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#VIP- राज्य योजना आयोग उपाध्यक्ष ने नकारी वीआईपी संस्कृति

Updated: IST
- पायलेट व फालो वाहन नहीं होंगे साथ, अन्य प्रतीकों का भी नहीं करेंगे उपयोग - जनप्रतिनिधियों के साथ ही प्रशासनिक अफसरों के वाहनों से भी उतरने लगी बत्ती।

रतलाम। विधायकों को मिलने वाले भत्ते सहित मानदेय नहीं लेने वाले राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष व शहर विधायक चेतन्य काश्यप ने अब वीआईपी संस्कृति को भी नकार दिया है। उन्होने पायलेट व फालो वाहन सहित वीआईपी संस्कृति के अन्य प्रतीकों का उपयोग नहीं करने की घोषणा की है। वहीं, शहर में जनप्रतिनिधियों के साथ ही अब प्रशासनिक अफसरों के वाहनों से भी नीली, पीली व लाल बत्ती हटाने की शुरुआत होने लगी है।

देशभर में एक मई से समाप्त होने वाली वीआईपी संस्कृति से दूरी बनाने की शुरुआत हो गई है। अब राज्य योजना आयोग उपाध्यक्ष व शहर विधायक चेतन्य काश्यप ने केबिनेट मंत्री का दर्जा होने पर शासन से मिली पायलेट व फालो वाहन की सुविधा वापस लौटा दी है। काश्यप ने घोषणा करते हुए कहा कि वीआईपी संस्कृति के किसी भी प्रतीकों का वे उपयोग नहीं करेंगे। साथ ही सभी से आव्हान किया कि वे वीआईपी संस्कृति को छोड़ें। उन्होनें सरकार से अनुरोध किया है कि वीआईपी संस्कृति के सभी प्रतीकों का प्रचलन समाप्त किया जाना चाहिए। उन्होंने केन्द्र सरकार की पहल का स्वागत भी किया हैं।

अफसरों के वाहनों से भी हटने लगी बत्ती

लाल बत्ती वाहनों की संस्कृति समाप्त करने के निर्णय बाद जिले में प्रशासनिक अफसर भी अपने वाहनों पर लगी लाल सहित अन्य बत्ती हटाने में जुट गए हैं। कलेक्टर बी चंद्रशेखर ने इस संबंध में मौखिक तौर पर अफसरों को निर्देशित भी कर दिया हैं। हालांकि पुलिस विभाग के अफसरों के वाहनों को लेकर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।

350 से ज्यादा वाहनों पर बत्तियां

प्रशासनिक विभागों से मिली जानकारी के मुताबिक, फिलहाल जिले में विभिन्न प्रकार की बत्तियों का इस्तेमाल करने वाले वाहनों की संख्या करीब 350 के आसपास है। इनमें एक श्रेणी वाले वाहनों की संख्या 39 से ज्यादा है। वहीं, चिकित्सकीय क्षेत्र में 71 वाहनों पर नीली बत्ती का उपयोग हो रहा है। नए आदेश के बाद करीब 273 वाहनों पर से बत्ती लगाने की व्यवस्था में बदलाव आ जाएगा। इनमें विधायकों सहित अन्य जनप्रतिनिधियों व मंत्री दर्जा प्राप्त राजनेताओं के वाहन भी शामिल हैं।

नई राजनीतिक संस्कृति की शुरुआत

प्रधानमंत्री के निर्णय का हम स्वागत करते हैं। यह लोकतंत्र के अनुरुप नई राजनीतिक संस्कृति की शुरुआत है। इसका अनुसरण खुद मुख्यमंत्री भी कर रहे हैं। इसे लेकर मैंने वीआईपी संस्कृति के सभी प्रतीकों का उपयोग नहीं करने की घोषणा की है।

- चेतन्य काश्यप, उपाध्यक्ष राज्य योजना आयोग एवं विधायक शहर

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