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इस तरह करे करवा चतुर्थी का पूजन

Updated: IST Ratlam News
अपने पति की लंबी आयु के लिए सुहागिनें यह व्रत करती है। प्रचलित मान्यताओं के अनुसार यह व्रत अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग तरह से किया जाता है। रतलाम में चंद्रउदय रात 9 बजकर 3 मिनट पर होगा।

रतलाम। हिंदू धर्म शास्त्रों में सुहागिनों का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार करवा चौथ है। इस दिन सुहागिनें अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए व्रत रखती है। यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को किया जाता है। ज्योतिषी ओशोप्रिया के अनुसार अपने पति की लंबी आयु के लिए सुहागिनें यह व्रत करती है। प्रचलित मान्यताओं के अनुसार यह व्रत अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग तरह से किया जाता है। इस व्रत को रखने से एक दिन पहले महिलाएं हाथों में मेंहदी रचाती है। व्रत के दिन महिलाएं नए कपड़े, आभूषण पहनकर सोलह श्रृंगार कर पूजा करने जाती है। रतलाम में चंद्रउदय रात 9 बजकर 3 मिनट पर होगा।

करवा चौथ व्रत विधि-

व्रत के दिन सुबह स्नान करने के पश्चात सुहागिनें यह संकल्प बोलकर करवा चौथ व्रत का आरंभ करें- मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये। विवाहित स्त्री पूरे दिन निर्जला बिना पानी के रहें।

ये करे सबसे पहले

दीवार पर गेरू से फलक बनाकर पिसे चावलों के घोल से करवा बनाएं। इसे वर कहते हैं। चित्रित करने की कला को करवा धरना कहा जाता है। आठ पूरियों की अठावरी बनाएं। हलवा बनाएं। पक्के पकवान बनाएं। पीली मिट्टी से गौरी बनाएं और उनकी गोद में गणेशजी बनाकर बिठाएं। गौरी को लकड़ी के आसन पर बिठाएं।

फिर करे ये काम

गौरी को बैठाने के बाद उस पर लाल रंग की चुनरी चढ़ाए इसके बाद माता का भी सोलह श्रृंगार करें। वायना ;भेंटद्ध देने के लिए मिट्टी का टोंटीदार करवा लें। करवा में गेहूं और ढक्कन में शक्कर का बूरा भर दें। उसके ऊपर दक्षिणा रखें। रोली से करवा पर स्वस्तिक बनाएं। गौरी.गणेश और चित्रित करवा की परंपरानुसार पूजा करें।

करे इस मंत्र से शुरू

नम: शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभाम्‌ा प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे। करवा पर 13 बिंदी रखें और गेहूं या चावल के 13 दाने हाथ में लेकर करवा चौथ की कथा कहें या सुनें। कथा सुनने के बाद करवा पर हाथ घुमाकर महिलाओं को अपनी मां या सास का आशीर्वाद लेना चाहिए।

पति से ले आशिर्वाद

तेरह दाने गेहूं के और पानी का लोटा या टोंटीदार करवा अलग रख लें। रात्रि में चन्द्रमा निकलने के बाद छलनी की ओट से उसे देखें और चन्द्रमा को अघ्र्य दें। चन्द्रमा को अघ्र्य देने के बाद पति से आशीर्वाद लेकर उन्हें भोजन कराने के पश्चात ही खुद भोजन ग्रहण करने से सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

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ये है मुहूर्त

करवा चौथ 19 अक्टूबर 2016

करवा चौथ पूजा मुहूर्त- शाम 5.13 बजे से शाम 6.59 बजे तक।

रतलाम में चंद्र उदय- रात 9.03 बजे।

इसलिए खास है इस बार की चौथ

-बुधवार को शुभ कार्तिक मास का रोहिणी नक्षत्र है।

-इस दिन चन्द्रमा अपने रोहिणी नक्षत्र में रहेंगे।

-इस दिन बुध अपनी कन्या राशि में रहेंगे।

-इसी दिन गणेश चतुर्थी और कृष्ण जी की रोहिणी नक्षत्र भी है।

-बुधवार गणेश जी और कृष्ण जी दोनों का दिन है।

-ये अद्भुत संयोग करवाचौथ के व्रत को और भी शुभ फलदायी बना रहा है।

-इस दिन पति की लंबी उम्र के साथ संतान सुख भी मिल सकता है।

करवा चौथ के व्रत के नियम और सावधानियां

ज्योतिषी ओशोप्रिया के अनुसार इस बार करवाचौथ का ये व्रत हर सुहागिन की जिंदगी संवार सकता है, लेकिन इसके लिए इस दिव्य व्रत से जुड़े नियम और सावधानियों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं कि इस अद्भुत संयोग वाले करवाचौथ के व्रत में क्या करें और क्या ना करें-

-केवल सुहागिनें या जिनका रिश्ता तय हो गया हो वही स्त्रियां ये व्रत रख सकती हैं।

- व्रत रखने वाली स्त्री को काले और सफेद कपड़े कतई नहीं पहनने चाहिए।

- करवाचौथ के दिन लाल और पीले कपड़े पहनना विशेष फलदायी होता है।

- करवाचौथ का व्रत सूर्योदय से चंद्रोदय तक रखा जाता है।

- ये व्रत निर्जल या केवल जल ग्रहण करके ही रखना चाहिए।

- इस दिन पूर्ण श्रृंगार और अच्छा भोजन करना चाहिए।

- पत्नी के अस्वस्थ होने की स्थिति में पति भी ये व्रत रख सकते हैं।

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