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अस्पतालों में नहीं आग से निपटने के इंतजाम

Updated: IST rewa news
स्वास्थ्य विभाग ने कभी नहीं की मॉनीटरिंग, शार्ट सर्किट से कभी भी हो सकता है हादसा

रीवा। देश के कई हिस्सों में दो दिन के भीतर हुई आगजनी की घटनाओं ने शहर के भीतर सुरक्षा के इंतजामों पर सवाल खड़ा कर दिया है। लगातार बड़ी इमारतें तो खड़ी की जा रही हैं लेकिन उनमें आगजनी से सुरक्षा के कोई खास इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। पूर्व में हुई कुछ घटनाओं के बाद भी हालात जस के तस हैं। शहर में कईबड़े शापिंग काम्पलेक्स ने अब तक फायर की एनओसी नहीं ली है। अस्पतालों में भी व्यवस्था बदतर है। सौ बेड के कुशाभाऊ ठाकरे जिला अस्पताल में शार्ट सर्किट से उठने वाली आग की लपटों से निपटने के लिए कोई इंतजाम नहीं है। फायर फाइटिंग सिस्टम की ऑटोमेटिक लाइन तो छोडि़ए, आग बुझाने के सिलेंडर तक नहीं हैं।

अस्पताल में नवजात शिशुओं की 20 बेड की एसएनसीयू, 40 बेड की मैटरनिटी विंग हैं। जहां वार्मर, वेंटीलेकर से लेकर अन्य अत्याधुनिक उपकरण जो विद्युत से चलते हैं। वहीं अस्पताल में नेत्र ओटी, इमरजेंसी ओटी, ट्रॉमा सेंटर भी हैं। जहां पर ऑपरेशन को अंजाम दिया जाता है। गौर करने वाली बात ये है कि जिला अस्पताल के सेकेंंड फ्लोर पर निर्माण चल रहा है। जिससे शार्ट सर्किट होने का खतरा अधिक है। लेकिन वल्लभ भवन से दिशा-निर्देश देने वाले आला अधिकारियों को यह कमी आज तक नजर नहीं आई है। इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. अनंत मिश्रा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि यह काम शासन का है। शासन ने फायर फाइटिंग सिस्टम स्थापित करने के लिए कोई बजट अलाट नहीं किया है। इसमें कोई संदेह नहीं कि मरीज हों या फिर कार्यरत स्टॉफ, सभी रिस्क पर हैं।

विंध्य के सबसे बड़े अस्पताल का हाल

जीएमएच

यहां पर लापरवाही की सारी हदें पार हैं। रसोई घर में आग जलाने के लिए 16 गैस सिलेंडर हैं लेकिन आग बुझाने वाले तीन सिलेंडर पड़े हैं, वो भी खाली हैं, इसके अलावा पीआईसीयू, एसएनसीयू, बच्चों के वार्ड में फायर फाइटिंग सिस्टम धूल फांक रहा है।

एसजीएमएच

चार मंजिला भवन में फायर फाइटिंग सिस्टम तो मौजूद है लेकिन उपयोगी नहीं। कहीं सिलेंडर से पाइप हटी हुई है तो कहीं पर सिलेंडर खाली हैं। मेडिसिन विभाग की आईसीसीयू के सिलेंडरों पर धूल जमा है। जो दर्शाती है कि इनकी मानीटरिंग नहीं हो रही है। जबकि फायर फाइटिंग सिस्टम की व्यवस्था ठेके पर है।

घटनाओं से नहीं ले रहे सबक

तीन साल पहले सतना जिला अस्पताल की एसएनसीयू में शार्ट सर्किट से आग लगी थी। इसी साल जीएमएच में ईएनटी विभाग में शार्ट सर्किट से आग लगी थी। कुछ माह पहले ही मुरैना के जिला अस्पताल में शार्ट सर्किट से बड़ा हादसा हुआ था। ये हादसे प्रदेश के अस्पतालों में हुए फिर शासन ने फायर फाइटिंग सिस्टम को मजबूत नहीं किया। अब सोमवार 16 अक्टूबर को भुवनेश्वर के निजी अस्पताल में शार्ट सर्किट से लगी आग से हुई 24 मौतों ने सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों, परिजनों और कार्यरत स्टॉफ को झकझोर दिया है।

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