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चिकनपॉक्स पीडि़त मासूम को लिए भटकते रहे परिजन, भर्ती से इनकार

Updated: IST Chickenpox victims strayed for innocent, refusal t
दोनों चिकित्सा संस्थान मरीजों की अनदेखी कर रहे हैं। ऐसे में मरीज अस्पतालों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। मर्ज लाइलाज होने ओर जान खतरे में पडऩे की आशंका से परिजनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

सागर. जिले में बढ़ रही चिकन पॉक्स पीडि़तों की संख्या के बावजूद स्वास्थ्य अमला रोकथाम को लेकर गंभीर नहीं है। स्थिति यह है कि चिकनपॉक्स की गंभीरता को न समझते हुए मरीजों को जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में भर्ती नहीं किया जा रहा है। दोनों चिकित्सा संस्थान मरीजों की अनदेखी कर रहे हैं। ऐसे में मरीज अस्पतालों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। मर्ज लाइलाज होने ओर जान खतरे में पडऩे की आशंका से परिजनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

शनिवार को चिकनपॉक्स को लेकर बीएमसी व जिला अस्पताल की अनदेखी की हकीकत तब सामने आई जब प्रभारी सीएमएचओ द्वारा एम्बुलेंस से पहुंचाई गई शाहगढ़ निवासी चिकनपॉक्स पीडि़ता को ही भर्ती नहीं किया गया। परिजन जब बच्ची को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे तो उसे बीएमसी जाने की सलाह दी गई और जब बीएमसी ले गए तो वहां से बैरंग वापस लौटा दिया। परिजन जिला अस्पताल और बीएमसी के जिम्मेदारों की इसी मनमानी के कारण घंटे भर तक यहां से वहां पीडि़त बालिका को लेकर भटकते रहे। परेशान परिजनों की शिकायत पर सीएमएचओ ने स्वयं सिविल सर्जन डॉ. आईएस ठाकुर से चर्चा की, तब कहीं बालिका को जिला अस्पताल में भर्ती किया गया।

एम्बुलेंस जब शाहगढ़ अंचल से छह साल की पूजा को लेकर जिला अस्पताल पहुंची, तो ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने उपचार सुविधा न होने की बात कहकर भर्ती करने से इनकार कर दिया। अस्पताल के कर्मचारी के कहने पर परिजन पूजा को बीएमसी ले गए, लेकिन वहां से भी चिकनपॉक्स का इलाज नहीं करने की बात कहकर लौटा दिया गया। बच्ची की बिगड़ती हालत से परेशान परिजन दोबारा जिला अस्पताल पहुंचे, तो उन्हें डपट दिया गया। अंत में परिजनों ने शाहगढ़ के एक राजनीतिक पदाधिकारी को फोन पर अपनी व्यथा सुनाई। संबंधित नेता ने प्रभारी सीएमएचओ एमके सैनी को मेडिकल कॉलेज व जिला अस्पताल की शिकायत की। प्रभारी सीएमएचओ ने स्वयं एम्बुलेंस बुलाकर भेजी गई बालिका को भर्ती करने से इनकार करने की बात सिविल सर्जन डॉ. आईएस ठाकुर को बताई। उनके द्वारा निर्देशित करने के बाद सिविल सर्जन ने तुरंत व्यवस्था की और तब कहीं छह साल की पूजा को अस्पताल में जगह मिल सकी।

जिला अस्पताल में नहीं महामारी कक्ष

एक ओर खसरा, चिकनपॉक्स जैसी बीमारियों और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग कई अभियान चलाकर जनजागरण में लगा है। कई टीमों को ग्रामीण अंचल में बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए सक्रिय किया गया है, लेकिन अब तक जिला अस्पताल में इन बीमारियों के उपचार की व्यवस्था नहीं की गई है। इसी वजह से प्रभारी सीएमएचओ द्वारा भेजी गई पूजा को भर्ती होने के लिए चक्कर काटने पड़े।

कहा-बाजार से खरीदकर लाओ दवा

पूजा के पिता का कहना है कि पूजा को भर्ती करने के बाद जिला अस्पताल में दवाओं का टोटा बताया गया। कहा गया जो दवा पूजा को दी जानी है, वह मौजूद नहीं हैं, इसलिए बाजार से खरीदकर लाओ। जब ग्रामीण ने सीएमएचओ को इसके बारे में दोबारा शिकायत की तब उनके निर्देश पर ग्रामीण बालिका को जिला अस्पताल प्रबंधन द्वारा नि:शुल्क दवाएं उपलब्ध करा दी गईं।

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