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मोहनपुरा सिंचाई परियोजना में 30 करोड़ रुपए का फर्जीवाड़ा

Updated: IST rajgarh
कलेक्टर ने जांच कराकर पीएस को लिखा कार्रवाई के लिए पत्र, डेढ़ माह बाद भी नहीं हुई दोषियों पर कार्रवाई

राजगढ़. मोहनपुरा सिंचाई परियोजना में डूब क्षेत्र में आने वाली सीमा का गलत आंकलन करते हुए 30 करोड़ का फर्जी भुगतान सामने आया है।

ऐसे में कलेक्टर तरूण पिथोड़े ने न सिर्फ आगे का भुगतान रोका बल्कि इस पूरे प्रकरण में दोषियों पर कार्रवाई हो। इसके लिए प्रस्ताव बनाकर प्रमुख सचिव को पत्र लिखा। इतनी बड़ी अनियमिता सामने आने के बाद भी अभी तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं यदि मोहनपुरा से जुड़े अधिकारियों की माने तो वे अपने आप को इस मामले में पाक साफ बताते हुए राजस्व विभाग के अमले को ही दोषी बता रहे है।

मुख्य अभियंता पत्र जारी कर भूले

कलेक्टर ने प्रमुख सचिव के सामने रखी बात के बाद जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता कमलेश कुमार खरे ने मोहनपुरा सिंचाई परियोजना के अधीक्षण यंत्री एके जैन को पत्र लिखा। जिसमें जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों का उत्तरदायित्व निर्धारण कर आरोप पत्र बनाने के लिए कहा, लेकिन इस पत्र को जारी हुए करीब एक माह होने को आ रहा है, लेकिन अभी तक यहां से कोई कार्रवाई नहीं की गई। मोहनपुरा सिंचाई परियोजना में होने वाले भुगतानों में अभी तक किसी प्रकार की कोई जमीनी जांच नहीं कराई जा रही है। यदि इस पूरे भुगतान की जांच गंभीरता से होती है। तो करोड़ों रुपए का फर्जीवाड़ा सामने आएगा। जिसमें जिले के कई अधिकारी लपेटे में आएंगे। फिलहाल सब एक दूसरे के ऊपर मामले को थोपने में लगे हुए है। वहीं जो पात्र किसान है। वे मुआवजे के लिए अभी भी भटक रहे है।

क्या है मामला

मोहनपुरा सिंचाई परियोजना के डूब क्षेत्र में आने वाले भू-अर्जन अधिनियम 2013 के तहत डूब क्षेत्र की सीमा तय की गई, लेकिन इस सीमा में प्रस्तावित भूमि के अलावा भूमि रकबा 231469 है। को अवार्ड के लिए प्रस्तुत कर दिया। इसके साथ ही डूब क्षेत्र से प्रभावित भूमि में कई सम्पत्तियां जैसे कुआं, ट्यूबवेल, पाइप लाइन प्रभावित नहीं थी। उसके बाद भी उन्हें शामिल करते हुए अवार्ड पारित कर दिया गया। कलेक्टर ने जांच के बाद इसे जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की गंभीर अनियमिता मानी है। 30 करोड़ का अवार्ड पारित होने के बाद कलेक्टर ने प्रथम दृष्टियां जल संसाधन विभाग के अधिकारियों द्वारा क्षेत्र में एफआरएल के अंकन एवं उस आधार पर प्रभावित भूमियों और परिसंपत्तियों के आंकलन को घोर लापरवाही माना।

अभी तक यह पत्र हम तक नहीं पहुंचा है। वैसे वरिष्ठ कार्यालय से लिखा गया पत्र अधीक्षण यंत्री के नाम से है।

पीके जोशी, ईई मोहनपुरा सिंचाई परियोजना राजगढ़

यदि किसी ने गलत किया है तो उस पर कार्रवाई होगी। डूब क्षेत्र का सर्वे राजस्व विभाग द्वारा किया गया। कलेक्टर साहब ने जो पत्र लिखा है हम खुद यह जानना चाह रहे है कि सर्वे में गलत क्या है। जो भी इस फर्जी भुगतान में शामिल है उस पर कार्रवाई होनी चाहिए।

एके जैन, अधीक्षण यंत्री मोहनपुरा सिंचाई परियोजना राजगढ़

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