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अब बुढ़ी-बीमार गायों की ऐसे होगी सेवा...

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अपने दिवंगत माता-पिता व पैतृक की स्मृति में हाट से खरीदकर गौशालाओं के करेंगे सुपुर्द कर नित्य सेवा करेंगे योगा ग्रुप के सदस्य

रतलाम। बुढ़ी-बीमार गायों की सेवा संकल्प के साथ गो-दान की प्राचीन परम्परा के अन्तर्गत इन्हे बचाने का छोटा सा प्रयास वाघेला योगा ग्रुप के सदस्यों ने शुरू किया है। योगा ग्रुप रतलाम 25 से अधिक सदस्य हर दिन गो माता की कैसी सेवा की जा सके, इस संबंध में चर्चा तो करते हैं। हाट में बीमार एवं बुढ़ी गाये जो मजबूरीवश गरीब गोपालकों द्वारा ओने-पोने दाम में बैची जाती है, जो किसी न किसी रूप में कसाई या बुचडख़ाने में पहुंच जाती है। इन्हे ग्रुप के सदस्यों द्वारा खरीदा जाकर गौशाला के सुपुर्द किया जा रहा है।

ग्रुप संयोजक दिनेश वाघेला ने बताया कि वर्षो पुरानी गो-दान की परम्परा को निभाते हुए अपने माता-पिता या पैतृक की स्मृति में गो-दान के लिए सदस्यों को प्रेरित किया। अब तक ग्रुप के सदस्यों को 15 से अधिक गायों स्वीकृति राशि मिल चुकी है। साथ ही धर्मालुजन सालगिरहा और जन्मदिन पर भी घास के अलावा अन्य खाद्यान सामग्री लेकर गौशाला पहुंच रहे हैं।

ऐसे कर रहे गो-दान

पहली दो गाये संयोजक द्वारा अपनी दादी स्व. मोती बहन व माता-पिता स्व. कमल सुंदरलाल वाघेला की स्मृति में किया। इसके बाद स्व. मोहनबाई की स्मृति में भेरूलाल चौहान, स्व. रामसुखीबाई की स्मृति में बाबूलाल सिसोदिया, स्व. पारस कुंवर की स्मृति में मोहनसिंह राजावत, मांगीबाई ईंदरलाल सिसोदिया व बंटी सोनी द्वारा भी गो दान का संकल्प लिया गया। गोदान परम्परा को शुरू करने का सिलसिला अमावस्या पर पहली बुढ़ी गाय खेतलपुर गौशाला को सौंपी गई, साथ ही सदस्यों द्वारा तीन गाड़ी हरा घांस से गो भोज कराया गया।

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