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डकैतों के चंगुल से फिरौती देकर शिक्षक रिहा, MP पुलिस ने साधी चुप्पी

Updated: IST Dacoits From clutches teacher is free
एएसपी ने रात 12 बजे की पुष्टि: मध्यस्थों के साथ मुडि़यादेव पहुंचा यशोदा, पुलिस ने लिया अपने कब्जे में। मुडिय़ादेव शासकीय स्कूल का अपहृत हेडमास्टर रविवार रात डकैतों के चंगुल से छूट गया।

सतना। मुडिय़ादेव शासकीय स्कूल का अपहृत हेडमास्टर रविवार रात डकैतों के चंगुल से छूट गया। चर्चा है कि खैरवार समाज के मध्यस्थों के माध्यम से डकैत गिरोह तक फिरौती पहुंचाई गई। इसके बाद डकैतों ने हेडमास्टर यशोदा प्रसाद कोल को छोड़ा। मध्यस्थता करने वाले हेडमास्टर को लेकर गांव भी पहुंच गए।

उधर, जानकारी मिलने पर पुलिस गांव पहुंची और उसे कब्जे में ले लिया। पूछताछ के लिए बरौंधा थाने ले गए। देर रात करीब 12 बजे एएसपी रामेश्वर यादव ने हेड मास्टर के छूटे जाने की पुष्टि कर दी।

हेडमास्टर के ऊपर डकैतों की दहशत
उनका कहना है कि रात को ही मेडिकल परीक्षण कराने के बाद अगली सुबह शिक्षक से पुलिस बात करेगी, ताकि डकैत गिरोह व वारदात के संबंध में जानकारी एकत्रित की जा सके। बताया जा रहा है कि हेडमास्टर के ऊपर डकैतों की दहशत अभी भी देखने को मिल रही है। वो फिलहाल कुछ बताने की स्थिति में नहीं है।

हजारों में टूटा लाखों का सौदा
दस्यु प्रभावित इलाके में चर्चा है कि अपहृत शिक्षक के परिजनों से बदमाशों ने चार लाख रुपए की फिरौती तय की थी। इसमें ढाई लाख रुपए शनिवार को दस्यु दल के पास पहुंचने की बात सामने आई थी। जबकि बाकी डेढ़ लाख रुपए रविवार को पहुंचाने थे। लेकिन शिक्षक की रिहाई के बाद चर्चा एेसी रही कि लाखों का सौदा हजारों में सीमित होकर रह गया।

जिस दिन पकड़ा, उसी दिन छोड़ा
9 जुलाई रविवार की रात करीब 9 बजे मुडि़यादेव गांव से बदमाशों का गैंग हेड मास्टर यशोदा प्रसाद कोल को अगवा कर अपने साथ ले गया था। इसके बाद फिरौती की बात सामने आने पर यशोदा के भाई ने इसी इलाके के एक परिचित शिक्षक और पुलिस में काम करने वाले रिश्तेदार की मदद से डकैतों से संपर्क साधना शुरू किया था। तमाम प्रयासों के बाद रविवार की रात ही बदमाशों ने हेड मास्टर को छोड़ा है।

तीन थानों की पुलिस रही नाकाम
अपहृत शिक्षक का भाई अपने स्तर पर प्रयास कर रहा था। उधर बरौंधा, मझगवां और नयागांव थाना की पुलिस पार्टियों के साथ दस्यु उन्मूलन अभियान की टीमें भी बदमाशों की टोह लेने में जुटी थीं। हेड मास्टर के रिहा होने की उम्मीद नजर आने पर रविवार की रात तत्कालीन एसपी मिथिलेश शुक्ला के विदाई समारोह में भी तीनों थानों की पुलिस को आने की मनाही रही। जब जिला मुख्यालय खबर आई कि यशोदा आ चुका है तो एडिशनल एसपी बरौंधा के लिए रवाना हुए।

काम न आया दबाव
शिक्षक को छोडऩे के लिए दस्यु दल पर जब सजातीय दबाव बनाया गया, तो उसने दो टूक कह दिया कि बदमाश की कोई जाति नहीं होती। दबाव बनाने का प्रयास न किया जाए। चर्चा है कि शनिवार की रात शिक्षक से उसके भाई की बात डकैतों ने कराई थी। खुद को सुरक्षित करते हुए सुनियोजित तरीके से हेड मास्टर को बदमाशों ने छोड़ा है।

गिरोह का नाम नहीं बात रही पुलिस
हेडमास्टर के छूटने के बाद पुलिस ने उसे कब्जे में लिया और पूछताछ भी की। लेकिन, प्राथमिक पूछताछ के बाद भी पुलिस डकैत गिरोह का नाम बताने से बचती नजर आई। आलम यह है कि पुलिस इस बात पर पर्दा डाल रखी है कि अपहरण करने वाला गिरोह कौन था? वहीं शुरू से चर्चा रही कि डकैत ललित गिरोह ने वारदात को अंजाम दिया है।

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