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जिसमें सबका सुख और कल्याण हो लोकनीति

Updated: IST MP religious Dhamma conference
रायसेन. जिसमें सबका सुख और सबका कल्याण हो वही लोक नीति है। लोक नीति ऐसी होना चाहिए जो इन लक्ष्यों की पूर्ति कर सके।

रायसेन. जिसमें सबका सुख और सबका कल्याण हो वही लोक नीति है। लोक नीति ऐसी होना चाहिए जो इन लक्ष्यों की पूर्ति कर सके।

यह बात मुख्यमंत्री चौहान ने सांची बौद्ध एवं भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय द्वारा धर्म और राज व्यवस्था, पर तीन दिवसीय चौथे धर्म-धम्म सम्मेलन के शुभारंभ सत्र को संबोधित करते हुए कही। सम्मेलन में देश-विदेश के लगभग 200 विद्वान भाग ले रहे हैं। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि दूसरों की भलाई से बड़ा कोई धर्म नहीं है और दूसरों को तकलीफ पहुंचाने से बड़ा अधर्म नहीं है। विश्व में धर्म के नाम पर सबसे ज्यादा खून बहाया गया है। पर जिसके नाम पर खून बहाया गया है, वह धर्म नहीं बल्कि उपासना पद्धति है। धर्म के कई स्वरूप हैं। सत्य, अहिंसा, अस्तेय और अपरिग्रह धर्म हैं।

स्नेह, प्रेम, शांति और आत्मीयता धर्म है। जो दूसरों को आनंद दे वही धर्म है। सुख तात्कालिक होते हैं और आनंद स्थायी होता है। उन्होंने कहा कि धर्म-धम्म सम्मेलन में आये अलग-अलग क्षेत्र के विद्वानों के विचार-विमर्श के बाद मिले निष्कर्ष को प्रदेश में लागू करने के प्रयास किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में सांची बौद्ध एवं भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय की काफी टेबल बुक का विमोचन किया। शुभारंभ सत्र की अध्यक्षता श्रीलंका महाबोधि सोसायटी के प्रमुख बेनेगेला उपाथिस्सा नायका थेरो ने की। कार्यक्रम में संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के मंत्री सुरेंद्र पटवा, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वायएस शास्त्री, इंडियन काउंसिल ऑफ फिलॉसाफिकल रिसर्च के अध्यक्ष एसआर भट्ट और विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार राजेश गुप्ता उपस्थित थे।

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