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खाद्य सुरक्षा विधेयक को मिली संसद की मंजूरी

Rajya Sabha passes Food security bill

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Rajya Sabha passes Food security bill
9/3/2013 11:56:00 AM
Rajya Sabha passes Food security bill
Rajya Sabha passes Food security bill

नई दिल्ली। देश की 82 करोड़ जनता को सस्ते दाम पर अनाज मुहैया कराने वाले ऎतिहासिक खादय सुरक्षा विधेयक 2013 को सोमवार को राज्यसभा ने ध्वनिमत से पारित कर दिया लेकिन संशोधनों पर मतदान के दौरान के कार्यवाही को बीच में 10 मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा। लोकसभा इस विधेयक को गत 26 अगस्त को पारित कर चुकी है। इसके साथ ही इस पर संसद की मुहर लग गई है।


300 संशोधनों को किया अस्वीकार -

सदन ने विपक्ष के करीब 300 संशोधनों को अस्वीकार करते हुए विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। कई संशोधनों पर सदस्यों की मांग पर मतदान विभाजन भी किया गया लेकिन संशोधन नामंजूर कर दिए गए। विधेयक को पारित कराने की प्रक्रिया को लेकर कुछ विवाद भी खडे हुए और सदन की कार्यवाही बीच में 10 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। इस तरह इस विधेयक को पारित कराने में ढाई घंटे लग गए।


जेटली का प्रस्ताव खारिज -

इससे पहले सदन में विपक्ष के नेता अरूण जेटली के खाद्य सुरक्षा अध्यादेश को निरस्त करने के प्रस्ताव को ध्वनिमत से खारिज कर दिया गया। इस बहुचर्चित विधेयक को आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए गेमचेंजर (पासा पलटने वाला) माना जा रहा है। इसके अलावा इसे कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की महत्कांक्षी योजना के रूप में भी देखा जा रहा है। केन्द्रीय खादय एवं आपूर्ति मंत्री प्रो. के वी थामस ने विधेयक पर हुई लगभग छह घंटे की चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि इससे देश के गरीब लोगों को न केवल सस्ती दर पर अनाज मिलेगा बल्कि भुखमरी और कुपोषण की समस्या पर भी काबू पाया जा सकेगा।


सुझावों को समाहित करने के प्रयास होगे -

इस चर्चा में विभिन्न दलों के 37 सदस्यों ने भाग लिया और उनसे मिले रचानत्मक सुझावों को इस विधेयक के क्रियान्वयन के दौरान समाहित करने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्यों में संचालित कार्यक्रमों की सुरक्षा की जाएगी। देश के संघीय ढांचे को बरकरार रखा जाएगा और इस मामले में केन्द्र और राज्यों को मिलकर काम करना होगा। राज्यों को इसके लिए धन के साथ खाद्यान्न भी उपलब्ध कराया जाएगा।


किसानों के हितों की सुरक्षा के उपाय -


उन्होंने कहा कि किसानों के हितों की सुरक्षा के उपाय किए गए हैं। इसमें निवेश बढ़ाने के उपाय भी होंगे और न्यूनतम समर्थन मूल्य स्थिर नहीं रहेगा। मंत्री ने कहा कि कई कार्यक्रमों का विलय करने का निर्णय भी किया गया है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के दायरे में आने वाले सभी लोगों को पोषक खाद्यान्न उपलब्ध कराना संभव नहीं है लेकिन गर्भवती महिलाओं स्तनपान करने वाली माताओं और स्कूली बच्चों के लिए इसमें विशेष उपाय किए गए हैं।


राज्य खाद्य आयोग बनाने का भी प्रावधान -


उन्होंने कहा कि जन वितरण प्रणाली के साथ ही अनाज खरीद भंडारण और परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाया जाएगा और राज्यों को इसमें मदद की जाएगी। राज्यों को खाद्यान्न उपलब्ध कराना केन्द्र की प्राथमिकता होगी। विधेयक में ग्रामीण क्षेत्रों में 75 फीसदी और शहरी क्षेत्रों में 50 प्रतिशत आबादी को तीन रूपए प्रति किलो की दर से चावल, दो रूपए प्रति किलो की दर से गेंहूं और एक रूपए प्रति किलो की दर से मोटा अनाज मिलेगा।


यह अनाज सार्वजनिक वितरण प्रणाली से बांटा जाएगा। विधेयक में गर्भवती महिलाओं तथा दूध पिलाने वाली मांओं और 14 वर्ष तक के बच्चों का भी पोषण किया जाएगा। विधेयक में अनाज न मिलने की स्थिति में जनता की शिकायतों को दूर करने के लिए जिला स्तर पर अधिकारी नियुक्त करने तथा इस कानून की निगरानी के लिए राज्य खाद्य आयोग बनाने का भी प्रावधान है।


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