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दवा घोटाला : चहेतों को लाभ देना था तो 11 रुपए की दवा खरीदी 121 में

Updated: IST drugs purchase
पशुधन विकास विभाग द्वारा बिना टेंडर बुलाई ही वर्ष 2016-17 के लिए की गई 25 लाख की दवा खरीदी, आरटीआई से हुआ खुलासा

अंबिकापुर. नियमों को ताक पर रख पशुधन विकास विभाग द्वारा औषधि एवं उपकरणों की खरीदी का मामला प्रकाश में आया है। विभाग द्वारा खरीदी के लिए न तो टेंडर बुलाए गए और न ही भंडार क्रय नियमों का पालन किया गया। अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने यह पूरा खेल खेला गया।

आलम यह है कि 11 रुपए की दवा विभाग द्वारा 121 रुपए में खरीदी गई। कुल 25 लाख 54 हजार रुपए की दवाइयों मेें जमकर घोटाला हुआ। विभाग के अधिकारियों की इस कार्यप्रणाली से सरकार को लाखों रुपए का नुकसान उठाना पड़ा है।

उपसंचालक पशुधन विकास विभाग द्वारा वर्ष 2016-17 के लिए नियमों को ताक पर रख बिना टेंडर बुलाए लाखों की औषधि व उपकरणों की खरीदी कर ली गई। उक्त बात का खुलासा आरटीआई कार्यकर्ता डीके सोनी को सूचना के अधिकार के तहत मिले दस्तावेजों से हुआ।

वर्ष 2016-17 में पशुधन विकास विभाग द्वारा लगभग 25.54 लाख रुपए के दवाइयों की खरीदी कर ली गई। जबकि 50 हजार रुपए से अधिक की खरीदी के लिए विभाग को खुली निविदा बुलानी थी। निविदा नहीं बुलाकर विभाग द्वारा अपने चहेते दवाई सप्लायरों को फायदा पहुंचाया गया है।

इनसे अनाप-शनाप दर में दवाइयों की खरीदी कर सरकार को लाखों रुपए का चूना लगाया गया है। बिना टेंडर के 9 मेडिकल स्टोर्स के संचालकों को आर्डर देकर बिना किसी नियम का पालन किए ही दवाईयों की खरीदी कर ली गई। इसकी शिकायत भी कमिश्नर से की गई थी। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

सप्लायरों को पहुंचा गया लाभ

पशुधन विकास विभाग द्वारा अपने चहेते सप्लायरों को लाभ पहुंचाने के लिए किसी भी दर पर खरीदी कर ली गई। छत्तीगढ़ मेडिकल कार्पोरेशन द्वारा बी-काम्पलेक्स लिवर एक्सट्रेट के इंजेक्शन का दर 11.33 रुपए प्रति 30 एमएल अनुमोदित किया गया है। उसे विभाग द्वारा 121 रुपए के दर से खरीदा गया है।

भंडार क्रय नियमों का करना था पालन

पशुधन विकास विभाग द्वारा औषधि व उपकरण खरीदी के लिए भंडार क्रय नियमों का पालन किया जाना चाहिए था। भंडार क्रय नियम के अनुसार एकल निविदा पद्धति के तहत वार्षिक आवश्यकता के अनुसार सिर्फ 5 हजार रुपए की खरीदी की जा सकती है। 50 हजार रुपए से अधिक की खरीदी पर समाचार पत्र में विज्ञापन प्रकाशित किए जाने के बाद ही क्रय किया जा सकता है।

इसके ऊपर 2 लाख से अधिक की खरीदी पर प्रदेश स्तर के दो समाचार पत्रो में विज्ञापन जारी करने के बाद ही किसी भी चीज की खरीदी की जा सकती है। लेकिन पशुधन विभाग द्वारा भंडार क्रय नियमों का पालन औषधि खरीदी के लिए किया ही नहीं गया। बिना निविदा बुलाए मनमाफिक अपने चहेतों को औषधि खरीदी का आर्डर थमा दिया गया।

अनुमोदित दर पर होनी थी खरीदी

दवा खरीदी के लिए सरकार ने कुछ नियम बनाए हैं। इसके तहत मेडिकल कार्पोरेशन द्वारा अनुमोदित दवाइयां ही खरीदी की जा सकती हंै। लेकिन पशुधन विकास विभाग द्वारा खरीदी मेें मेडिकल कार्पोरेशन के अनुमोदन को भी दरकिनार कर दिया गया। कार्पोरेशन द्वारा जिन दवाइयों को अनुमोदित नहीं किया गया हो उसे ही खुली निविदा बुलाकर खरीदी की जानी चाहिए।

अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर की खरीदी

शासकीय कुक्कुट प्रक्षेत्र सकालो हेतु 3.71 लाख व सूकर प्रक्षेत्र सकालो के लिये 4.08 लाख की खरीदी सिर्फ फर्मों से कोटेशन मंगवाकर कर ली गई। जबकि इनके लिए निविदा बुलाई जानी चाहिए थी। उपसंचालक द्वारा पत्र क्रमांक 202, 204 एवं 205 से 13 फरवरी 2017 को एक ही सामान लेइंग नेस्ट 3 बार खरीद लिए गए जो उपसंचालक के वित्तीय अधिकार सीमा से बाहर है।

इन्हें दिया गया लाखों का ऑर्डर

विभाग द्वारा मेसर्स धनवंतरी बिलासपुर को 1 लाख 24 हजार, मे चंद्रा मेडिकल रायगढ़ को 1 लाख 12 हजार, जेके मेडिकल एजेन्सी अंबिकापुर 1 लाख 65 हजार, मां शारदा मेडिकल एजेन्सी कोरिया 5 लाख, मे. मिलन ट्रेडर्स दुर्ग 5 लाख, मे उमंग डिस्टीब्यूटर्स 4 लाख 78 हजार रुपए, मे. साक्षी लैब दुर्ग 49 हजार रुपए का आर्डर बिना किसी निविदा के पशुधन विकास विभाग द्वारा दे दिया गया।

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