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बिना अंकसूची कॉलेजों में ले सकेंगे प्रवेश, जानिए कब और कैसे?

Updated: IST APS University Rewa.
विश्वविद्यालयों की लापरवाही के चलते उच्च शिक्षा विभाग को प्रोविजनल प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के मामले में बैकफुट पर आना पड़ा है।

रीवा। स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आवेदन करने वाले उन छात्रों के लिए राहत भरी खबर है, जिनके पास छठवें या पांचवें सेमेस्टर की अंकसूची नहीं है। प्रवेश तिथि आने तक अंकसूची नहीं होने के बावजूद छात्रों को प्रोविजनल प्रवेश दिया जाएगा।

विश्वविद्यालयों की लापरवाही के चलते उच्च शिक्षा विभाग को प्रोविजनल प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के मामले में बैकफुट पर आना पड़ा है। विभाग के प्रमुख सचिव आशीष उपाध्याय ने अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय सहित अन्य विश्वविद्यालयों को 30 जून तक सभी लंबित परीक्षा परिणाम घोषित कर देने का निर्देश जारी किया था। लंबित परिणामों को जारी करने का निर्देश प्रोविजनल प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की योजना के मद्देनजर रहा है।

विवि में भी लंबित सैकड़ों अंकसूची

बिना अंकसूची के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रोविजनल प्रवेश पर प्रतिबंध नहीं लगने से यहां एपीएस विवि के भी सैकड़ों छात्रों को राहत मिली है। दरअसल वर्तमान में स्नातक स्तर के ढाई सौ से अधिक छात्रों की अंकसूची लंबित है। मई में अंकसूची से संबंधित लंबित प्रकरणों के निस्तारण का निर्देश जारी करने और एक महीने की मोहलत देने के बावजूद अधिकारी शत-प्रतिशत मामलों का निस्तारण नहीं कर सके हैं।

विवि में ज्यादातर प्रवेश प्रोविजनल

एपीएस विवि के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में दूसरे चरण तक ज्यादातर छात्रों को प्रोविजनल प्रवेश ही मिलेगा, क्योंकि लेटलतीफी शुरू हुई परीक्षा और मूल्यांकन कार्य को देखते हुए नहीं लगता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन जुलाई के पहले सप्ताह तक चलने वाले दूसरे चरण के प्रवेश प्रक्रिया तक स्नातक स्तर का परीक्षा परिणाम जारी कर सकेगा। छात्रों को चौथे सेमेस्टर की अंकसूची के आधार भी प्रवेश मिलेगा।

स्नातक में भी प्रोविजनल प्रवेश

स्नातकोत्तर की तरह ही स्नातक स्तर के पाठ्यक्रमों में भी छात्रों को अंकसूची के अभाव में प्रोविजनल प्रवेश दिया जाएगा। छात्र बाद में उत्तीर्ण की अंकसूची शामिल कर सकेंगे। अंकसूची प्रस्तुत नहीं करने पर छात्र का प्रवेश निरस्त कर दिया जाएगा। ऐसे में कॉलेजों की एक सीट खाली रह जाएगी। विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में सीट खाली न हो, इसी उद्देश्य को लेकर उच्च शिक्षा विभाग ने प्रोविजनल प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की योजना बनाई थी।

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