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खैरागढ़ नगर पालिका: जमीन बिक्री मामले में नया मोड़

Updated: IST Khairagarh Municipality: new twist in the case of
नगर पालिका अध्यक्ष मीरा चोपड़ा के खिलाफ नपा उपाध्यक्ष रामाधार रजक द्वारा अवैध तरीके से जमीन बिक्री के मामले में अब फिर से नया मोड़ आ गया है।

राजनांदगांव/खैरागढ़. नगर पालिका अध्यक्ष मीरा चोपड़ा के खिलाफ नपा उपाध्यक्ष रामाधार रजक द्वारा अवैध तरीके से जमीन बिक्री के मामले में अब फिर से नया मोड़ आ गया है। उपाध्यक्ष द्वारा की गई शिकायत पर स्थानीय तहसीलदार न्यायालय द्वारा की गई सुनवाई के बाद प्रकरण में मामले को विलोपित करने के प्रतिवेदन को एसडीएम पीएस धु्रव ने तथ्यहीन और अस्पष्ट होने का हवाला देते वापस तहसीलदार को लौटा दिया है।

तीन माह बाद प्रकरण में माहौल

मामले में तहसीलदार के द्वारा तीन माह पहले प्रकरण को विलोपित करने का प्रतिवेदन देकर पूरा प्रकरण एसडीएम को भेजा गया था अब तीन माह बाद उक्त मामले के ठंडा पड़ते ही एसडीएम ने मामले को वापस लौटा कर फिर से प्रकरण में माहौल बना दिया है।

राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई

प्रकरण को लेकर दोनों खेमों में इसे राजनीतिक वर्चस्व की लडा़ई मानी जा रही है। कांग्रेस इसे सीधे तौर पर अध्यक्ष को परेशान करने का प्रकरण मान रही है। एसडीएम कार्यालय से तीन माह बाद अचानक मामले को फिर से सतह पर लाने के पीछे राजनिति से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि इस मामले में कोई भी कुछ बोलने से बच रहे हैं। बताया गया कि मामले में तहसीलदार से फिर से प्रतिवेदन मांगने के कारण मामले में फिर दाव-पेंच शुरू हो जाएगा।

ऐसा है पूरा मामला

प्रकरण में नपा उपाध्यक्ष रामाधार रजक ने अध्यक्ष मीरा चोपड़ा पर उनकी खुद की किलापारा स्थित जमीन को अवैध प्लांटिग कर विभिन्न लोगों को बेचने, इसमें कालोनाइजर नियम का पालन नहीं करने और अध्यक्ष पद से हटाने की शिकायत कलक्टर से की थी, जिस पर इसकी सुनवाई स्थानीय तहसीलदार न्यायालय में चल रही थी।

एसडीएम कार्यालय को प्रेषित

30 नवंबर को मामले में तहसीलदार अरुण सोनकर ने प्रकरण में अंतिम सुनवाई करते दो पेज के प्रतिवेदन में मामले में कालोनाइजर नियम नहीं लगने और अध्यक्ष मीरा चोपड़ा के पद पर रहने के पूर्व के प्रकरण होने का हवाला देते प्रकरण को विलोपित करने का प्रतिवेदन बनाकर एसडीएम कार्यालय को प्रेषित किया था।

प्रकरण तहसीलदार को वापस

जिसके बाद मामले का पटाक्षेप होना तय माना जा रहा था, लेकिन अब तीन माह बाद अचानक एसडीएम द्वारा मामले में तहसीलदार को स्पष्ट और तथ्य समेत प्रकरण को प्रस्तुत करने का आदेश देकर प्रकरण तहसीलदार को वापस भेजा है।

प्रतिवेदन अस्पष्ट और तथ्यहीन

तहसीलदार अरुण सोनकर ने कहा कि एसडीएम कार्यालय से प्रतिवेदन अस्पष्ट और तथ्यहीन होने का हवाला देकर वापस आया है। उसमे प्रकरण से जुड़े सारी जानकारी देकर प्रतिवेदन तैयार किया गया था। प्रकरण में क्या-क्या मांगा गया है, उस आधार पर उसमें कार्य करेंगे।

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