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मांग बढऩे से कमर्शियल प्रॉपर्टी में मिलेगा बेहतर रिटर्न

Updated: IST Commercial property
साल 2016 में एफएमसीजी, ई-कॉमर्स, मैन्युफैक्चरिंग, आईटी जैसे सेक्टर्स में मजबूत मांग के चलते आवासीय बाजार में सुस्ती केे बावजूद रियल एस्टेट के कमर्शियल सेग्मेंट ने काफी शानदार प्रदर्शन किया था।

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सेकंड लीड, लीड के पास

ऋषि सिंंह
डायरेक्टर, इंदुमा इंफ्राटेक

साल 2016 में एफएमसीजी, ई-कॉमर्स, मैन्युफैक्चरिंग, आईटी जैसे सेक्टर्स में मजबूत मांग के चलते आवासीय बाजार में सुस्ती केे बावजूद रियल एस्टेट के कमर्शियल सेग्मेंट ने काफी शानदार प्रदर्शन किया था। पूरे साल कमर्शियल प्रॉपर्टी की लीजिंग हुई और यह तरक्की इस साल भी बने रहने की पूरी उम्मीद है। ऐसे में कमर्शियल प्रॉपर्टी में निवेश नए साल में भी निवेशकों को शानदार रिटर्न दिला सकता है। हालांकि, यह जानना बहुत जरूरी है कि आवासीय प्रॉपर्टी मार्केट से यह बिल्कुल अलग होता है। और बिना सोचे-समझे निवेश फायदे की जगह नुकसान भी करा सकता है। इसलिए निवेश से पहले कुछ अहम बिंदुओं की जानकारी जरूर ले लेनी चाहिए।

तीन तरीके से कर सकते निवेश

कमर्शियल रियल एस्टेट में निवेशक तीन तरीके से निवेश कर सकते हैं। इनमें बिल्डर से सीधे कमर्शियल स्पेस की खरीदारी, दूसरा- रियल एस्टेट फंड में निवेश और तीसरा- रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट यानी आरईआईटी में निवेश शामिल हैं। आरईआईटी निवेशकों द्वारा जुटाए पैसों का ऐसी प्रॉपर्टी में निवेश करते हैं, जहां से आय तो आती ही है। इसके अलावा प्राप्त मुनाफे के एक बड़े हिस्से का वितरण वे अपने निवेशकों के बीच करते हैं। कमर्शियल स्पेस की बढ़ती डिमांड को देखते हुए इन दिनों छोटी-छोटी कमर्शियल यूनिट (500-1,000 वर्ग फीट) बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। इनमें रिटेल शॉप से लेकर ऑफिस स्पेस तक सभी शामिल हैं। नए क्षेत्र में डेवलप हो रहे मॉल में इस तरह के स्पेस आज के समय में आसानी से उपलब्ध हैं।

छोटे साइज की कमर्शियल यूनिट लें

अगर आप पहली दफा कमर्शियल प्रॉपर्टी में निवेश करने की सोच रहे हैं तो छोटे साइज के ऑफिस या रिटेल स्पेस को तवज्जों दें। ऐसा इसलिए है कि इसमें आपका निवेश कम होगा और रिटर्न बेहतर मिलेगा। छोटे कमर्शियल स्पेस के लिए किराएदार ढूंढना भी आसान होता है। अगर आप चाहें तो खुद के कारोबार के लिए भी इस स्पेस का इस्तेमाल कर सकते हैं।

निवेश से पहले इन बातों पर करें गौर

कमर्शियल प्रॉपर्टी में निवेश बच्चों का खेल नहीं होता। इसके लिए रिसर्च औैर योजनाबद्ध तरीके से काम करने की जरूरत होती है। निवेश से पहले प्रॉपर्टी की जगह के साथ-साथ वहां की मांग-आपूर्ति की स्थिति पर भी गौर करना चाहिए। अगर उचित तरीके से शोध नहीं किया गया तो फिर माइक्रो मार्केट में खरीदारी की गलती हो सकती है। इसके अलावा डेवलपर की विश्वसनीयता और उसका ट्रैक रिकॉर्ड, सार्वजनिक परिवहन की स्थिति और प्रोजेक्ट के प्रॉपर्टी मैनेजमेंट की गुणवत्ता पर भी गौर करना चाहिए। अगर निवेशक किसी रिटेल स्टोर में निवेश कर रहा है तो उसे यह भी देखना चाहिए कि वहां कितने लोग भविष्य में यहां आकर रह सकते हैं। वहीं, अगर वह खुद के कारोबार के लिए यह ले रहा है तो यह देखना चाहिए कि जिस प्रोजेक्ट में वह प्रॉपर्टी ले रहा है, वह उसकी बिजनेस जरूरतों को पूरा करने के अनुरूप है या नहीं। इसके साथ मेंटनेंस, लंबी अवधि में निवेश पर मिलने वाले रिटर्न का भी ख्याल रखना चाहिए।

कमर्शियल प्रॉपर्टी में क्यों करें निवेश?

कमर्शियल प्रॉपर्टी की रेंटल रिटर्न आम तौर पर 9-11 प्रतिशत होती है। दूसरी तरफ रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की रेंटल रिटर्न 2-3.5 प्रतिशत होती है। अगले पांच वर्षों के दौरान भारत में ऑफिस स्पेस की मांग तेजी से बढऩे वाली है। यानी आपको आवासीय प्रॉपर्टी की तुलना में कमर्शियल प्रॉपर्टी से कहीं अधिक किराया प्राप्त होगा। इसके साथ आप कमर्शियल प्रॉपर्टी को आने वाले समय में न केवल बढ़ी हुई कीमतों पर बेचकर लाभ अर्जित कर सकते हैं, बल्कि अच्छे स्थान पर लिए गए ऑफिस या दुकान से अपना बिजनेस भी शुरू कर सकते हैं। वैसे निवेशक जो होम वर्क कर सकते हैं, उनके लिए कमर्शियल रियल एस्टेट में निवेश करना अधिक रिटर्न देने वाला साबित होगा।

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