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नोट बंदी के 100 दिन : ग्रामीण क्षेत्रों के बैंकों में क्यों कम नहीं हो रही भीड़

Updated: IST seoni
चिल्लर की बनी है समस्या, नगद लेन-देन जारी, कैशलेस ट्रांजेक्शन कम

सिवनी. जाली नोटों पर सर्जिकल स्ट्राइक के उद्देश्य की गई नोटबंदी के 100 दिनों हो चले हैं। जिले के शहरी क्षेत्रों में जहां हालात सामान्य वहीं ग्रामीणों क्षेत्रों के बैंकों और एटीएम में अभी भी नोट की समस्या से लोग परेशान नजर आ रहे हैं।

बाजार में चिल्हर की किल्लत

बाजार में चिल्हर की किल्लत बनी हुई है। दो हजार के नोट पर 200 रुपए के पेट्रोल लेने पर कई पम्प आपरेटर चिल्हर नहीं होने की बात कहते हैं। वहीं बसों में यात्रा करने वाले यात्रियों को भी कंडेक्टर जब उनके पास दूसरे यात्रियों के पास से चिल्हर रुपए मिलते हैं। तब वे दूसरे यात्रियों को बस टिकट के शेष रुपए लौटाते हैं।

बस स्टैण्ड क्षेत्र के एटीएम कक्ष में दो एटीएम तो लगे हैं लेकिन एक एटीएम ही काम कर रहा है। जिसके कारण नागरिकों और यात्रियों की यहां काफी भीड़ हमेशा बनी रहती है। इसके साथ ही बरघाट रोड स्थित बिजली कार्यालय के सामने के एटीएम से पिछले दो दिनों से रुपए नहीं मिल रहे हैं। बैंक प्रबंधकों ने बताया कि बैंकों में अब पर्याप्त रुपए हैं। एटीएम में रुपए डालने का काम आउट सोर्सिंग से होता है। जिसकी वजह से थोड़ी परेशानी जरूरी हो सकती है।

अभी भी नगद लेनदेन

शहर हो या गांव सभी छोटी-बड़ी दुकानों में हो रही खरीदारी के बीच रुपए का लेनदेन नगद ही ज्यादा हो रहा है। जिले भर के हजारों दुकानदारों ने स्वाइप मशीनें अपनी दुकानों में नहीं रखे हैं। आरबीआई द्वारा विड्राल की सीमा बढ़ाए जाने से ट्रांजेक्शन का लोड और बढ़ गया है।

विकासखण्ड घंसौर क्षेत्र में दो माह का लंबा समय गुजर जाने के बाद भी किसानों खाते पर उनके द्वारा भेजी गई फसल का भुगतान प्राप्त ना होने से किसानों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

क्षेत्र भर के किसानों ने विगत 2 माह पूर्व घंसौर विकासखंड के आदिम जाति सेवा सहकारी समिति घंसौर एवं कहानी के किसानों द्वारा अपनी फसल जिसमें ई-उपार्जन के तहत धान एवं मक्का की फसल की तुलाई आदिम जाति सेवा सहकारी समिति के माध्यम से बेची गई थी। जिसके भुगतान के लिए ई-पेमेंट के तहत सैकड़ों किसानों द्वारा भारतीय स्टेट बैंक घंसौर के खाता अपने पंजीयन में रजिस्टर्ड कराए गए हैं जिसके कारण उक्त किसानों को जिला सहकारी बैंक घंसौर द्वारा डीडी के माध्यम से किसानों के खाते में भुगतान करने का प्रावधान निर्धारित किया गया है। लेकिन भारतीय स्टेट बैंक घंसौर द्वारा पिछले 1 माह से किसानों के खातों पर डीडी उपलब्ध होने के बाद भी राशि का समायोजन नहीं किए जाने से किसान भुगतान के लिए दर-दर भटक रहे हैं।

इस संबंध में भारतीय स्टेट बैंक शाखा घंसौर के अधिकारियों से सम्पर्क करने पर उनके द्वारा किसानों के खाते में राशि डालने पर आनाकानी की जा रही है। एवं तरह-तरह के बहाने बनाकर किसानों को भटकाया जा रहा है। इस संबंध में कलेक्टर से हस्तक्षेप करते हुए किसान की फसल का शीघ्र भुगतान की जाने की मांग जनहित में की गई है।

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