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Photo Icon खरीदी केंद्र और गोदाम के बीच गायब हो गया साढ़े 13 हजार टन अनाज

Updated: IST satna news
समर्थन मूल्य पर अनाज खरीदी और इसके भंडारण में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। खरीदी केन्द्र और गोदाम के बीच करीब साढ़े 13 हजार टन अनाज गायब हो गया। तीन सालों से लगातार चल रहे इस खेल से सरकारी खजाने को करीब दो करोड़ की चपत लगी है।

रमाशंकर शर्मा@ सतना समर्थन मूल्य पर अनाज खरीदी और इसके भंडारण में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। खरीदी केन्द्र और गोदाम के बीच करीब साढ़े 13 हजार टन अनाज गायब हो गया। तीन सालों से लगातार चल रहे इस खेल से सरकारी खजाने को करीब दो करोड़ की चपत लगी है।

हैरानी की बात है कि तीन सालों में भी सरकारी अमला यह पता नहीं लगा पाया कि इतने बड़े पैमाने पर अनाज कहां से और कैसे गायब हो गया। अनाज खरीदी केंद्रों और गोदाम के रिकार्ड मिलान की बात कहकर ही टाल मटोल की जा रही है।

सांझा चूल्हा खाद्यान्न घोटाले के बाद जिले का यह दूसरा मामला है। गायब अनाज ई-उपार्जन के तहत किसानों से समितियों द्वारा बनाए गए समर्थन मूल्य खरीदी केंद्र के माध्यम से खरीदा गया था। पत्रिका के पास मौजूद दस्तावेजों के अनुसार खरीदी केन्द्र से गोदाम के बीच हुए खेल में 7655 मीट्रिक टन गेहूं और 6823 मीट्रिक टन धान गायब हो गई है।

सरकार को 1.98 करोड़ की चपत

इस पूरे खेल में सहकारी सोसायटियां, विपणन संघ और नान सवालों के घेरे में हैं। गंभीर बात तो ये है कि अभी तक इस गायब खाद्यान्न से सरकारी खजाने को लगी चोट की भरपाई तक नहीं हो पाई है। सरकार को 1.98 करोड़ की चपत लगी है।

धान में भी हेराफेरी

धान की खरीदी नान के माध्यम से होती है। लेकिन यहां भी गेहूं की ही तरह गड़बड़झाला सामने आया है। वर्ष 2013-14 में समर्थन मूल्य में 57 केन्द्रों में धान खरीदी और जमा में बड़ा खेल सामने आ रहा है। इस सत्र में 4775.38 मीट्रिक टन धान लापता है। जिसकी कीमत 69.72 लाख रुपये बताई गई है। 2014-15 में 47 खरीदी केन्द्रों में गड़बड़ी सामने आ रही है। यहां से 18.93 लाख कीमत की 1392 मीट्रिक टन धान गायब हो गई है। 2015-16 में धान खरीदी और जमा में अन्तर आने वाले केन्द्रों की संख्या 45 सामने आ रही है। यहां 9.25 लाख मूल्य की 656.28 मीर्टिक टन धान लापता है।

गेहूं का ऐसे हुआ खेल

ई-उपार्जन वर्ष 2013-14 से लेकर 2015-16 के बीच तीन सालों में अकेले 6756.5 मीट्रिक टन गेहूं गायब हो गया है। किसानों को सरकारी खजाने से पूरा भुगतान देने के बाद खरीदे गये गेहूं की स्थिति देखें तो 2013-14 में 66 सोसायटियों के माध्यम से खरीदी जमा में अन्तर 1695.84 मीट्रिक टन आया है। इसका मूल्य 25.43 लाख रुपये है।

गेहूं का अन्तर 3629.57 मीट्रिक टन है जो गायब

इसी तरह से वर्ष 2014-15 70 खरीदी केन्द्रों में खरीदी जमा के बीच गेहूं का शार्टेज 1431.66 मीट्रिक टन है। जिसकी कीमत 22.19 लाख रुपये है। वर्ष 2015-16 की स्थिति देखे तो खरीदी केन्द्र और विपणन संघ में जमा गेहूं का अन्तर 3629.57 मीट्रिक टन है जो गायब है। जिसका सरकारी खजाने से भुगतान 52.62 लाख रुपये होना बताया गया है। इतने व्यापक पैमाने पर गायब गेहूं की वसूली अभी तक नहीं हो सकी है। न ही इस मामले के दोषी चिन्हित हो सके हैं।

6756 टन गेहूं लापता है

6823 टन धान का भी पता नहीं

1.98 करोड़ का नुकसान सरकारी खजाने को

03 साल से फाइलों में दबा है यह गोलमाल

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