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Photo Icon रसूख से तय होती है शिकायतों की जांच, संभागायुक्त की समीक्षा में हुआ खुलासा

Updated: IST Naresh Pal
कलेक्ट्रेट में लंबित गंभीर शिकायतों का निराकरण नहीं, जिले में लंबित प्रकरणों की चर्चा के दौरान पांच शिकायतें ऐसी पाई गई हैं, जो गंभीर किस्म की हैं और इनका निराकरण कई महीनों बाद भी नहीं हो सका है।

रमाशंकर शर्मा @ सतना। कलेक्ट्रेट में आने वाली ज्यादातर शिकायतों की जांच और उनके निराकरण की स्थिति जिम्मेदारों के रसूख के आधार पर तय होती है। यह हम नहीं कह रहे हैं बल्कि संभागायुक्त कार्यालय में हुई समीक्षा बैठक के दौरान हुआ। जिले में लंबित प्रकरणों की चर्चा के दौरान पांच शिकायतें ऐसी पाई गई हैं।

जो गंभीर किस्म की हैं और इनका निराकरण कई महीनों बाद भी नहीं हो सका है। मामलों को लेकर बताया जा रहा है कि यह जांचें जिम्मेदारों के प्रभाव के कारण शाखाओं की लाल फीताशाही में घूम रही हैं।

1. प्रशिक्षण में गोलमाल

माड़ा पॉकेट योजना के तहत आदिवासियों को प्रशिक्षण देने के लिए आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई थी। इसके तहत हितग्राहियों को रोजगार परक प्रशिक्षण दिया जाकर उन्हें रोजगार उपलब्ध कराना था। इसके लिए 2.77 करोड़ रुपए खर्च किये गये थे, लेकिन इसमें जिन संस्थाओं को प्रशिक्षण का जिम्मा दिया गया था वे मापदंडों के अनुकूल नहीं थीं।

2. गलत स्थापना

कलेक्ट्रेट के सहायक अधीक्षक के संबंध में एक शिकायत संभागायुक्त स्तर तक की गई थी। इसमें आरोप है कि ग्रामीण विकास के होने के बाद भी नियम विरुद्ध तरीके से कलेक्ट्रेट की स्थापना में आ गये। इसके बाद से लगातार पदोन्नति प्राप्त करते जा रहे हैं। शिकायत में कहा गया है कि गलत तरीके से संविलयन कराया गया है।

3. आवास गड़बड़झाला

हाउसिंग बोर्ड कालोनी के भू-भाटक के समतुल्य राशि की कीमत के मकान बनाकर 12 आवास कलेक्टर को हैंडओवर किए गए थे। इनमें से एक विवादित मकान था। मामले में मुख्य सचिव तक शिकायत की गई थी कि कलेक्टर को हस्तांतरित एक भवन एचआईजी का अधिपत्य आम आदमी को सौंपने के आदेश जारी किये गये। इसमें व्यापक पैमाने पर गड़बड़ी की गई है।

4. पार्किंग ठेका

संभागायुक्त के यहां एक शिकायत कलेक्ट्रेट के पार्किंग ठेके की है। इसमें शिकायत में कहा गया है कि कर्मचारी सहकारी संस्था के नाम पर गड़बड़ी की जाकर एकाधिकार कायम कर निजी लाभ में उपयोग किया जा रहा है। इसकी जांच भी सतना कलेक्ट्रेट के स्थापना शाखा में लंबित है।

5. भू-विक्रय अनुमति

एक शिखायत मझगवां से संबंधित है। उसमें कहा गया है कि डिप्टी कलेक्टर द्वारा अपने अधिकार से बाहर जाकर यह व्यवस्था तय कर ली कि उन्होंने भूमि विक्रय के अनुमति आदेश जारी करने लगे। कुछ सर्वे नंबर की बिक्री के लिये एसडीएम से एनओसी लेकर सब रजिस्ट्रार यह काम करते हैं लेकिन तत्कालीन अधिकारी द्वारा भूमि बिक्री की अधिकारिता विहीन अनुमति दी गई है।

नतीजे तक तो पहुंचे

सवाल यह खड़े हो रहे हैं कि यदि कोई छोटे कर्मचारी होते हैं तो उनकी तुरंत जांच संस्थित कर निर्णय की स्थिति में लाकर दाण्डिक कार्रवाई कर दी जाती है। यहां दोष सिद्ध न होने पर शिकायत नस्तीबद्ध कर दी जाती है। लेकिन इन मामलों में जांच के लिये पत्राचार खेला जा रहा है। संबंधित जांच अधिकारियों द्वारा गंभीरता न बरते जाने के कारण कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

ज्यादातर मामले संज्ञान में हैं। कुछ तकनीकि पक्षों और कुछ न्यायालयीन मामलों के कारण विलंब में है। फिर भी इन प्रकरणों को दिखवा कर तेजी लाई जाएगी और इन्हें परिणाम तक पहुंचाया जाएगा।

नरेश पाल, कलेक्टर

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