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इस बार सर्वार्थसिद्धि योग में है होली पूजा का मूहूर्त, ऐसे करें पूजा

Updated: IST holi puja muhurat
फाल्गुन सुदी पूर्णिमा होली पर राजयोग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग है, राजयोग सुबह 6.45 से शाम 5.41 बजे तक है

इस बार होली सर्वार्थसिद्धि योग में मनाई जाएगी। ज्योतिषियों के अनुसार होली पर इस बार कुछ विशेष योग बन रहे हैं। फाल्गुन सुदी पूर्णिमा को राजयोग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग है। राजयोग सुबह 6.45 से शाम 5.41 बजे तक है। इसी दिन गजकेसरी और कलानिधि योग भी बन रहा है। सम-विषम हर परिस्थिति में फल देने वाला यह योग लोगों को उन्नति प्रदान करेगा।

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पं. अक्षय शास्त्री के अनुसार सर्वार्थ सिद्धि योग रविवार शाम 5.42 से प्रात: 6.44 बजे तक रहेगा। 12 मार्च की शाम गोधुली वेला में शाम 6.30 से 6.42 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग में होलिका दहन होगा। होलिका दहन का यह मुहूर्त शाम को प्रदोष युक्त और भद्रा रहित होने पर रात 8 बजे तक होलिका दहन किया जा सकेगा। सवार्थ सिद्धि योग में होलिका दहन होने से यह सभी के लिए श्रेष्ठ और फलदायी रहेगी।

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ऐसे करें होली की पूजा

होलिका दहन के दिन होली का पूजन किया जाता है। इसके लिए जिस स्थान पर होलिका दहन करना है, उसे अच्छे से साफ कर गंगा जल छिड़क कर उस स्थान को शुद्ध किया जाता है। फिर वहां पर सूखी लकड़ियों का ढेर बनाया जाता है। अग्नि समर्पित करने से पूर्व होलिका का विधिवत पूजन किया जाता है।

पूजा के बाद होलिका के पास गोबर से बनी ढाल तथा उपले रखे जाते हैं। इसके बाद जल सहित सभी पूजा सामग्रियों को होलिका को अर्पित किया जाता है। पूजा के पश्चात होलिका की परिक्रमा की जाती है और अर्ध्य दिया जाता है। विद्वानों के अनुसार पूजन करते वक्त पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठना चाहिए।

होलिका दहन के समय होलिका में नारियल, सप्त अनाज (सात तरह के अनाज), चीनी के खिलौने, नई फसल इत्यादि की आहुति दी जाती है। सप्तअनाज में गेहूं, उड़द, मूंग, चना, चावल जौ और मसूर को मिश्रित किया जाता है। पूजा सामग्री की अन्य वस्तुओं में मोली, रोली, माला, रंगीन अक्षत, गंध के लिये धूप या अगरबत्ती, पुष्प, गुड़, कच्चे सूत का धागा, साबूत हल्दी, मूंग, बताशे, नारियल एवं नई फसल के अनाज गेंहू की बालियां, पके चने आदि को जोड़ा जाता है।

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