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माता-पिता के चरणो में चारो धाम

Updated: IST Parents around the shrine in stages
पं. दिनेशकृष्ण शास्त्री ने कथा के छठे दिन बताया पति-पत्नी के दाम्पत्य जीवन का महत्व

रतलाम। जो व्यक्ति अपने माता-पिता की सेवा करता है, उन्हे किसी तीर्थ में जाने की जरुरत नहीं है। माता-पिता से बड़कर कोई तीर्थ नहीं होता है। माता-पिता के चरणों में चारो धाम का फल मिलता है। ये विचार ये विचार देवरादेवनारायण ट्रस्ट एवं डीडी नगर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भागवत कथा में आचार्य पं. दिनेश कृष्ण शास्त्री ने श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंद सुनाते हुए व्यक्त किए। महाराज ने श्रीकृष्ण रुक्मिणी प्रसंग पर बताया कि पति-पत्नी का दांपत्य जीवन प्रेम व विश्वास पर टीका होता है, जो पत्नी अपने पति के बराबर चले वह पत्नी होती है, जो पत्नी अपने पति के पिछे चले वह धर्म पत्नी होती है।

आवो मेरी सखियों मुझे...
देवरादेवनारायण कॉलोनी में देवनारायण मंदिर प्रांगण पर कथा के छठे दिन श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह धूमधाम से मनाया गया। भक्त भागवत प्रचारक तेजकुमार सोलंकी के सुनाए भजन आज मेरे श्याम की शादी है....आवो मेरी सखियों मुझे मेहंदी लगा दो...में रमते नजर आए। शुक्रवार को सुदामा चरित्र का वाचन किया गया। पोथी पूजन कर भागवत कथा को विश्राम दिया जाएगा।

आज से भागवत कथा शिवगढ़ में

सोलंकी ने बताया कि संगीतमय भागवत कथा का वाचन ग्राम शिवगढ़ रावटी रोड ग्वालगढ़ में 18 से 24 फरवरी तक किया जाएगा। कथा आयोजक प्रेमसिंह राठौर ने बताया कि कथा का वाचन प्रतिदिन दोपहर 12 से 3 बजे तक पं. दिनेशकृष्ण शास्त्री द्वारा किया जाएगा।

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