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दिव्यांग बेटी ने दी पिता को मुखाग्रि, दूसरी ने कांधा

Updated: IST handicap daughter, girls do rituals like son, girl
अंतिम संस्कार में तीन बहनों में सबसे छोटी डॉ.सपना ने पिता की चिता को मुखाग्रि दी। सपना बचपन से ही दिव्यांग हैं। वहीं बड़ी बेटी नमीता ने अर्थी को कांधा दिया।

सागर.समाज की कुरीतियों से परे एक दिव्यांग बेटी ने गुरुवार को अपने पिता को मुखाग्रि दी, जबकि दूसरी बेटी ने पिता की अर्थी को कांधा लगाने के साथ ही सारी रश्में निभाई। यह नजारा जिसने भी देखा उसकी आंखों भर आईं। मकरोनिया नपा के वार्ड क्रमांक 6 स्थित सद्भावना नगर कॉलोनी में रहने वाले एसबीआई के रिटायर्ड मैनेजर बीके सिंह का गुरुवार को हृदयाघात से निधन हो गया। तीन बेटियों के पिता को जब कांधा देने की बारी आई तो बेटियों ने ही इसका बीड़ा उठाया और पूरे रश्मों-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया।

अंतिम संस्कार में तीन बहनों में सबसे छोटी डॉ.सपना ने पिता की चिता को मुखाग्रि दी। सपना बचपन से ही दिव्यांग हैं। वहीं बड़ी बेटी नमीता ने अर्थी को कांधा दिया। सिंह की दूसरी बेटी गार्गी कोलकाता में हैं। गुरुवार को देर रात उनके सागर पहुंचने की उम्मीद है।

दिव्यांगों का इलाज करती हैं डॉ. सपना
पेशे से डॉक्टर 32 वर्षीय सपना स्पीच थेरेपिस्ट हैं। उन्होंने दिव्यांग होने के बाद स्पीच थैरेपी में महारत हासिल कर ठीक से बोल-सुन नहीं पाने वाले दिव्यांग बच्चों का इलाज करने में ही अपना जीवन लगा रखा है। पिता को बेटे की कमी का अहसास उन्होंने दिव्यांग होने के बाद भी नहीं होने दिया और जब पिता को मुखाग्रि देने का वक्त आया तो उन्होंने वह कर दिखाया जो समाज के हर व्यक्ति के लिए एक मिसाल है।

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