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किर्गीस्तान की एमबीबीएस छात्रा दे रही अस्पताल में सेवाएं

Updated: IST Services in the hospital giving MBBS student in Ky
छुट्टियों में अपने नाना धन्नालाल पाटीदार के यहां करमदी आई हुई है पूजा पाटीदार, मूल रूप से खाचरोद के घिनोदा की है रहने वाली

रतलाम। बचपन से डॉक्टर बनने की तमन्ना ने पूजा को शुरू से ही अंग्रेजी भाषा की तरफ आकर्षित किया। दसवीं में आई तो उसे इतना आत्मविश्वास आ गया कि वह निश्चित रूप से डॉक्टर बनेगी। 12वीं साइंस बायोलॉजी से करते ही उसने पीएमटी की इंट्रेंस एक्जाम दी और पहले ही प्रयास में इसे क्लियर कर लिया। इसके बाद किर्गीस्तान से किसी कंसलटेंट ने उनसे संपर्क किया कि वे वहां आकर एमबीबीएस की पढ़ाई करे। पिता भी बेटी को डॉक्टर बनाने का सपना देख रहे थे। उन्होंने बिना कोई देर किए हां कर दी।

दूसरे साल की पढ़ाई लगभग पूरी

अब यही बेटी किर्गीस्तान की राजधानी बिस्केक के इंटरनेशनल स्कूल ऑफ मेडिसीन में एमबीबीएस की दूसरे साल की पढ़ाई लगभग पूरी कर चुकी है। इस समय वह अपने करमदी में रहने वाले नाना धन्नालाल पाटीदार के यहां छुट्टियां बिताने आई तो उसने जिला अस्पताल में भी मरीजों को सेवा देने और अपनी प्रैक्टिस को आगे बढ़ाने के लिए कदम बढ़ाया है। वह हर दिन जिला अस्पताल आकर सीनियर डॉक्टरों के साथ यहां सेवाएं दे रही है।

घिनौदा की रहने वाली है पूजा

पूजा पाटीदार खाचरोद के घिनोदा की रहने वाली है। करमदी में उसके नाना-नानी रहते हैं। पूजा बताती है कि वह अपने नाना के यहां आकर बहुत खुश है क्योंकि पिता और नाना के यहां उसे पूरी स्वतंत्रता है। तीन बहनों में सबसे बड़ी पूजा शुरू से ही प्रतिभाशाली रही है। नाना धन्नालाल पाटीदार बताते हैं कि उनके तीन लड़कियां हैं और पूजा भी तीन बहने ही हैं।

हमारे यहां लड़कियां होना सौभाग्य है क्योंकि सभी शिक्षित और समझदार होकर खुले विचारों वाली हैं। जब पूजा करमदी आई और उसने अस्पताल में सेवाएं देने की बात कही तो हमें भी खुशी हुई। डॉक्टर जीवन चौहान से चर्चा की तो उन्होंने अपने साथ रखने की हामी भर दी। अब यह उनके साथ ही सेवाएं दे रही है।

बहुत अंतर है पढ़ाई में

पूजा बताती है कि भारत और विदेशों की पढ़ाई में काफी अंतर है। इस समय वह एमबीबीएस द्वितीय वर्ष की छात्रा है लेकिन आज उसके पास इतना नॉलेज है कि यहां के एमबीबीएस के चौथे वर्ष के स्टूडेंट की तरह ट्रीटमेंट कर सकती है। उसका कहना है कि वहां थ्योरीकल और प्रैक्टिकल दोनों में काफी पढ़ाई करवाई जाती है जो यहां नहीं हो पाती है।

पूजा एमबीबीएस करने के बाद पीडियाट्रिशन बनना चाहती है। एमबीबीएस करने के बाद वे देश में ही सेवाएं देना पसंद करती है। कहीं सरकारी अस्पताल में सर्विस लगे या नहीं इससे उसे कोई फर्क नहीं पड़ता है। वह अपने गांव और आसपास के ग्रामीण क्षेत्र में सेवाएं देना ज्यादा पसंद करेगी।

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