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Photo Icon ISI केस: पुलिस की आंखों के सामने चलता रहा टेरर फंडिंग का खेल, राजदार को उठाया

Updated: IST satna news
टेरर फंडिंग के मास्टरमाइंड बलराम की थी राजनीतिक पैठ, स्टंटबाज भी था कारोबारी राजदार, नंबर प्लेट बदलकर चलाता था बाइक, सतना से दिल्ली भेजता था राशि, रिश्तेदार भी कर रहा था मदद, बैंक भी बलराम के गलत कारोबार पर बंद कर लेते थे आंखें, तार चोरी के मामले में बाइपास के पास पकड़ी गई थी बलराम की बाइक

सतना टेरर फंडिंग के मास्टरमाइंड बलराम सिंह ने राजनैतिक और सामाजिक संगठनों के साथ पुलिस के बीच भी अच्छी पैठ बनाई थी। वह जब भी फंसा मददगार आगे आए। इसका खुलासा एक माह पूर्व तार चोरी के गिरोह की धरपकड़ की घटना से हुआ है। टेरर फंडिंग के मास्टर माइंड बलराम के राजदार के रूप में सामने आ रहे केपी यादव को जांच टीम ने देर शाम उठा लिया है।

जो संकेत मिल रहे हैं उसके अनुसार केपी यादव को बलराम सिंह की निकटता और उसके सहयोगी के रूप में अभिरक्षा में लिया गया है।टेरर फंडिंग के कारोबार के समानांतर ही बलराम लगातार आधार बढ़ाने की कोशिश में जुटा था।

हर तरह के लोगों से संबंध बनाए थे। एटीएस की सख्ती के बाद पुलिस ने भी हाथ पांव मारने शुरू किए हैं। बलराम का स्टंटबाज बाइकर भी अब जांच टीम के राडार में आ गया है, फिलहाल लापता है। यह जरूर पता चला है यह स्टंटबाज नंबर प्लेट बदल कर वाहन इस्तेमाल करता था। इसके तार बलराम के घर के सामने खड़ी रहने वाली काली एसयूवी वाले युवक से भी जुड़े हैं।

एफबी प्रोफाइल नेम को बदल लिया

इन्होंने एफबी बंद कर दिया है। उधर गोविन्द ने भी फेसबुक के प्रोफाइल नेम को बदलते हुए गोविन्द हटाकर संयोग कर लिया है। इस सब से हट कर यह तथ्य सामने आ रहे हैं कि नोट बंदी के दौरान इन लोगों ने बैंक में अपने संबंधों का जमकर फायदा उठाते हुए व्यापक पैमाने पर अदला बदली भी की है। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिये टेरर फंडिंग के आरोप में गिरफ्तार बलराम सिंह के राजदारों और कारोबारी साथियों पर निगरानी शुरू हो गई है और जांच टीमें इनकी सुरागरसी कर रही है।

स्टंटबाज ने अकाउंट डिलीट किया

बलराम का कथित कारोबारी साथी उत्तर प्रदेश का मूल निवासी जो महंगी बाइकों का शौकीन और स्टंटबाज बाइकर है कि तलाश तेज है। दो दिन पहले तक साइबर स्पेस में अपने फेस बुक अकाउंट से अपना जलवा बिखेरने वाले इस स्टंटबाज ने खुद को फेसबुक से अलग करते हुए अपना अकाउंट डिलीट कर लिया है। जांच में यह सामने आया है कि इसके कोई रिश्तेदार दिल्ली में रहते हैं जिनके सहारे यह व्यापक पैमाने पर सतना से राशि की हेराफेरी दिल्ली में करता था।

बलराम का राजदार केपी पुलिस अभिरक्षा में

दो दिन से जांच टीम को केपी यादव की तलाश थी लेकिन वह चकमा देने में कामयाब हो रहा था। सिटी कोतवाल ने इस मसले पर विशेष रणनीति बनाकर दोपहर से सभी मुखबिरों को सक्रिय कर दिया था। देर शाम उसे लालता चौक में इलेक्ट्रिक दुकान से पुलिस ने अपनी अभिरक्षा में ले लिया है। अभी उससे पूछताछ की जा रही है। माना जा रहा है कि वह बलराम के कई राज उगल सकता है। अभी प्रथम दृष्टया जो जानकारी सामने आ रही है उसके अनुसार केपी 9 अलग-अलग बाइकों में सवारी करता था।

महंगी लक्जरी कार भी है

अब यह पता किया जा रहा है कि यह नौ बाइकें अलग-अलग थी या नंबर प्लेट बदल कर वह ऐसा कर रहा था। गाजियाबाद का मूल निवासी बताया जा रहा यादव अपने महंगे शौक के लिये इतना पैसा कहां से पाता था यह भी जांच का विषय बना हुआ है। इसी तरह से यह भी पता किया जा रहा है कि इसके किसी आश्रम में रहने वाले से क्या और किस तरह के संबंध हैं। केपी आर 15 सहित ऐसी ही महंगी गाडिय़ों में चलने का शौकीन था तो इसके पास एक महंगी लक्जरी कार भी है। मिली जानकारी के अनुसार बलराम के एक और साथी चिकित्सक पुत्र तक पुलिस के हाथ पहुंचने की खबर है।

पुलिस ने साधी चुप्पी

बलराम और उससे जुड़े मामले में अब स्थानीय पुलिस भी सक्रिय हो गई है और उसके द्वारा भी सुरागरशी शुरू कर दी गई है। कुछ लोगों तक पुलिस का शिकंजा कस भी गया है लेकिन अभी पुलिस इस मामले में पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए है। इतना जरूर बताया जा रहा है कि मामला काफी संवेदनशील है इसलिये इस पर कुछ भी नहीं बताया जा सकता है।

एक पुलिस अधिकारी से थी घनिष्टता

इधर जानकारों की बात माने तो बलराम सहित उसके गैंग की शहर के एक पुलिस अधिकारी से काफी घनिष्टता थी। इसकी पुष्टि इस गैंग के साथ पुलिस अधिकारी की काफी क्लोज रिलेशन दिखा रही फोटो से भी हो रही है। इस फोटो में पुलिस अधिकारी के साथ बलराम, नेता के नाम पर बनी एनजीओ के जिले के कर्ताधर्ता, एक चिकित्सक पुत्र, स्टंटबाज सहित दो अन्य इसी गैंग के साथी खड़े हैं। माना जा रहा है कि गाहे बगाहे यह अधिकारी उनकी मदद भी करते रहते थे।

तो क्या ब्लैक एसयूवी बलराम की

बलराम के किराये के मकान के सामने अक्सर खड़ी रहने वाली ब्लैक एसयूवी को लेकर अब नयी जानकारी सामने आ रही है। जानकार बता रहे हैं कि यह भरहुत नगर और संग्राम कालोनी स्थित किराये के मकान के सामने अक्सर जो ब्लैक एसयूवी खड़ी रहती थी वह भी बलराम की ही थी। जिसे किसी दूसरे के नाम से खरीदी जाना बताया जा रहा है। इसी तरह यह जानकारी भी सामने आ रही है कि बलराम के पास कई महंगी बाइके थी। जिनमें से किसी में नंबर नहीं था।

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