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रिश्वत मामले में लोकायुक्त निरीक्षक को कोर्ट ने लगाई फटकार, केस डायरी की वापस

Updated: IST Court reprimand to the inspector in bribery case,
कोर्ट ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि आवेदन के जरिए यह परिलक्षित होता है कि जानबूझकर उसे मामले से अलग कर बतौर साक्षी प्रकरण में बनाए जाने का प्रयास किया जा रहा है, जो दुर्भावनापूर्ण है।

सागर. लोकायुक्त निरीक्षक द्वारा सहअभियुक्त को सरकारी गवाह बनाने के लिए कोर्ट में आवेदन प्रस्तुत करना भारी पड़ गया। कोर्ट ने मामले में उन्हें फटकार लगाई है। साथ ही कोर्ट ने जांच पश्चात सहअभियुक्त को भी बराबर का दोषी पाया है।
कोर्ट ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि आवेदन के जरिए यह परिलक्षित होता है कि जानबूझकर उसे मामले से अलग कर बतौर साक्षी प्रकरण में बनाए जाने का प्रयास किया जा रहा है, जो दुर्भावनापूर्ण है।

रिश्वत मामले में यह आवेदन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रामविलाश गुप्ता की कोर्ट में प्रस्तुत किया गया था। कोर्ट ने फटकार लगाते हुए आवेदन खारिज करने के सााथ केस डायरी भी वापस भेज दी है। पुलिस ने सहआरोपी को सरकारी गवाह बनाने की धारा 164 के तहत बयान कराने के लिए कोर्ट में आवेदन किया था।

जानकारी के अनुसार रिश्वत लेने के मामले में पिछले साल लोकायुक्त पुलिस ने देवरी जनपद पंचायत कार्यालय में पदस्थ कंप्यूटर ऑपरेटर आशीष अरेले और सिमरिया हर्राखेड़ा पंचायत के ग्राम रोजगार सहायक को रंगे हाथ पकड़ा था। टीम ने इस मामले में कंप्यूटर ऑपरेटर को सह आरोपी बनाया था।

लोकायुक्त कार्यालय के निरीक्षक वीएस परस्ते ने 14 फरवरी को कोर्ट में आवेदन पेश किया। निरीक्षक का तर्क था कि विवेचना के दौरान कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले हैं। इसलिए उसे सरकारी गवाह बनाकर बयान दर्ज किए जाएं। कोर्ट से तारीख तय करने की मांग की थी।

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