Patrika Hindi News

Photo Icon हायर एजुकेशन से भी महंगी हो गई नर्सरी की पढ़ाई

Updated: IST rewa news
एक शैक्षणिक सत्र में अभिभावकों पर पड़ रहा हजारों रुपए का आर्थिक भार, उसके एक तिहाई फीस में उच्च शिक्षा में पूरे एक पाठ्यक्रम की पढ़ाई पूरी हो जाएगी।

रीवा हनुमान की पूंछ की तरह बढ़ रही निजी स्कूलों की फीस ने अभिभावकों का पसीना छुड़ा दिया है। उनके लिए बच्चे की स्कूली शिक्षा दिलाना उच्च शिक्षा दिलाने से भी अधिक भारी पड़ रहा है। स्कूल में प्रवेश से लेकर एक वर्ष की पढ़ाई में अभिभावकों को जितना आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। उसके एक तिहाई फीस में उच्च शिक्षा में पूरे एक पाठ्यक्रम की पढ़ाई पूरी हो जाएगी।

शहर में एक निजी उच्च शिक्षा संस्थान संचालित करने वाले कॉलेज संचालक बीएन त्रिपाठी बताते हैं कि उनका बच्चा शहर के एक निजी स्कूल में पढ़ाई करता है। बच्चे की एक साल वे जितनी फीस भरते हैं। उसके करीब एक तिहाई रकम में छात्र उनके कॉलेज से बीएससी कंप्यूटर साइंस व बीएससी बायोटेक्नोलॉजी जैसे कोर्स की पूरी पढ़ाई कर लेते हैं। शासकीय कॉलेज में उच्च शिक्षा में इससे भी कम फीस लगती है।

रोकने वाला नहीं है कोई

स्कूलों द्वारा मनमाने तरीके से बढ़ाईजा रही फीस पर रोक लगाने वाला कोई नहीं है। नतीजा स्कूल संचालक बेलगाम हो गए हैं। बढ़ रही फीस पर न ही जिला प्रशासन के अधिकारी पूछताछ की जरूरत समझ रहे हैं और न ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा गौर फरमाने की जरूरत समझी जा रही है। नतीजा अभिभावकों पर प्रतिवर्ष बच्चों की पढ़ाई का आर्थिक बोझ बढ़ता ही जा रही है।

ऐसे समझिए उच्च शिक्षा व स्कूल की पढ़ाई का अंतर

मद स्कूल शिक्षा स्नातक स्तर

प्रवेश शुल्क 10 से 12 हजार प्रतिवर्ष 3000 रुपए तीन वर्ष का

मासिक शुल्क 25 से 40 हजार प्रतिवर्ष 12 हजार रुपए प्रतिवर्ष

किताब खर्च 8 से 10 हजार प्रतिवर्ष 4 से 6 हजार रु. प्रतिवर्ष

(स्कूल शिक्षा में कक्षा पांचवीं व उच्च शिक्षा में बीएससी कंप्यूटर व बायोटेक्नोलॉजी की फीस अंकित है।)

यह भी पढ़े :
अपने विवाह के सपने को सपने भारत मैट्रीमोनी से साकार करे।- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन करे!
Patrika.com

लेटेस्ट ख़बरें ई-मेल पर पाने के लिए सब्सक्राइब करें

Dus ka Dum
Ad Block is Banned Click here to refresh the page

???? ??????? ?? ??? ???? ????? ???