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UP Election 2017

यूपी चुनाव को लेकर दारूल उलूम देवबंद का बड़ा फरमान

Updated: IST Darul - Uloom Deoband
चुनाव से पहले देवबंद दारूल उलूम के माेहतमिम ने किया ये काम

देवबन्द. दुनियाभर के मुसलमानाें की आस्था के केंद्र दारुल उलूम देवबंद की चाैखट पर इस बार चुनावी माहाैल में सियासी दलाें के नुमाइंदे हाजरी नहीं लगा सकेंगे। दारूल उलूम ने देवबंद ने चुनावी नतीजाें तक किसी भी सियासी दल के बड़े नेता या फिर प्रतिनिधि से मुलाकात नहीं करने के संकेत दिए हैं।

दरअसल चुनावी माहाैल में सभी सियासी दलाें की मंशा रहती है कि वह दारूल उलूम में हाजरी लगाकर कुछ सियासी लाभ हासिल कर लें। इससे पहले कि एेसा हाे, संस्था ने विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज होने के साथ ही दारुल उलूम देवबंद के सभी दरवाजे सियासी जमातों के लिए बंद करने का मन बना लिया है। इसके पीछे इस्लामिक शिक्षा की इस संस्था काे सियासत से पूरी तरह अलग रखना ही कारण माना जा रहा है। दरअसल इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि उत्तर प्रदेश की अधिकांश विधानसभा सीटों पर विधायकाें काे चुनने में मुस्लिम मतदाताआें का भी अहम राेल हाेता है। यही कारण है कि मुस्लिम मतदताओं को रिझाने के लिए चुनाव से पहले हमेशा से ही सियासी जमातों के नुमाइंदे दारुल उलूम देवबंद का रुख करते रहे हैं। इतना ही नहीं कई सियासी जमातें उलेमा-ए-देवबंद का आशीर्वाद लेकर सरकार बनाने में कामयाब रही हैं। इस बार भी कुछ सियासी दल इसकी याेजना बना रहे हाेंगे। एेसे सियासी दलाें के लिए खबर है कि इस बार उनकी यह मंशा परवान चढ़ने वाली नहीं है। यह हिदायत इसलिए दी जा रही है क्याेकि मुस्लिम मतदाताओं को रिझाने के लिए सियासी जमातों का यह रास्ता अब बंद होता दिखाई दे रहा है।

हम किसी भी सियासी जमात के रहनुमाआें से मुलाकात नहीं करेंगेः माेहतमिम

Deoband

देवबंद दारूल उलूम संस्था के मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी ने कहा है कि विधानसभा चुनाव के दौरान वह किसी भी सियासी जमात के रहनुमा से मुलाकात नहीं करेंगे। दारुल उलूम संस्था व संस्था से जुड़े लोग राजनीति से पूरी तरह से अलग रहते हैं। इसका मतलब यह भी नहीं है कि दारूल उलूम में किसी व्यक्ति को आने की इजाजत नहीं दी जाएगी, लेकिन चुनाव के दौरान वह खुद आैर संस्था का काई अन्य जिम्मेदार पदाधिकारी किसी भी राजनीतिक पार्टी के बड़े नेता या प्रतिनिधि से मुलाकात नहीं करेंगे। इसका कारण यह है कि इस अवधि में की गई सामान्य मुलाकात काे भी सियासी दल अपना हित साधने के लिए चुनाव से जाेड़कर पेश कर देते हैं।

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