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अनदेखी के कारण लग रहा डेंगू का डंक

Updated: IST sehore
पिछले साल महीने में 141 मरीज मिले डेंगू पॉजीटिवस्वास्थ्य अमला नहीं गंभीर

सीहोर. डेंगू जिस तेजी से पैर फैला रहा है, उसी तेजी से सुरक्षा के इंतजाम करने की जरूरत है। सीहोर में एक के बाद एक डेंगू पॉजीटिव मरीज तो मिल रहे हैं, लेकिन सुरक्षा इंतजामों को लेकर हमारे प्रयास नाकाफी हैं। स्वास्थ्य विभाग का मैदानी अमला कतई सक्रिय नहीं है। गांवों में अभी भी जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। महीने से चौक नालियों की सफाई नहीं हुई है। स्वास्थ्य अमला और नगरीय निकाय जिम्मेदारियों से बच रहे हैं, ऐसे में जरूरी है कि हम खुद डेंगू से लड़ें। डरने के बजाय हम खुद सुरक्षा इंतजामों के साथ सामना करें। ऐसे में हमारे लिए राहत की बात सामने आई है वह यह है कि कि अभी तक जो डेंगू के मरीज मिले हैं, वह गंभीर नहीं हैं। डेंगू पीडि़त जो मरीज भोपाल अस्पताल में भर्ती हैं, उनके प्लेटलेट 50 हजार से एक लाख तक मिले हैं। यह पैनिक वाली स्थिति नहीं है। लिहाजा, यह भी कह सकते हैं कि ऐसे मरीजों को ज्यादा समय अस्पताल में नहीं रहना होगा।

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डेंगू का पहला प्रकोप 1780 के आसपास एशिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका देखा गया था। इस रोग को 1779 मे पहचाना गया। 1950 के दशक मे यह दक्षिण पूर्व एशिया में निरंतर महामारी के रूप मे फैलना शुरू हुआ। 1990 के दशक तक डेंगू मलेरिया के पश्चात मच्छरों द्वारा फैलने वाला दूसरा सबसे बड़ा रोग बन गया। इससे साल भर मे करीब 4 करोड़ लोग संक्रमित होते है।

सिर दर्द, खुजली सामान्य बुखार

यदि मरीज को बुखार के साथ सिर दर्द, हाथ-पैरों में दर्द, दाने और खुजली है तो उसे डेंगू नहीं माने। यह सामान्य बुखार, वायरल के भी लक्षण हो सकते हैं। ऐसे लक्षण होने पर सामान्य तौर पर डॉक्टर से सलाह लें और उचित इलाज कराएं। त्योहार के सीजन में खान-पान का भी विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। खानपान ठीक नहीं होने पर भी हम बीमारी का शिकार हो सकते हैं। गर्मी के सीजन ज्यादा मसालेदार सब्जी और मिठाई, पक्का खाना खाने से हमारी सेहत खराब हो सकती है।

प्लेटलेट्स 30 हजार तक भी डर नहीं

यदि प्लेटलेट की संख्या 30 हजार तक भी आती है तो घबराने की जरूरत नहीं है। डॉक्टरों का तर्क है कि इतने में तो प्लेटलेट चढ़ाने की भी जरूरत नहीं होती है। फूड सप्लीमेंट और सही इलाज से प्लेटलेट की संख्या बढ़ जाती है और मरीज ठीक हो जाता है। इसके अलावा खून का गाढ़ापन नापने का पैमाना 'हिमेटो-क्रेटÓ बेस लाइन से 20 प्रतिशत ज्यादा हो जाए तो मरीज को भर्ती करने की जरूरत होती है। हिमेटोके्रट ब्लड में हिमोग्लोबिन से तीन गुना ज्यादा होता है।

पपीते के पत्ते से डेंगू का कारगर इलाज

सीहोर जिले में पिछले सात महीने में 141 डेंगू पॉजीटिव मरीज मिले हैं। डेंगू में प्लेट्लेट्स कम होते हैं, जिससे जान को खतरा रहता है। ऐसे में पीपते के पत्तों का जूस पीकर डेंगू पीडि़त प्लेट्लेट्स बढ़ा सकते हैं। पपीते के पत्ते में पपेन नामक केमिकल रहता है, जो ब्लड की बीमारियों को नियंत्रित करता है।

मौसम के हिसाब से खानपान, सफाई का रखें ध्यान

बुखार, वायरल, मलेरिया, टाइफाइड में मरीज के पेट का डाइजेशन बिगड़ जाता है। डेंगू में तो यह स्थिति और भी ज्यादा खतरनाक हो जाती है। डॉक्टर बताते हैं कि ऐसे लक्षण आते ही मरीज को चाहिए कि वह डाइजेशन सिस्टम को ठीक रखे। इसके साथ ही घर सहित आसपास साफ-सफाई का ध्यान रखें, कहीं पानी भरने न दें। खाली प्लाटों पर पानी जमा न होने दें।

डरें नहीं, सावधानी बरतें, डेंगू के लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं

यह बात सही है कि इस बार सीहोर जिले में पिछले साल से ज्यादा डेंगू पीडि़त मरीज मिले हैं, लेकिन खतरे की कोई बात नहीं है। सभी सावधानी रखें। गांव में मच्छर पैदा नहीं होने दें। डेंगू से बचने के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण है।

डॉ. आरसी गुप्ता

&डेंगू से निपटने के हर सरकारी अस्पताल में पुख्ता इंतजाम हैं। मरीजों को डरने की नहीं बल्कि सावधानी रखने की जरूरत है। यदि फिर भी कई कोई दिक्कत होती है तो बिना लापरवाही के डॉक्टर से इलाज कराएं।

डॉ. सुजाता परमार

बुखार और वायरल के लक्षण भी डेंगू जैसे ही होते हैं, इसलिए मरीज को डरने की बात नहीं है। यदि नाक से ब्लडिंग हो रही है या पेट में असहनीय दर्द है तो तत्काल डॉक्टर के पास जाना चाहिए। डेंगू लाइलाज बीमारी नहीं है।
डॉ. गिरीश जोशी

डेंगू में दस हजार से कम प्लेटलेट आने पर मरीज की जान को खतरा पैदा हो जाता है। डेंगू शरीर के अंदर जाने के 5 दिन में मरीज डॉक्टर के पास पहुंच जाता है तो कोई दिक्कत नहीं होती। इसके बाद उसकी हालत ज्यादा खराब हो जाती है।

डॉ. आनंद शर्मा

डेंगू के मरीज पपीता पत्ते के जूस का सेवन कर सकते हैं। पपीता के पत्ते के जूस से प्लेटलेट बढऩे के साथ ब्लड पेशर की बीमारी भी दूर होती है। यह बहुत फायदेमंद होता है। डेंगू से डरने की जरूरत नहीं है।

डॉ. हरिओम गुप्ता

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