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शहरी जीवनशैली ही नहीं, महंगाई से भी बढ़ रहे हैं डिप्रेशन और स्ट्रेस

Updated: IST stress and depression
मनोरोग अस्पताल से जुड़े विशेषज्ञों के पास अवसाद के औसतन 10-15 नए मरीज रोजाना पहुंच रहे हैं

शहरी जीवनशैली को तो तनाव का मुख्य कारण माना ही जाता रहा है, अब बढ़ती महंगाई भी लोगों को अवसाद में धकेल रही है। विभिन्न अध्ययनों के मुताबिक शहरी आबादी में करीब 5 फीसदी लोग किसी न किसी तरीके के अवसाद से ग्रसित रहते हैं। मोटे अनुमान के मुताबिक जयपुर में करीब 2 लाख लोग हाई, मीडियम और लो श्रेणी के अवसाद से ग्रसित है।

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मनोरोग अस्पताल से जुड़े विशेषज्ञों के पास अवसाद के औसतन 10-15 नए मरीज रोजाना पहुंच रहे हैं। इस लिहाज से शहर में रोजाना 100-150 नए मरीजों की पहचान हो रही है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी लोग अवसाद के अधिक शिकार हो रहे हैं। इसका कारण कमजोर आर्थिक स्थिति के बीच महंगाई और जीवन प्रत्याशा बढऩा है।

इंटरनेट एडिक्शन भी इसका बड़ा कारण माना गया है। करीब 50 फीसदी लोगों में अवसाद की स्थिति समय और परिस्थिति के अनुसार बदलती रहती है। यानी पारिवारिक दायित्वों, काम के दबाव और समय-समय पर परिस्थितियों के बदलाव भी इसके बड़े कारण हैं।

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इधर हमारे शोध की रिपोर्ट भी चिन्ताजनक

एसएमएस अस्पताल के मनोचिकित्सा केंद्र और बायोकैमिस्ट्री विभाग की ओर से दो साल तक किए गए शोध में सामने आया है कि शहर में महिलाओं में डिप्रेशन की समस्या लगातार बढ़ रही है। एसएमएस अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग के ओपीडी में प्रतिदिन 60-70 महिलाएं विभिन्न बीमारियों का इलाज कराने पहुंचती हैं। इनमें 50 फीसदी महिलाएं डिप्रेशन की शिकार पाई जा रही हैं।

रिसर्च करने वाले डॉक्टरों के अनुसार शोध में 45 से 60 साल की 100 महिलाओं को शामिल किया गया। इसमें 50 महिलाएं डिप्रेशन और 50 नॉन डिप्रेशन वाली थीं। डिप्रेशन वाली महिलाओं में कालेस्ट्रॉल, सीरम और लॉ डेंसिटी लाइपो प्रोटीन अधिक पाया गया, जबकि नॉन डिप्रेशन वाली महिलाओं में यह सामान्य था। हाई डेंसिटी लाइपो प्रोटीन की मात्रा कम मिली। डिप्रेस्ड महिलाओं में थायरॉयड हार्मोन (टीएसएच) की मात्रा अधिक थी।

मनोचिकित्सकों का कहना है कि घर-परिवार की चिंता, बच्चों के कॅरियर को लेकर परेशानी, अकेलापन, पारिवारिक समस्या, हार्मोनल इम्बैलेंस होने से महिलाएं डिप्रेशन की गिरफ्त में आ जाती हैं। नॉन डिप्रेस्ड महिला की तुलना में डिप्रेस्ड महिला में एस्ट्रोजन लेवल (पीरियड की रेग्यूलरिटी) ज्यादा कम था। एसएमएस मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सा विभाग के वरिष्ठ आचार्य एवं इकाई प्रमुख डॉ. आरके सोलंकी का कहना है कि डिप्रेस्ड महिलाओं को हृदय जांच नियमित करानी चाहिए।

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