Patrika Hindi News

> > > > experts find the main reason of thunderstorm this amazing rock attract thunderstorm

यहां गिरती है देश में सबसे ज्यादा आसमानी बिजली, ज़मीन में छुपा है इसका राज

Updated: IST experts find the main reason of thunderstorm, amaz
बुधवार को ही छतरपुर और सागर जिले में सात लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद पत्रिका ने जब विशेषज्ञों से बातचीत कर पड़ताल की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

आकाश [email protected]बुंदेलखंड में आसमानी आफतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बीते आठ दिनों में सागर संभाग के पांच जिलों में डेढ़ दर्जन लोगों की आसमानी बिजली के कारण मौत हो चुकी है। बुधवार को ही छतरपुर और सागर जिले में सात लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद पत्रिका ने जब विशेषज्ञों से बातचीत कर पड़ताल की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जाने क्यों गिरती है आसमानी बिजली....

यहां गिरती है सबसे ज्यादा बिजली
एक्सपर्ट बताते हैं कि प्रदेश में सबसे अधिक बिजली गिरने की घटनाएं बुंदेलखंड क्षेत्र में ही होती हैं। उनका कहना है, आयरन तत्व आसमानी बिजली को सबसे ज्यादा अपनी ओर खींचता है और बुंदेलखंड के अधिकांश हिस्सों में 'बेसाल्ट रॉक' की सतह है, जिसमें 30 फीसदी आयरन मिला हुआ है। इसी की वजह से यहां सबसे ज्यादा गाज गिरने की घटनाएं सामने आती हैं।

क्या है बेसाल्ट रॉक
बेसाल्ट या बसाल्ट एक प्रकार की बहिर्भेदी (ज्वालामुखीय) आग्नेय चट्टान होती है। इसका निर्माण ज्वालामुखी के फटने से निकले हुए मैग्मा और लावा के जमने से होता है। चट्टान परतदार नहीं होती है न इनमें जीवाश्म होते है। इसी कारण यह कणविहीन या गैर-रवेदार रूप में पायी जाती है। बुंदेलखंड के छतरपुर और पन्ना जिले में यह बहुतायत में है। साथ ही इसमें लोहा (आयरन), निकिल, सोना, शीशा, प्लेटिनम भरपूर मात्रा में पाया जाता है। साथ ही इस चट्टान के टूटने से ही काली मिट्टी का निर्माण होता है। हांलाकि यह प्रक्रिया वर्षों लंबी होती है।

MUST READ: बीएमसी ने पेश की मिसाल, पैर आ गया था बाहर, नर्सों ने 20 मिनट में वाहन में कराया प्रसव

पांच साल ऐसे...
पांच सालों में बुंदेलखंड के छतरपुर, दमोह, सागर और टीकमगढ़ में 265 लोगों की बिजली गिरने के कारण मौत हो गई। सबसे ज्यादा लोग छतरपुर जिले में आसमानी आफत के शिकार हुए।
- छतरपुर 80
- दमोह 70
- टीकमगढ़ 55
- सागर 35

...तो ऐसे गिरती है बिजली
गरजदार हवा-पानी के दौरान बिजली पैदा होती है। बादल जब आसमान में ऊंचाई पर होते हैं, तब टेम्प्रेचर बहुत कम होता है। उसी दौरान आधे जमे पानी के कणों का घनात्मक और ऋणात्मक चार्ज बदलने लगता है। इससे ये आपस में टकराते हैं और चिंगारी पैदा करते हैं। आसमान में हर सेकंड 1800 से 2000 बादलों की गर्जना होती है। यह 10 करोड़ वोल्ट तक की हो सकती है। आकाश से बिजली पृथ्वी पर 22,400 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गिरती है।

घर में एेसे करें बचाव
- जब आप घर के भीतर हों तो बिजली से संचालित उपकरणों से दूर रहें।
- तार वाले टेलीफोन का उपयोग न करें।
- खिड़कियां व दरवाजे बंद कर दें, बरामदे और छत से दूर रहें।
- इसके अलावा ऐसी वस्तुएं जो बिजली के सुचालक हैं उनसे भी दूर रहना चाहिए।
- धातु से बने पाइप, नल, फव्वारा, वाश बेसिन आदि के संपर्क से दूर रहना चाहिए।

बाहर इनसे रहें दूर
- वृक्ष बिजली को आकर्षित करते हैं। बिजली चमकते समय वृक्ष के नीचे न खड़े रहें।
- ऊंची इमारतों वाले क्षेत्र में आश्रय न लें और समूह में भी न खड़े हों।
- किसी मकान में आश्रय लेना बेहतर है।
- सफर के दौरान अपने वाहन में ही रहें। मजबूत छत वाले वाहन में रहें।
- बाहर रहने पर धातु से बने वस्तुओं का उपयोग न करें।

बुंदेलखंड के अधिकांश हिस्से में बेसाल्ट सेल की सतह है। इनमें आयरन 30 फीसदी होने के कारण आकाशीय बिजली यहां आकर्षित होती है। लोगों के चपेट में आने का दूसरा बड़ा कारण जनसंख्या का बढऩा भी है। बसाहट अधिक होने से बिजली की चपेट में भी लोग आ रहे हैं।
प्रो. पीके कठल, भू-गर्भ शास्त्री, विवि

यह भी पढ़े :
अपने विवाह के सपने को सपने भारत मैट्रीमोनी से साकार करे।- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन करे!
Patrika.com

लेटेस्ट ख़बरें ई-मेल पर पाने के लिए सब्सक्राइब करें

Dus ka Dum
Ad Block is Banned Click here to refresh the page

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करे