Patrika Hindi News

> > > > Toilet

ओडीएफ गांवों के ग्रामीण नहीं करते शौचालय का उपयोग

Updated: IST Toilet
ओडीएफ (ओपन डिफिकेशन फ्री) पूर्णत: शौच मुक्त करने के प्रशासन के तमाम दावे कागजों तक ही सीमित रह गए हैं। जिन ग्राम पंचायतों को

ब्यावरा. ओडीएफ (ओपन डिफिकेशन फ्री) पूर्णत: शौच मुक्त करने के प्रशासन के तमाम दावे कागजों तक ही सीमित रह गए हैं। जिन ग्राम पंचायतों को जनपद और जिला पंचायतों ने ओडीएफ के दायरे में किया वहां के ग्रामीण भी उन बनाए गए शौचालयों का उपयोग नहीं कर पाते।

दरअसल, जिले के विभिन्न ब्लॉकों में कुछ पंचायतों को शासन ने ओडीएफ के दायरे में लाने की खानापूर्ति के लिए पूर्णत: शौच मुक्त किया है। हालांकि पूर्णत: शौच मुक्त का दावा पूरी तरह खोखला नजर आ रहा है। ओडीएफ पंचायतों में 12 हजार की सहायता राशि से बनाए गए शौचालय फोटो खिंचवाकर जिला पंचायत के कागजों तक ही सीमित है। कुछ ग्रामीण या तो उनका उपयोग करना नहीं चाहते या फिर उक्त शौचालय इतने बेहतर नहीं बन पाए जितने की उम्मीद उन्होंने की थी। ऐसे में शासन द्वारा महज लक्ष्य पूरा करने और ओडीएफ के दायरे में लाने मात्र के लिए मनमाने ढंग से शौचालय तान दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि कई पंचायतों के शौचालयों की वास्तविक दुर्दशा भी किसी से छिपी नहीं हैं। पिछले साल बनाए गए कई शौचालयों में या तो घरेलू सामान भरे हैं या उपजाऊ कंडे। बावजूद इसके जमीनी लेवल का फीडबैक अभी तक प्रशासन के पास नहीं पहुंच पाया है।

90 घरों में शौचालय नहीं फिर भी कर दी ओडीएफ

उदनखेड़ी. शौचालय बनवाने और पूर्णत: शौच मुक्त (ओडीएफ) करने की प्रशासन की औपचारिकता की हकीकत सारंगपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत नेनवाड़वा में देखने को मिला। यहां दो दिन पहले ही ओडीएफ की गई पंचायत में 90 परिवारों में अभी भी शौचालय नहीं है। 305 परिवार वाले गांव में 90 परिवार शौचालय विहीन होने के बावजूद उसे जिम्मेदारों ने पूर्णत: शौच मुक्त कर दिया। गांव के करीब 30 फीसदी लोग अभी भी यहां खुले में शौच के लिए जाते हैं। गांव की जमीनी हकीकत यह है कि पूरे मुख्य मार्ग पर गंदगी और शौच का जमावड़ा लगा रहता है। खास बात यह है कि दो दिन पहले जिस कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि और अधिकारी ओडीएफ के लिए आए थे। उसी में वे यह कहकर संबोधित कर रहे थे कि घर-घर शौचालय बनवाएं, जबकि ओडीएफ का मतलब ही पूर्णत: खुले में शौच मुक्त गांव होता है।

40 परिवारों के गांव में मात्र 4 शौचालय

मंडावर. स्वच्छता मिशन का असर ग्रामीण क्षेत्रों में न के बराबर नजर आ रहा है। भले ही शासन द्वारा इसके लिए नित नए प्रयास किए जा रहे हो। लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां करती है। ऐसा ही कुछ नरसिंहगढ़ की ग्राम पंचायत कांकरवाल के होशियारखेड़ी गांव में देखने को मिला। यहां 40 परिवार निवास करते है। वहीं गांव की जनसंख्या भी लगभग 350 है। लेकिन यहां मात्र चार शौचालय ही बने हुए है।

हितग्राहियों द्वारा बनवाए गए इन शौचालयों का पंचायत द्वारा आज तक भुगतान नहीं किया गया। वहीं गांव में चारों ओर फैली गंदगी की शिकायत भी ग्रामीण वरिष्ठ अधिकारियों से कर चुके है। लेकिन यह समस्या भी जस की तस बनी हुई है। ग्रामीण जसवंत सिंह गुर्जर, लाखन, श्राीनाथ, दिनेश, दयालसिंह, अशोक राणा, बलरामसिंह, देवीसिंह आदि ने गांव में शौचालय के साथ ही साफ-सफाई की व्यवस्था कराने की मांग की है।

यह भी पढ़े :
अपने विवाह के सपने को सपने भारत मैट्रीमोनी से साकार करे।- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन करे!

Latest Videos from Patrika

Patrika.com

लेटेस्ट ख़बरें ई-मेल पर पाने के लिए सब्सक्राइब करें

Dus ka Dum
Ad Block is Banned Click here to refresh the page

???? ??????? ?? ??? ???? ????? ???