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जावरा के कई विद्यार्थी परीक्षा से वंचित

Updated: IST Ratlam News
विक्रम विश्वविद्यालय ने वेबलिंक को बंद कर दिया व अब वे विद्यार्थी जो फॉर्म नहीं भर पाए परेशान हो रहे है। इनको सही जवाब तक कॉलेज से नहीं मिल रहा है।

जावरा(रतलाम)। विक्रम विश्वविद्यालय द्वारा इस बार विद्यार्थियों द्वारा ऑनलाइन भरे जाने वाले परीक्षा फॉर्म को एप्रूव कर देने की तारीख को समाप्त करते हुए वेबलिंक को बंद कर दिया। इससे शहर व ग्रामीण क्षेत्र के कई नियमित व स्वाध्याय विद्यार्थी परीक्षा से वंचित रह गए हैं। इन विद्यार्थियों को सही जवाब तक कॉलेज से नहीं मिल रहा है।

अब तक इन वंचित विद्यार्थियों के लिए विक्रम विश्वविद्यालय से कोई निर्णय भी नहंी हुआ है। परीक्षा से वंचित विद्यार्थी महाविद्यालय में प्राचार्य के पास भी पहुंचे, लेकिन यहां उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया।अब ये विद्यार्थी परेशान हो रहे हैं।

वेबलिंक पर फॉर्म

प्राचार्य प्रतिभा कोठारी ने बताया कि ऐसे विद्यार्थी सामने आ रहे हैं जिनके फॉर्म स्वीकार नहीं हुए हैं। ऐसी स्थिति में वह परीक्षा से वंचित है। इसका निर्णय विश्वविद्यालय से ही हुआ है। स्वाध्याय व नियमित में स्नातक व स्नाकोत्तर के विद्यार्थी का ऑनलाइन विश्वविद्यालय की वेबलिंक पर फॉर्म भरा जाता है।

निर्णय विश्वविद्यालय से होना है

नियमित विद्यार्थियों का फॉर्म ऑनलाइन होने के बाद यहां भी एप्रूव होता है, लेकिन स्वाध्यायी का सीधा होता है। इस बार ऐसे कई विद्यार्थी हैं, जिनका फॉर्म एप्रूव नहीं हुआ और विश्वविद्यालय ने साइड ही बंद कर दी। विद्यार्थी उनके पास पहुंच रहे हैं, लेकिन यह महाविद्यालय से नहीं विश्वविद्यालय से हुआ है। इस संबंध में कोई भी निर्णय वहीं से होना है। यदि विश्वविद्यालय से इस मामले में निर्णय नहीं होगा तो परीक्षा से वंचित रहे विद्यार्थियों को मजबूरन पूरे वर्ष इंतजार कर अगले साल परीक्षा देना होगी।

बिलकुल समय नहीं मिला

स्नातक-स्नाकोत्तर स्तर में एटीकेटी के जिन विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी, उनका परिणाम कुछ ही दिनों पूर्व आया। परिणाम आने और परीक्षा फॉर्म भरकर एप्रूव करवाने में उन्हें बिलकुल समय नहीं मिला। ऐसे में जिन विद्यार्थियों को फिर से एटीकेटी आई है, वह फॉर्म एप्रूव करवाकर भर हीं नहीं पाए। ऐसे में इन छात्रों को भी एटीकेट के विषय की परीक्षा देने के लिए पूरे वर्ष इंतजार करना पड़ेगा।

ज्ञापन से आगे कुछ नहीं

अब ऐसे विद्यार्थियों के लिए भी विश्वविद्यालय स्तर से किसी प्रकार का निर्णय नहीं हुआ है। छात्र राजनीतिक करने वाले संगठनों द्वारा इस संबंध में विश्वविद्यालय स्तर तक ज्ञापनबाजी कर छात्र हित में निर्णय लेने की मांगे की गई, लेकिन इस पर निर्णय अभी नहीं हुआ है।

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