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गंदगी के बीच बच्चों को परोस रहे भोजन, बीमार हो जाएंगे तो कौन होगा जिम्मेदार?

Updated: IST sagar
बीना.ग्रामीण क्षेत्रों में मध्यान्ह भोजन वितरण के हालात सुधरते नजर नहीं आ रहे हैं और हालत दिन प्रतिदिन बदतर होते जा रहे हैं।

मीनू अनुसार तो भोजन कहीं मिलता ही नहीं, इसके अलावा बच्चों को स्वच्छ जगह भी बैठने के लिए नहीं मिलती है, जिससे बच्चे गंदगी के बीच बैठकर भोजन करते हैं। गंदगी के बीच भोजन करने से किसी दिन विद्यार्थी बीमारियों की चपेट में भी आ सकते हैं।
मिडिल स्कूल पड़रिया में विद्यार्थी जब भोजन करते हैं तो नजारा कुछ और ही होता है। विद्यार्थियों को स्कूल भवन में नहीं बैठाया जाता है। विद्यार्थी स्कूल के सामने पड़े खुले मैदान में बैठकर भोजन करते हैं, जहां गंदगी फैली रहती है। यहां तक कि नाली के बाजू से भी विद्यार्थी बैठे रहते हैं। विद्यार्थियों को बैठाने के लिए कोई जगह चिन्हित नहीं है। शिक्षकों की लापरवाही का खामियाजा किसी दिन किसी विद्यार्थी को भुगतना पड़ेगा।
घूमते रहते हैं आवारा मवेशी
मध्यान्ह भोजन अतिरिक्त कक्ष में बनाया जाता है। क्योंकि किचन शेड जर्जर हो चुका है। जिस जगह खाना बनता है वहां आवारा मवेशी घूमते रहते हैं और यह विद्यार्थियों के बाजू से बैठते हैं, जिससे किसी दिन यह मवेशी विद्यार्थियों को भी घायल कर सकते हैं।
माह में कई दिन नहीं मिलता भोजन
प्राथमिक स्कूल गोदना का निरीक्षण गुरुवार को बीएसी आनंद दुबे द्वारा किया गया। उन्होंने मध्यान्ह भोजन की स्थिति भी देखी। जिसमें सरस्वती स्व-सहायता समूह द्वारा विद्यार्थियों को दो-दो रोटी, मूंग और अरहर की मिक्स दाल वितरित की गई। जबकि गुरूवार को पकोड़ों वाली कड़ी और सब्जी वाला पुलाव मीनू अनुसार दिया जाना था। यहां कभी भी मीनू अनुसार भोजन नहीं दिया जाता है। फरवरी माह में कई दिन तो भोजन भी वितरित नहीं किया गया। इसी तरह पिछले महिनों में भी मध्यान्ह भोजन कई दिनों तक वितरित नहीं किया गया है। पंचनामा तैयार कर कार्रवाई के लिए एसडीएम के यहां प्रस्तुत किया जाएगा।
इधर, भोजन ही नहीं बनाया, भूखे लौटे विद्यार्थी
मंडीबामोरा में कुरवाई के सलेतरा शासकीय प्राथमिक स्कूल और आंगनबाड़ी में गुरुवार को बच्चों को भूखा रहना पड़ा। भूखे बच्चे वापस घर लौट गए, क्योंकि भोजन बनाने वाले खेत में काम करने गए थे।
सलेतरा के स्कूल भवन में ही आंगनबाड़ी और स्कूल दोनों संचालित हैं। यहां आंगनबाड़ी में दर्ज 27 बच्चों में करीब पांच बच्चे ही मौजूद थे। भोजन मिलने के संबंध में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता चंद्रवती और सहायिका ममता लोधी ने बताया कि आज भोजन नहीं मिला है, क्योंकि भोजन बनाने वाली महिलाएं खेत गई हंै। बच्चों को पैकेट बन्द पोषण आहार भी इस माह बटा ही नहीं है और केन्द्र पर पोषण आहार नहीं है। स्कूल प्रभारी रियाज ने बताया कि वहां भी मध्यान्ह भोजन वितरित नहीं हुआ है।
दो बच्चे गंभीर कुपोषित मिले
आगंनबाड़ी की कार्यकर्ता ने बताया कि गांव के दो बच्चे अत्यंत कम वजन के गंभीर कुपोषित हैं। इनमें से एक सुमित ढाई साल का और तीन माह की गुड्डी है। यहां स्वच्छता के अभियान की भी पोल खुल रही है। स्कूल और आंगनबाड़ी के द्वार पर ऐसी गंदगी फैली हुई है कि आने-जाने से भी बच्चे कतराते हैं।

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