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शिक्षकों के स्वीकृत पदों के हिसाब से 10 फीसदी गेस्ट फैक्टल्टी ही नियुक्त कर सकता है विवि

Updated: IST
-यूजीसी ने विवि प्रशासन को जारी किया पत्र, अतिरिक्त अतिथि विद्वानों को हटाने के दिए निर्देश

आकाश तिवारी@ सागर. डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विवि में अब सिर्फ दस फीसदी अतिथि विद्वान सेवा में रहेंगे। इससे अतिरिक्त अतिथि विद्वानों को विवि प्रशासन को बाहर करना होगा। यह आदेश यूजीसी ने जारी किया है। आदेश के अनुसार विवि में कुल स्वीकृत असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के स्थाई पदों के हिसाब से सिर्फ दस फीसदी अतिथि विद्वान रख सकते हैं। यूजीसी ने निर्देशों का जल्द पालन कर सूचित करने को कहा है। वर्तमान में विवि में 35 से अधिक अतिथि विद्वान हैं। एेसे में अब इन अतिथि विद्वानों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है।

-आदेश बन सकता है विवि की परेशानी

विवि में एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के रिक्त पदों पर नियम विरुद्ध असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्तियां हुई हैं। यह मामला हाईकोर्ट में भी चल रहा है। विवि प्रशासन ने 22 में से 11 असिस्टेंट प्रोफेसर को बर्खास्त भी किया है। विवि में खाली पड़े पदों पर अतिथि विद्वानों की नियुक्तियां की गई हैं। जानकारी के मुताबिक, विवि में 345 स्थाई पद स्वीकृत हैं। साथ ही 70 अतिथि विद्वान अभी विवि में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। यूजीसी के आदेश पर नजर डालें तो विवि को 345 पद के हिसाब से दस फीसदी यानी 35 अतिथि विद्वान ही रखे जाना है।

-यूजीसी से आदेश शिथिल करने की मांग

विवि प्रशासन ने यूजीसी के आदेश को शिथिल करने की मांग की है। करीब 15 दिन पहले आए इस आदेश के बाद विवि कुलपति प्रो. आरपी तिवारी ने यूजीसी के अधिकारियों से मुलाकात भी की है। साथ ही यूजीसी को पत्र भी लिखा है। विवि ने यूजीसी से कहा है कि दस फीसदी अतिथि विद्वानों के लागू करने के नियम में रियायत दी जाए। उन्होंने 69 अतिथि विद्वान रखने की मांग की है। साथ ही नियुक्तियों में गड़बडि़यों का हवाला भी दिया है।

एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के पदों पर नियम विरुद्ध असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्तियां हुई हैं। इससे अतिथि विद्वानों की जरूरत है। हमने यूजीसी को पत्र लिखकर 69 पद भरने की अनुमति मांगी है। यूजीसी के अधिकारियों से भी इसी संबंध में मुलाकात की है।

-प्रो. आरपी तिवारी, कुलपति, विवि

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