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भगवान को भी नहीं छोड़ा: नरसिंह टेकरी मंदिर की 500 करोड़ की जमीन भी बेच खाए भू कारोबारी

Updated: IST Narsingh tekari temple
128 एकड़ जमीन थी मंदिर के पास अब ढाई एकड़ भी नहीं बची, दो सौ साल से अधिक पुराना है मंदिर

सतना/भोपाल। फर्जीवाड़ा कर बेशकीमती सरकारी जमीन हड़पने वाले भू कारोबारियों ने भगवान को भी नहीं छोड़ा। ऐतिहासिक नरसिंह टेकरी मंदिर की 500 करोड़ मूल्य से अधिक की जमीन को बेच डाला। आलम यह है कि मंदिर के स्वत्व में अब ढाई एकड़ ही जमीन बची है। सबसे अधिक हैरानी की बात तो यह है कि कलेक्टर स्वयं इस मंदिर के प्रबंधक हैं इसके बाद भी जमीन वापस पाने और उसे खुर्द-बुर्द करने वालों पर कार्रवाई की कोई कोशिश नहीं की।

सरकारी रिकार्ड के अनुसार नेशनल हाइवे से लगी जमीन पर स्थित नरसिंह नारायण मंदिर के स्वत्व में सोनौरा से लेकर कृपालपुर और केंद्रीय जेल तक 128 एकड़ जमीन थी। पहले यह एयरोड्रम के लिए अधिग्रहीत की गई। लेकिन बाद में मंदिर को वापस कर दी गई। दुबारा मंदिर के कब्जे में जमीन के आते ही जैसे लूट मच गई। जमीन कारोबारियों की बदनीयती ने हाइवे से लेकर बस्ती तक की 125 एकड़ से अधिक जमीन फर्जीवाड़ा कर लूट ली। मजे की बात तो यह है कि शासनाधीन इस मंदिर के पदेन प्रबंधक कलेक्टर सतना हैं। लेकिन 1970-71 से मची जमीन की लूट पर वे आंखें मूंदे रहे। इस अवधि में दो दर्जन से अधिक कलेक्टर आए और गए पर किसी ने भी मंदिर को बचाने का प्रयास नहीं किया।

पुजारी ने मानी थी गलती

दरअसल इस बेशकीमती जमीन का फर्जीवाड़ा नरसिंह मंदिर के तत्कालीन पुजारी जयरामदास को केंद्र में रखकर किया गया। शासनाधीन मंदिर का संरक्षण कलेक्टर के हाथ में होने के बाद भी पुजारी के जरिए जमीनों की रजिस्ट्री कराई गई। जिस अमले पर इसके देख-रेख का जिम्मा था उसने रजिस्ट्री में सहयोग करते हुए नामांतरण काटे। जमीन लुटने के बाद पुजारी की समझ में आया तो उन्होंने गलती मानी थी।

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सतना के अस्तित्व से जुड़ा है मंदिर

नरसिंह टेकरी के नाम से सुप्रसिद्ध यह ऐतिहासिक मंदिर महज एक धर्मस्थल भर नहीं है बल्कि सतना के अस्तित्व से जुड़ा हुआ है। क्योंकि जितना पुराना इतिहास सतना का है, उसी के आसपास की इस मंदिर की स्थापना भी है। सूत्रों के अनुसार रीवा राजघराने द्वारा प्रतिमाओं की प्राणप्रतिष्ठा कर मंदिर के गुजारा के लिए 128 एकड़ जमीन चढ़ाई गई थी। जिसका संरक्षक कृपालपुर राजपरिवार को बनाया गया था। बाद में शासनाधीन होते कलेक्टर इसके प्रबंधक बन गए।

प्रशासन ने माना था फर्जीवाड़ा

वर्ष 1995 में यह मामला जोर-शोर से विधानसभा में उठा था। जिसमें सफेदपोशों और रसूखदार व्यापारियों के नाम सामने आए थे। विधानसभा में दिए गए जवाब में प्रशासन ने माना था कि तत्कालीन राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से इस बेशकीमती जमीन में फर्जीवाड़ा कर कब्जा किया गया है। राज्य सरकार की ओर से जांच का आश्वासन दिया गया था। साथ ही लोकायुक्त में भी प्रकरण भेजने की बात कही गई थी। लेकिन राजनैतिक दबाव के चलते सब ठंडे बस्ते में चला गया।

बाजार मूल्य एक हजार करोड़ पार

नरसिंह टेकरी की अधिकांश भूमियां नेशनल हाइवे 75 से लगी हैं और उसी के एक हिस्से से मैहर-अमरपाटन बायपास निकला हुआ है। जहां की आवासीय भूमि सरकारी गाइडलाइन में 9000 रुपए से लेकर 28000 हजार रुपए वर्गमीटर है। जबकि मौजूदा बाजार मूल्य इसके दुगुने से भी अधिक है। इस लिहाज से इस इलाके की मंदिर के स्वत्व की 125 एकड़ से अधिक जमीन का मूल्य एक हजार करोड़ से भी अधिक है।

बोले कलेक्टर

कलेक्टर नरेश पाल का कहना है कि इस मामले में भी प्रकरण दर्ज कर जांच कराई जाएगी।

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