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अब खरीदी गई प्याज को नष्ट करने की तैयारी में प्रशासन!

Updated: IST rajgarh
समर्थन मूल्य पर जिले के पांच केंद्रों पर खरीदी जा रही प्याज को अब नष्ट करने की तैयारी की जा रही है। रेलवे द्वारा रेक मुहैया नहीं करवाने और

ब्यावरा. समर्थन मूल्य पर जिले के पांच केंद्रों पर खरीदी जा रही प्याज को अब नष्ट करने की तैयारी की जा रही है। रेलवे द्वारा रेक मुहैया नहीं करवाने और ट्रक नहीं मिल पाने के कारण अब मंगलवार से फिर खरीदी शुरू हो पाना संभव नहीं लग रहा।

दरअसल, आठ रुपए किलो में खरीदी गई प्याज की मात्रा एक लाख क्विंटल से ऊपर पहुंच गई है। कुछ दिन तक ट्रक से परिवहन करने पर बात नहीं बनी तो नॉन (नागरिक आपूर्ति निगम) ने रेलवे से रेक की मांग की। रेक में 18 हजार क्विटंल प्याज एक बार में रवाना हुई, लेकिन अभी भी हजारों क्विंटल प्याज खरीदी केद्रों पर ही जमा है। जिसका परिवहन कर पाना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। रेक उपलब्ध नहीं होने और ट्रक नहीं मिल पाने के साथ ही भंडारण क्षमता नहीं होने से अब प्याज को नष्ट करने की तैयारी में प्रशासन जुट गया है। हालात यह है कि प्याज को एडजस्ट करने के लिए अब आंगनबाड़ी केंद्रों और मध्याह्न भोजन बनाने वाले समूहों पर प्याज थौंपी जा रही है। यह बात अलग है कि वे ढंग का भोजन ही बच्चों को नहीं दे पाते तो प्याज क्या डालेंगे? उल्लेखनीय है कि रखे-रखे खराब हो चुके प्याज को नष्ट करने के अलावा कोई हल भी नहीं है। पिछले साल भी खरीदे गए हजारों क्विंटल प्याज में से 70 फीसदी को नष्ट कर दिया था। अन्य जिलों और बाहर प्याज का निर्यात नहीं हो पाने के कारण शासन को खरीदी हुई प्याज नष्ट करना पड़ती है।

मध्याह्न भोजन के लिए भेजे प्याज

शासन द्वारा खरीदी गई प्याज को जिलेभर के तमाम मध्याह्न भोजन बनाने वालों को प्रति समूह दो क्विंटल भेजी जा रही है।

दो रुपए किलो में दी जाने वाली उक्त प्याज का भुगतान समूहों को करना होगा। जिसका पूरा जिम्मा जन शिक्षक का होगा, जिलेभर के जनशिक्षकों की जवाबदारी इसके लिए तय कर ली गई है। इसके तहत सोमवार से विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों पर प्याज भेजी गई।

गुना भेजे ट्रक, दो दिन बाद भी नहीं तुले

ट्रक वालों ने भी खरीदी केंद्रों से प्याज लोड करने से इनकार कर दिया है। दो दिन पहले जिन ट्रकों में प्याज लोड की गई थी वे अगले दिन तक भी नहीं तुल पाए। इससे अब प्याज को उठवाना भी प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है।

रेक की मांग किए जाने के बावजूद अभी तक लगना क्लीयर नहीं हो पाया है। हालांकि दो रेक के लिए स्वीकृति मिल गई है लेकिन रेलवे द्वारा जगह निर्धारित नहीं की जा रही।


शासन को लाखों का नुकसान, जिम्मेदार कौन?

हर बार समर्थन मूल्य पर खरीदी जाने वाली प्याज को आखिर में नष्ट ही करना पड़ती है, जिसका सीधा नुकसान शासन को उठाना पड़ता है। पिछले साल छह और इस बार आठ रुपए प्रति किलो में खरीदी जा रही प्याज को नष्ट करने की तैयारी की जा रही है। किसानों को भले ही उस प्याज की कीमत मिल गई हो लेकिन शासन को इससे सीधा नुकसान हुआहै। आखिर इस लाखों रुपए के नुकसान का जिम्मेदार कौन है? हर बार प्याज का उत्पादन बढ़ रहा है, लेकिन इसे सही दाम मिलने और बाहर निर्यात करने की कोई प्लॉनिंग नहीं होती। इसी कारण हमेशा नुकसान शासन-प्रशासन को ही उठाना पड़ता है।

हर केंद्र पर 40 किलो की पांच कट्टियां देने का शासन का निर्देश है जिसकी मॉनीटरिंग जन शिक्षक कर रहे हैं। दो रुपए किलों में दी जाने वाली उक्त प्याज का भुगतान संबंधित समूह को ही करना होगा। जिले के सभी समूहों में प्याज मध्याह्न भोजन के लिए भेजी जा रही है।

-जेपी यादव, बीईओ, ब्यावरा

हमने रेलवे से रेक के लिए रिकमंड किया था, दो रेक की स्वीकृति भी दे दी है,लेकिन जगह तय नहीं हो पाई है। रेक से ही लोड कम होगा, लेकिन अभी कुछ कहा नहीं जा सकता। मजबूरन खराब हुई प्याज को हमें नष्ट करवाना पड़ेगा। ट्रक वालों ने भी माल लोड करने से इसलिए मना कर दिया कि गुना भेजी गई गाडिय़ों की तुलाई अभी तक नहीं हुई।

-राखी रघुवंशी, डीएमओ, राजगढ़

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