए गई टीम समाज कल्याण विभाग के एडिशनल डायरेक्टर एमएल पांडे और पीएचई के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर केएस चंद्रा का जवाब सुनकर हैरान रह गए। इन भ्रष्ट अफसरों को यह भी नहीं मालूम की उन्हे कितना मासिक वेतन मिलता है। उनका कहना है कि कभी उन्हें काम के एवज में दिए जाने वाले वेतन और भत्ते की छानबीन करने और उसे निकालने की जरूरत ही नहीं पड़ी।
एंटी करप्शन ब्यूरो के छापे के बाद समाज कल्याण विभाग के भ्रष्टाचार की भी पोल खुल चुकी है। राजधानी स्थित समाज कल्याण विभाग में पदस्थ एडिशनल डायरेक्टर मिश्रीलाल (एमएल) पांडे ने भ्रष्टाचार के मामले में फर्श से अर्श तक का सफर तय किया। पांडे की पोस्टिंग सबसे पहले सहायक ग्रेड-3 यानी तृतीय वर्ग के कर्मचारी के रूप में दुर्ग जिले के पंचायत एवं समाज कल्याण विभाग में 1981 में हुई थी। इस समय इनकी तनख्वाह महज 190 रूपए थी, यहां से इस अधिकारी ने लगातार तरक्की पाई और एडिशनल डायरेक्टर का मुकाम हासिल किया। आज इनकी तनख्वाह लगभग 75 से 80 हजार रुपए बताई जा रही है।
भ्रष्टाचार से कमाई राशि का निवेश इन्होंने रायपुर समेत मुंबई, पुणे सहित बड़े शहरों में जमीन और मकान में किया है। पांडे एसीबी की निगाह में तब चढ़े, जब इन्होंने पिछले दिनों रायपुरा स्थित निवास में अपने बेटे की शादी में जमकर पैसा बहाया और 2 करोड़ खर्च कर दिए। खर्च की गई राशि को भी सरकारी खर्चें में दिखाया गया। बेटे की शादी में आलीशान होटल बुक कराया गया था। शादी में आए मेहमानों को बीएमडब्ल्यू की सवारी कराई।
बुरी नजरों से बचने टोटके
राज्य में उंचे ओहदे पर बैठे भ्रष्ट अफसर लोगों की बुरी नजरों से बचने के लिए विभिन्न टोटके भी अपनाते है। छापेमारी के दौरान उनके घरों काली हांडी से लेकर झाडू, टेलीविजन में दिखाए जाने वाले विभिन्न धनयंत्र और अफसरों के गले में ताबीज और उंगलियों में नगीने मिले। पूछताछ में एसीबी को उनके परिवार वालों ने बताया कि इससे बुरी बलाए घर में नहीं आती।
मददगारों पर गिरेगी गाज
एसीबी एडीजी मुकेश गुप्ता ने बताया कि अफसरों की संपत्ति का मूल्यांकन कर रहे हैं। काली कमाई छिपाने में मदद करने वालों को भी तलब करेंगे। जिनके नाम पर संपति होगी वह भी सह आरोपी बनाए जा सकते हंै।

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