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सरकारी जमीन को निगल रहे भू-माफिया

Updated: IST raisen
रायसेन. शहर के बीचों बीच जिला-प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता, के चलते बेशकीमती सरकारी जमीन पर लंबे समय से सक्रिय भू-माफिया गिरोह द्वारा अतिक्रमण कर रखा है।

रायसेन. शहर के बीचों बीच जिला-प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता, के चलते बेशकीमती सरकारी जमीन पर लंबे समय से सक्रिय भू-माफिया गिरोह द्वारा अतिक्रमण कर रखा है। आदिम जाति कल्याण विभाग, जिला शिक्षा विभाग, पुरातत्व राजस्व एवं वन विभाग की जमीन पर अतिक्रमण करने की होड़ लगी हुई है।

जिम्मेदार विभागों के अधिकारियों को इतनी फुर्सत भी नहीं मौके पर पहुंच कर जमीन का सीमांकन करा सकें। अगर सरकारी जमीन के हड़पने की यही रफ्तार रही तो एक समय ऐसा भी आ सकता है जब शासन को किसी विभाग का भवन बनाना मुश्किल होगा। विभाग के अधिकारी कच्चे मक ान बनाने वालों के नाम की सूची बनाकर उन्हें नोटिस देने की कार्रवाई को अंजाम भी नहीं दे रहे हैं। इस कारण भू-माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हो रहे हैं कि वह कहीं भी सरकारी जमीन पर बेजा कब्जा जमाने से बाज नहीं आ रहे हैं। श्रीरामलीला मेला की करीब साढ़े सात एकड़ जमीन में से तीन एकड़ जमीन पर अतिक्रमण हो चुका है। एक व्यक्ति द्वारा यहां दुकानों का निर्माण भी कर रखा है।

श्मशान घाटों की जमीन को भी नहीं बख्शा

कमोवेश यही हालात वन महकमे की पाटनदेव राहुल नगर वार्ड 14, संजय नगर वार्ड 18 भोपाल रोड, ताजपुर मोहल्ला वार्ड 13, गोपालपुर, पूरेन तालाब वाले श्मशान घाट की जमीन पर भी अतिक्रमण हो रहा है। किले के समीप बने टॉवर के आवासों पर भी अतिक्रमण कारियों ने कब्जा करना शुरू कर दिया है। अगर अतिक्रमण करने का यह सिलसिला जारी रहा तो एक दिन ऐसा आएगा कि शवों के अंतिम संस्कार करने लायक जगह भी नहीं बचेगी।

किले की धरोहर की पहचान धूमिल

शहर की प्रमुख ऐतिहासिक धरोहर किले की तलहटी वन विभाग, पुरातत्व विभाग के अधीन आती है। यहां पर भी सैकड़ों कच्चे-पक्के घरों का निर्माण तेज गति से हो चुका है। भू-माफियाओं के अब हौसले इतने बढ़ गए हैं कि वह घर बनाकर बेचने का करोबार भी खुलेआम करने लगे हैं। इससे ऐतिहासिक किले की पहचान धूमिल होती नजर आने ली है। हालांकि पहले पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने किले की जमीन के 100 मीटर के दायरे में अतिक्रमण करना दंडनीय अपराध है संबंधी बोर्ड लगाए हैं। कई अतिक्रमणकारियों को विभाग ने नोटिस भी थमाए। परन्तु विभाग के अधिकारियों की कार्रवाई नोटिस जारी करने तक सिमट कर रह गई।

विभाग की अनदेखी

अतिक्रमण शहर के वार्ड एक नरापुरा स्थित भोपाली फाटक वाले श्मशान घाट, बाइपास की जमीन पर अतिक्रमण, नरापुरा वाली गुठान सहित उसके समीप राजस्व विभाग की जमीन पर भू-माफियाओं ने पिछले चार पांच सालों के अंतराल में अतिक्रमण कर लिया है। राजस्व अधिकारियों की अनदेखी व उदासीनता के चलते सरकारी जमीन पर चौतरफा घर नजर आने लगे हैं। स्थिति यह है कि पीपलखेड़ा, सराय सहित आसपास के गांवों से आकर लोगों ने पहले यहां आकर कच्चे घर बनाए। इसके बाद कब्जेधारियों ने कच्चे मकानों को पक्के बना लिए।

छात्रावास की बाउंड्रीवॉल नहीं बनी

इधर शासकीय बालिका प्री-मैट्रिक छात्रावास का नवनिर्मित भवन बनकर तैयार हो चुका है। लेकिन इस छात्रावास भवन के समीप ही दूध डेयरी संचालकों से लेकर अन्य मकान मालिकों ने जमीन पर अतिक्रमण कर रखा है। इसलिए इस हॉस्टल की बाउंड्रीवाल का निर्माण भी अधर में लटका हुआ है। इसके नजदकी ही शिक्षा विभाग की जमीन पर भी भू-माफियाओं द्वारा अतिक्रमण कर मकान बनाने का काम शुरू कर दिया है।

आदिम जाति कल्याण विभाग की जमीन हड़पी

सागर रोड स्थित शासकीय बालक एक्सीलेंस हॉस्टल के नजदीक आदिम जाति कल्याण विभाग और जिला शिक्षा विभाग की करोड़ों रुपए की जमीन पर लंबे समय से भू-माफियाओं के गिरोह ने कब्जा कर रखा है। उक्तदोनों विभागों की बेशकीमती जमीन शहर के बीचों बीच स्थित है। इस बेशकीमती जमीन पर कई झुग्गियां बन चुकी हैं। इस सरकारी जमीन पर दर्जनों पक्के मकान भी आकार ले चुके हैं। एक जिम्मेदार अधिकारी ने अपना नाम न छापने की शर्त पर पत्रिका रिपोर्टर को बताया कि हमें विभागों की कार्रवाई, स्कूलों, छात्रावासों के निरीक्षण से लेकर अन्य विभागीय काम का बोझ अधिक है। ऐसे में अतिक्रमणकारियों को नोटिस थमाना मुश्किल हो रहा है।

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