Patrika Hindi News

#cool_india- शहर की आबादी 3 लाख, 3.50 लाख लोगों को पानी दे रहा धोलावाड़ बांध

Updated: IST Handspump or tanker for water does not seem to be
यह हालात पानी की बर्बादी के कारण खड़े हो रहे हैं। अब वक्त समय के साथ चलने का है, हमें आज से ही भविष्य का पानी बचाना पड़ेगा।

रतलाम। एक वक्त था, जब दिन में दो मर्तबा नल चलते थे, लेकिन अब एक दिन छोड़कर नलों में पानी आता है। शहर की प्यास बुझाने वाले धोलावाड़ बांध से हर दिन 3 लाख 50 हजार लोगों की पेयजल मांग पूर्ति करने वाला पानी छोड़ा जाता है, फिर भी 3 लाख से कम आबादी वाले शहर की कॉलोनियों में पेयजल की किल्लत के हालात खड़े हो गए हैं।

जल संरक्षण के जानकारों की मानें तो यह हालात पानी की बर्बादी के कारण खड़े हो रहे हैं। अब वक्त समय के साथ चलने का है, हमें आज से ही भविष्य का पानी बचाना पड़ेगा। नहीं तो दो गुना आपूर्ति के बाद भी शहर के कंठ तर कर पाना मुश्किल ही रहेगा।

4 करोड़ 80 लाख लीटर पानी छोड़ा जा रहा

शहर के सबसे बड़े जल आपूर्ति वाले धोलावाड़ बांध से 4 करोड़ 80 लाख लीटर पानी छोड़ा जा रहा है। यह पानी की वह मात्रा है, जिससे करीब 3 लाख 50 हजार लोगों तक आपूर्ति की जा सकती है। बावजूद इसके शहर में 95 लाख गैलन पानी की रोजाना मांग की पूर्ति नहीं हो रही है। शहर की कई कॉलोनियां जल संकट का सामना कर रही हैं। नगर निगम ने हाल ही में निजी फर्मो से करार कर करीब 84 लाख रुपए पेयजल के परिवहन पर खर्च करना तय किया है।

20 टैंकरों से शुरुआत

इसके लिए 20 टैंकरों से शुरुआत भी की गई है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि पर्याप्त पानी के बाद शहर में किल्लत के हालात क्यों हैं। जानकारों की मानें तो अपर्याप्त संसाधनों के कारण पानी बर्बाद हो रहा है, इससे शहर को मिलने वाले पानी की मात्रा बांध से छोड़े जा रहे पानी की तुलना में कम हो गई है। इसका असर शहर की कॉलोनियों तक टैंकरों से पानी भेजने के तौर पर सामने आया है।

फिर भी पानी की किल्लत

17.90 एमसीएम पानी धोलावाड़ से शहर को हर साल दिया जाता है।
0.048 एमसीएम पानी रोजाना बांध से शहर के लिए छोड़ते हैं।
90 लाख गैलन पानी फिलहाल शहर में रोजाना जरूरत।
15 प्रतिशत की दर से हर साल गर्मियों मे बढ़ जाती है पानी की मांग।
41 हजार नल कनेक्शनों के जरिए शहर में एक दिन छोड़कर पानी सप्लाई।

पानी का गणित, सिस्टम हो रहा फेल

दो लाख 65 हजार की आबादी वाले शहर में फिलहाल धोलावाड़ बांध ही सबसे बड़ा विकल्प हैं। हालांकि निजी एवं सरकारी जल स्त्रोत भी हैं, लेकिन इनसे पानी की मांग का महज 14 प्रतिशत हिस्सा ही पूर्ति हो रहा है। धोलावाड़ा बांध से शहर के लिए रोजाना 0.48 एमसीएम पानी दिया जा रहा है। इससे एक दिन छोड़कर शहर को पानी दे रहे हैं। जबकि यह मात्रा शहर में रोजाना पानी देने के लिए पर्याप्त है, फिर भी हालात बदतर हैं।

पानी बचाने पर नहीं ध्यान

शहर में मांग से ज्यादा पानी धोलावाड़ से दिया जाता है, लेकिन संसाधन पुराने होने के कारण पानी व्यर्थ बह जाता है। इसे बचाने की दिशा में काम करना होगा, अन्यथा पानी की यह बर्बादी आने वाले समय में और भयावह हालात खड़े कर देगी।

एसएन मिश्रा, सेवानिवृत्त इंजीनियर

टैंकरों से पेयजल दे रहे

शहर में फिलहाल पानी का संकट नहीं है, जहां पाइप लाइन नहीं है उन इलाकों में टैंकर से पानी भेजा जा रहा है। पुरानी पाइप लाइन की जगह नई लाइन डाल रहे हैं।

एसके सिंह, आयुक्त नगर निगम रतलाम

यह भी पढ़े :
अपने विवाह के सपने को भारत मैट्रीमोनी पर साकार करे।- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन करे!
LIVE CRICKET SCORE
Patrika.com

लेटेस्ट ख़बरें ई-मेल पर पाने के लिए सब्सक्राइब करें

Dus ka Dum
Ad Block is Banned Click here to refresh the page

???? ??????? ?? ??? ???? ????? ???