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आखिर क्यों : पीएचई से छीना नदी संरक्षण का प्रोजेक्ट 

Updated: IST rewa news
चार साल से चल रहे कार्य को समय पर नहीं किया जा सका पूरा

रीवा। बीहर नदी संरक्षण के लिए शुरू किए गए प्रोजेक्ट का काम समय पर पूरा नहीं किए जाने के चलते अब पीएचई से यह छिन जाएगा। शासन ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि अब यह कार्य नगर निगम द्वारा कराया जाएगा, पीएचई के अधिकारियों को निर्देशित किया गया हैकि प्रोजेक्ट में अब तक हुए कार्य को निगम के हैंडओवर किया जाए। बीहर नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए सरकार ने 29 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट स्वीकृत किया था। जिसमें करीब पांच करोड़ रुपए की लागत से नगर निगम ने नदी में घाट और सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया।

इसी प्रोजेक्ट में सीवर ट्रेटमेंट प्लांट और नालों से निकलने वाले दूषित पानी को प्लांट तक पहुंचाने के लिए नाला ट्रेप कर तीन पंपिंग स्टेशन और 5350 मीटर ग्रेवटी पाइप लाइन भी बिछाई जानी थी। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों ने इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के सुपरवीजन में उदासीनता बरती जिसके चलते समय पर निर्माण पूरा नहीं हो सका। जयंतीकुंज में बीहर नदी के किनारे ट्रीटमेंट प्लांट तो निर्मित हो गया है लेकिन अन्य कार्य अधूरे छोड़ दिए गए हैं। इस प्रोजेक्ट को अब नगर निगम अमृत योजना में समाहित कर कार्य पूरा कराएगा।

दो कंपनियों ने छोड़ा काम

एसटीपी निर्माण और उस तक लाइन जोडऩे का कार्य जेआईटीएफ वाटर इंफ्रास्ट्रक्चर नई दिल्ली को आवंटित किया गया था। जिसने एसटीपी का काम तो पूरा कर दिया और करीब 13 करोड़ रुपए का भुगतान भी ले लिया। इस दौरान शिकायतें हुई और उसने काम की रफ्तार घटा दी, जिसके चलते पीएचईने अनुबंध निरस्त कर दिया। इसके बाद गोंडवाना इंजीनियर्स लिमिटेड को काम सौंपा गया। जिसने झिरिया, बाबाघाट और चुनहाई कुंआ में पंपिंग स्टेशन का निर्माण शुरू कराया था। जिसमें झिरिया में कुंए का काम आधा पूरा भी हो चुका था। इस बीच समय की बाध्यता निर्धारित किए जाने के चलते उसने भी कार्य छोड़ दिया। शासन ने इस प्रोजेक्ट को अमृत मिशन के 172.25 करोड़ रुपए के सीवरेज ट्रीटमेंट प्रोजेक्ट में जोड़ दिया।

लागत बढ़ी फिर भी नहीं कर पाए कार्य

बीहर नदी संरक्षण के लिए 29 करोड़ की योजना में 24 करोड़ का कार्य पीएचई को सौंपा गया था। लगातार ठेका कंपनियों द्वारा कार्य समय पर पूरा नहीं करने और महंगाई का हवाला देकर छोडऩे के कारण पीएचई के प्रस्ताव पर ही इसकी लागत 35 करोड़ रुपए कर दी गईथी। अभी पीएचई के अधिकारियों ने प्रोजेक्ट को निगम के हवाले नहीं किया है जिसके चलते यह स्पष्टनहीं हो पाया है कि कितनी राशि कहां खर्च हुई है।

नए सिरे से सर्वे का कार्य शुरू

अमृत योजना के तहत सीवरेज ट्रीटमेंट की पूरी व्यवस्था का ठेका दिल्ली की केके स्पन नाम की कंपनी को मिला है। कंपनी के इंजीनियर रीवा पहुंच कर सर्वे का कार्य शुरू कर दिए हैं। अनुबंध की कार्रवाई भी निगम द्वारा की जा रही है। कंपनी की ओर से आए वीके मित्तल ने बताया हैकि सीवर लाइन को ट्रीटमेंट प्लांट तक ले जाने के लिए जो पाइप उपयोग की जाएगी उसका निर्माण वह रीवा में ही कराएंगे ताकि समय पर कार्य पूरा किया जा सके। उन्होंने कहा कि निगम अधिकारियों को अपनी कार्ययोजना बता दी है, जल्द ही कार्यप्रारंभ कर दिया जाएगा। इस प्रोजेक्ट में बीहर नदी संरक्षण का एसटीपी भी शामिल किया जाएगा।

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