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हर दिन से अलग थी ये पाठशाला...

Updated: IST seoni
न खोली किताबें, किस्से-कहानी में हुई पढ़ाई

सिवनी. स्कूल का नाम लेते ही बस्ता, किताबें, ब्लैक बोर्ड और क्लास रूम में शिक्षक की फटकार, खामोश बच्चे आंखों के सामने घूमने लगते हैं। लेकिन मंगलवार का एक दिन ऐसा भी रहा, जिसका नजारा बाकी दिनों से अलग नजर आया। यहां हर दिन तो बच्चों को किताबों के जरिये पढ़ाई कराई जाती है, लेकिन इस दिन किताबों को किनारे रखकर किस्से-कहानियों के जरिये रोचक ढंग से शिक्षा दी गई। इस दौरान बच्चों में भी कहानी सुनने-सुनाने का उत्साह दिखाई दिया।

बच्चों ने सुनी, राजा-रानी की कहानी -

बचपन के किस्से कहानियों के मुख्य पात्रों में राजा-रानी की कहानी, चांद-सितारों की कहानी, विक्रम-बेताल, टम्मक-टू, अकबर-बीरबल, तेनालीराम व अन्य कहानियों के माध्यम से बौद्धिक, व्यवहारिक शिक्षा दी जाती रही है। इसी के जरिये विद्यार्थियों में शिक्षा के प्रति रोचकता लाने का प्रयास किया गया।

बस्ते में किताबें, बाहर आई खिलखिलाहट

बस्ता लेकर स्कूल पहुंचे प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों ने कक्षा में पहुंचकर बस्ता खोल किताब बाहर निकाली, तो शिक्षक ने उन्हें किताबों को बस्ते में रखने और किस्से-कहानी सुनाने के लिए प्रेरित किया। तब बच्चे भी खुशी से चहक उठे। उन्होंने तुरंत बस्ता बंद किया और शिक्षक द्वारा पूछने पर तुरंत कहानी सुनाने के लिए अपना-अपना हाथ उठाने लगे। फिर कई बच्चों ने अपने-अपने ढंग से कहानियां सुनाई।

भोपाल से जारी हुआ था आदेश -

प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं में नौनिहालों को मिलने वाली शिक्षा को किताबों के बोझ से बाहर लाने और रोचक बनाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा कहानी उत्सव सभी शासकीय शालाओं में मनाए जाने के आदेश दिए थे। इसी के साथ विद्यालयों में गतिविधि आधारित शिक्षा प्रदान किए जाने पर जोर दिया जा रहा है।

हुआ सामूहिक कहानी उत्सव आयोजन -

नगर के मध्य शासकीय हिन्दी मेन बोर्ड प्राथमिक शाला एवं नेताजी सुभाषचंद्र बोस माध्यमिक शाला के विद्यार्थियों के बीच कहानी उत्सव का सामूहिक आयोजन हुआ। इस मौके पर प्राचार्य पीएन वारेश्वा, माध्यमिक शाला की प्रधानपाठक पूजा पाण्डे, शिक्षक डॉ शफी खान ने कहानी, कविता सुनाई, तो वहीं विद्यार्थियों ने भी कहानी, मिमिक्री, गीत, कविता सुनाया।

सभी स्कूलों को दिया था आदेश -

जिले की प्राथमिक, माध्यमिक शालाओं में जिला शिक्षा केन्द्र के माध्यम से कहानी उत्सव मनाए जाने के निर्देश जारी कराए गए थे, बावजूइ इसके जिले की कई शालाओं में यह आयोजन नहीं हो पाया। जिले से आदेश जारी करने में देरी की गई, हालांकि पोर्टल पर जानकारी मिलने के बाद छपारा के विकासखण्ड स्त्रोत समन्वयक रामस्वरुप प्रजापति ने पूर्व में ही सभी शाला प्रमुखों को मोबाइल के माध्यम से सूचित कर दिया था। लेकिन दूसरे विकासखण्ड में ऐसा विशेष प्रयास नहीं किया गया।

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