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Photo Icon नक्सली मुठभेड़ में शहीद APC का शव पहुंचा गृहग्राम, अंतिम विदाई में रो पड़ा पूरा गांव

Updated: IST tribute of Martyr
कोंडागांव के मरदापाल में माओवादियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए थे असिस्टेंट प्लाटून कमांडर, सशस्त्र गार्ड ऑफ ऑनर के साथ ही अधिकारियों व सैकड़ों लोगों ने दी श्रद्धांजलि

सीतापुर. कोंडागांव जिले के मरदापाल थाने के कुदर इलाके के तुमड़ीवाल के जंगल में बुधवार को माओवादियों के साथ हुए मुठभेड़ में असिस्टेंट प्लाटून कमांडर कृष्णनाथ किंडो शहीद हो गए थे। गुरूवार को उनका पार्थिव देह वायुसेना के हेलीकॉप्टर से दरिमा हवाई पट्टी लाया गया।

फिर यहां से सड़क मार्ग से ग्राम पंचायत रजौटी के मुड़ापारा गृहग्राम ले जाया गया। यहां पूरे सम्मान के साथ आला अधिकारियों की उपस्थिति में नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी गई। उनकी अंतिम यात्रा में पूरा गांव उमड़ पड़ा था।

tribute

गौरतलब है कि सीतापुर विकासखंड के ग्राम रजौटी मुड़ापारा निवासी 36 वर्षीय कृष्णनाथ किंडो कोंडागांव जिले के मरदापाल थाना अंतर्गत एसटीएफ के सहायक प्लाटून कमांडर के पद पर तैनात थे। 15 फरवरी को तुमड़ीवाल के जंगल में माओवादियों व पुलिस पार्टी के बीच लगभग डेढ़ घंटे तक चली मुठभेड़ में सहायक प्लाटून कमांडर कृष्णनाथ शहीद हो गए थे।

गुरूवार को उनका पार्थिव देह वायुसेना के हेलीकॉप्टर से दरिमा हवाई पट्टी लाया गया। फिर यहां से शासकीय एंबुलेंस से उनका पार्थिव देह गृहग्राम मुड़ापारा जैसे ही पहुंचा पूरा गांव उमड़ पड़ा। इस शहीद को अंतिम विदाई देने सीतापुर समेत आसापस के क्षेत्र से काफी संख्या में लोग पहुंचे।

सीतापुर विधायक अमरजीत भगत, एसपी आरएस नायक, न्यायाधीश भूपन साहू, एसडीओपी आर एक्का, तहसीलदार बिजेंद्र सारथी, मैनपाट तहसीलदार सुनील सोनपिपरे सहित अन्य विभागीय अफसर, भाजपा जिला महामंत्री राजकुमार अग्रवाल, किसाना मोर्चा जिलाध्यक्ष अनिल अग्रवाल, जनपद सदस्य अनुज एक्का, धर्मेंद्र शर्मा, पटवारी नरेंद्र यादव, मुरारी गुप्ता सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने उनके पार्थिव देह पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान सभी की आंखें नम थीं।

gaurd of honour

शहीद को जवानों द्वारा सशस्त्र गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। फिर उनके पार्थिव शरीर का सामाजिक रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया।

कुछ दिन पहले छुट्टी पर आए थे कृष्णनाथ

चार भाई-बहनों में सबसे बड़े कृष्णनाथ ने वर्ष 2001 में अंबिकापुर से आरक्षक के पद से नौकरी की शुरूआत की थी। इस दौरान उन्होंने अविभाजित सरगुजा में अपनी सेवाएं दी थीं। वर्ष 2009 में वे प्रधानआरक्षक बने थे। अभी तीन वर्ष पूर्व ही वे पदोन्नत होकर साहयक प्लाटून कमांडर के पद पर जिला कोंडागांव में पदस्थ हुए थे। कुछ दिनों पूर्व एपीसी कृष्णनाथ छुट्टी पर घर आए थे और आवश्यक काम निपटाकर 12 फरवरी को वापस ड्यूटी ज्वाइन किया था और दो दिन बाद ही उनके शहीद होने की खबर आ गई।

नन्हें बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

कृष्णनाथ के दुनिया छोड़ जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनके दो वर्षीय बेटी कृतिशा व 7 वर्षीय पुत्र उत्कृष के सिर से पिता का साया उठ गया। पत्नी ऊषा किंडो, छोटे बच्चों व परिजन का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे परिवार की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी। पिता व छोटा भाई खेत व करते हैं। पूरा परिवार गम में तो जरूर डूबा है लेकिन उन्हें कृष्णनाथ के माओवादियों से लोहा लेने के दौरान शहीद होने पर गर्व भी है।

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