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जिला अस्पताल में डॉक्टर ने इलाज की जगह बुजुर्ग को मारा, फिर कोतवाली भेजा

Updated: IST raisen
रायसेन. भारतीय समाज में आमतौर पर चिकित्सकों को भगवान का दर्जा दिया जाता है। लेकिन जब चिकित्सक ही मरीजों का इलाज करने की जगह मारपीट पर उतारू होने लगें तो अस्पताल का तो भगवान ही मालिक है।

रायसेन. भारतीय समाज में आमतौर पर चिकित्सकों को भगवान का दर्जा दिया जाता है। लेकिन जब चिकित्सक ही मरीजों का इलाज करने की जगह मारपीट पर उतारू होने लगें तो अस्पताल का तो भगवान ही मालिक है।

जिला अस्पताल में चिकित्सकों की मनमानी इस कदर बढऩे लगी है कि दो मासूम बच्चों का इलाज कराने आए ग्राम पठारी के एक बुजुर्ग की मामूली बात को लेकर मारपीट कर उसे बच्चों सहित ओपीडी के एक कमरे बंद कर दिया। इतना ही नहीं बाद में उसे बेइज्जत करते हुए डॉयल 100 पुलिस वाहन बुलवाकर कोतवाली थाने पहुंचा दिया गया। चिकित्सकों की इस मारपीट व मनमानी की लिखित शिकायत बुजुर्ग के परिजनों ने कोतवाली टीआई को देकर दोषी चिकित्सकों पर कार्रवाई किए जाने की मांग की। उधर डॉक्टर ने भी अपने साथी डॉक्टर को लेकर कर्मचारियों के साथ बुजुर्ग की शिक ायत थाने में की। हालांकि शाम को इस मामले में दोनो पक्षों के बीच समझौता होने की जानकारी मिली है। लेकिन इस घटनाक्रम ने एक बार फिर अस्पताल के जिम्मेदारों को शर्मशार किया है। जिला अस्पताल में मरीजों की बढ़ती संख्या और बिगड़ती व्यवस्थाओं के बीच अब आए दिन विवाद की स्थिति बनने लगी है। मरीजों और डॉक्टरों के बीच मारपीट की घटनाए सामने आने के बाद यह स्पष्ट है कि रायसेन का जिला अस्पताल जिम्मेदारों के नियंत्रण से बाहर हो चुका है।

पीडि़त बुजुर्ग ने बताया

पठारी निवासी 62 वर्षीय मोकम सिंह यादव ने बताया कि वह पत्नी गिरजाबाई और पौत्र देवांशु 16 माह, आनंद यादव उम्र 5 माह को बुखार और उल्टीदस्त होने पर शुक्रवार को सुबह सवा 11 बजे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। ओपीडी में मरीजों का इलाज कर रहे सर्जन डॉ. इदरीश अहमद खान से बुजुर्ग मोकम सिंह यादव ने पूछा कि बच्चों के डॉक्टर हैं या नहीं। इस बात को लेकर डॉ. इदरीश अहमद खान नाराज हो गए। दोनो के बीच इसी बात को लेकर कहा सुनी हुई। इस बीच डॉ. खान और डॉ. शरद कुमार ने उस बुजुर्ग की गिरेबां पकड़ कर गाल पर चांटा मार दिया। उसकी गोद से बच्चा देवांशु नीचे गिर गया। इस दौरान बुजुर्ग मोकम सिंह के हाथ की कलाई, अंगुलियों में चोटें आईं। मौके पर उपस्थित लोगों ने बीच बचावकर मामले को जैसे तैसे शंात किया।


ओपीडी के कमरे में किया बंद

बुजुर्ग मोकम सिंह की पत्नी गिरजा बाई यादव और प्रत्यक्षदर्शी महिला ताराबाई ने बताया कि ओपीडी के एक कमरे में बच्चों सहित मोकम सिंह को डॉ. इसरार अहमद खान व कर्मचारियों ने जबरन बंद कर दिया। इसके बाद दोपहर सवा 12 बजे डॉयल 100 पुलिस को बुलवा लिया। उस बुजुर्ग को पुलिस की मदद से हवालात पहुंचा दिया। इस तरह इलाज कराने आए बुजुर्ग मोकम सिंह को अस्पताल के चिकित्सकों ने हवालात में भिजवा दिया।

पहले भी हुई है मारपीट

ओपीडी में बैठने वाले डॉक्टरों का रवैया मरीजों के प्रति सहानुभति का न होकर आक्रामक हो गया है। इससे पूर्व 30 अगस्त को भी डा. शरद ने एक मरीज के साथ झूमाझटकी की थी। अस्पताल के कर्मचारी भी ऐसे चिकित्सकों की मदद करने लगते हैं।

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