Patrika Hindi News

Video Icon
18 साल में पूरा होता है ये कोर्स, 70 साल के वृद्द भी इस स्कूल के विद्यार्थी, देखें विडियो

Updated: IST UP Election 2017 News, UP Election Results,up elec
जन्म से मृत्यु तक की होती है पढाई, दिया जाता है दिव्य ज्ञान का मंत्र

जबलपुर। किसी कोर्स को पूरा करने में कितना समय लगता है, आपका जबाव होगा दो ,पांच या अधिकतम 7 साल। लेकिन जबलपुर में एक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है जिसकी अवधि है 18 साल। सुनकर आप भी चौंक गए होंगे लेकिन यह सच है। शहर की आधात्मिक शिक्षण संस्था चिन्मय विद्या पीठ एक प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रही है जो 18 साल तक चलेगा। यह प्रशिक्षण श्रीमदभगवदगीता पर है और संस्था का उद्देश्य अगले अठारह साल में दस हज़ार शिक्षक तैयार करना है।

कैसी है क्लास
एक स्वर में गीता के श्लोक पढ़ते ये है चिन्मय विद्या पीठ के छात्र जो गीता प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत गीता के प्रशिक्षित शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे है। गीता की इस क्लास में उम्र का कोई बंधन नहीं जहां 5 साल के लेकर 70 के वयोवृध्द तक इस कोर्स को कर रहे है। इस कोर्स में भाग ले रहे 5 साल का अर्नव झा और 10 साल की जहानविक गुलाटी जब फर्राटे से गीता के श्लोक सुनाती हैं तो सुनने वाला भी हैरान रह जाता है। वही 70 साल के वृद्द भी इस क्लास में स्कूल के विद्यार्थी की तरह उम्र को मात दे रहे है।
क्या है संस्था के इस प्रशिक्षण में
गीता प्रशिक्षण का अभियान चला रही संस्था चिन्मय विद्यापीठ के संरक्षक आचार्य हितैष चैतन्य का कहना है कि समाज में धर्म ,संप्रदाय ,कर्मकाण्ड ,सिद्धियां ,चमत्कार ,आत्मा-परमात्मा आदि के संदर्भ में स्पष्ट समझ नहीं होने के कारण व्यक्ति और समाज धोखाधड़ी तथा अशांति का शिकार बन रहे हैं। चिन्मय विद्या पीठ की मान्यता है कि इन विषयों का ठीक-ठीक ज्ञान नहीं होने के कारण ही भ्रमजाल फैला हुआ है। इसलिए इन विषयों की शिक्षा अनिवार्य है।

उनका कहना है की ये सभी विषय मूलतः अध्यात्म विद्या से जुड़े हुए हैं अतः केवल विज्ञान की शिक्षा से काम नहीं चलेगा। अध्यात्म की शिक्षा-व्यवस्था तथा शोध करना जरुरी है। संस्था के निशुल्क प्रशिक्षण में इस वर्ष प्रथम अध्याय के श्लोकों का अध्ययन कराया जा रहा है। प्रथम प्रशिक्षण अभियान 25 फरवरी से 11 जून तक चल रहा है। यह अभियान 4 चरणों में होगा। 2017 से 2034 तक 18 वर्षों में गीता के संपूर्ण 18 अध्याय होंगे। अगले वर्ष के कार्यक्रम द्वितीय अध्याय पर केंद्रित होंगे।

प्रशिक्षण अभियान की विशेषता
इस प्रशिक्षण अभियान की ख़ास विशेषता यह भी है कि संस्था का अपने विद्यार्थी को साफ़ कहती है की गीता के अध्ययन के लिए संस्कृत भाषा का ज्ञान जरूरी नहीं। क्योंकि संस्था ये मानती है कि गीता का अध्ययन ज्यादातर लोग इसलिए नहीं करते की उन्हें लगता है कि गीता पढ़ने के लिए संस्कृत का ज्ञान होना आवशयक है। संस्था का उद्देश्य गीता के ज्ञान को आमजन तक आसानी से पहुचाने का है और कम समय में ही संस्था ने अपने कोर्स के लिए सैकड़ों रजिस्ट्रेशन कर लिए है।

ये भी पढ़ें

यह भी पढ़े :
अपने विवाह के सपने को भारत मैट्रीमोनी पर साकार करे।- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन करे!
LIVE CRICKET SCORE
Patrika.com

लेटेस्ट ख़बरें ई-मेल पर पाने के लिए सब्सक्राइब करें

Dus ka Dum
Ad Block is Banned Click here to refresh the page

???? ??????? ?? ??? ???? ????? ???