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बदहाल सड़कों पर दौड़ रहीं खटारा यात्री बसें

Updated: IST jalopy passenger bus
बरेली. खटारा यात्री बसों में बदहाल सड़कों पर यात्रा करना जान जोखिम में डालना ही होता है। यात्रियों की मजबूरी है कि वे इन स्थितियों में ही यात्रा करते हैं।

बरेली. खटारा यात्री बसों में बदहाल सड़कों पर यात्रा करना जान जोखिम में डालना ही होता है। यात्रियों की मजबूरी है कि वे इन स्थितियों में ही यात्रा करते हैं। प्रतिदिन सैकड़ों लोग अपनी सलामती की प्रार्थना करते हुए ही बसों में सवार होते हैं।

नगर से करीब डेढ़ सौ यात्री बसें अलग-अलग मार्गों के लिए निकलती हैं। कई बार दुर्घटनाएं भी हो चुकी है। इसके बाद भी अव्यवस्थाओं की तरफ ध्यान नहीं दिया गया। प्रत्येक दुर्घटना के बाद ऐसा लगा कि सुधार होगा। राष्ट्रीय राजमार्ग 12 की बरेली से देवरी तक बदहाली पर जब ज्यादा शोरगुल होता है तो नाम के लिए सड़क पर मरम्मत कर दी जाती है। बस चालक शमीम कहते हैं कि काम होते तो दिखता है, लेकिन हालत नहीं सुधरती है। मंगलवार और शनिवार को छींद मंदिर में दर्शनों के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु जाते हैं। इनके लिए दर्जनों वाहन चलते हैं और उन वाहनों की हालत भी ठीक नहीं है।

स्कूल वाहन भी ठीक नहीं

नगर और अंचल में बड़ी संख्या में प्राइवेट स्कूलों के वाहन बच्चों को लाने-ले-जाने का काम करते हैं। स्कूल वाहनों के संबंध में जारी निर्देशों का इन पर असर नहीं दिखाई देता। एक स्कूली बच्चे की मां अभिलाषा कहती हैं कि जब तक बच्चा वापस नहीं आ जाता, तब तक चिंता लगी रहती है। कमोबेश सभी पालकों की यही स्थिति रहती है। सभी बसों की फिटनेस, बीमा की जांच होनी चाहिए और इस बारे में जानकारी बस के आगे कांच पर प्रदर्शित हो। बसों में दो गेट एवं इमरजेंसी गेट चालू हालत में होना चाहिए। प्राथमिक उपचार के लिए फस्र्ट एड बाक्स की व्यवस्था हो।

बसों पर चलने वाला स्टाफ निर्धारित ड्रेस में हो और नेम प्लेट लगी होना चाहिए। बसों में किराया सूची प्रदर्शित होना चाहिए। महिलाओं के लिए सीट आरक्षित होना चाहिए। बसों की फिटनेस ठीक नहीं है। बस स्टैंड पर खड़ी बसें दिखाते हुए शिखरचंद कहते हैं कि इनमें यात्रा करना खतरे से खाली नहीं होता। इमरजेंसी गेट इमरजेंसी में तो दूर सामान्य स्थिति में भी इन्हें खोलना मुमकिन नहीं है। फस्र्ट एड बॉक्स भी ज्यादातर बसों में दिखावे के लिए ही हैं। इनमें दवा के नाम पर कुछ नहीं होता। किसी भी यात्री बस में किराया सूची नहीं लगी है। इससे वास्तविक किराए को लेकर झड़पें होती रहती हैं।

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